मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित एक विशेष समारोह में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता पर बात की। उन्होंने कहा कि बीते एक दशक में भारत का डोमेस्टिक डिफेंस प्रोडक्शन लगभग 4 गुना बढ़कर 1.80 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुँच चुका है। वहीं दूसरी ओर देश का कुल रक्षा निर्यात भी बढ़कर लगभग 39 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है। भारत अब रक्षा जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वदेशी क्षमताओं का विकास कर रहा है।
नए प्रोजेक्ट की शुरुआत: राजनाथ सिंह ने व्हीकल फैक्टरी जबलपुर में टी-सीरीज के युद्धक टैंकों की ओवरहॉलिंग के लिए 472 करोड़ रुपये की लागत वाली प्रोजेक्ट सुविधा की आधारशिला रखी। इस प्रोजेक्ट के स्थापित हो जाने से भारतीय सेना के टी-72 और टी-90 टैंकों का सुचारू रूप से रखरखाव और सुधार किया जा सकेगा। रक्षा मंत्री ने इस नए प्रोजेक्ट को भारत के आत्मनिर्भर इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह कदम भारत के रक्षा उद्योग को एक नई दिशा और ऊंचाई प्रदान करेगा।
निर्यात में भारी वृद्धि: रक्षा मंत्री ने आंकड़ों की तुलना करते हुए बताया कि वर्ष 2014 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन केवल 46 हजार करोड़ रुपये के आसपास ही दर्ज किया गया था। लेकिन बीते दस वर्षों की निरंतर मेहनत से यह आंकड़ा बढ़कर आज करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उसी प्रकार वर्ष 2014 में भारत का रक्षा निर्यात जहां सिर्फ 1 हजार करोड़ रुपये था, वह अब 39 हजार करोड़ रुपये हो गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि भारत का रक्षा क्षेत्र लगातार मजबूत और आत्मनिर्भर बनता जा रहा है।
भविष्य की रणनीति और लक्ष्य: राजनाथ सिंह ने सरकार के भविष्य के लक्ष्यों को सामने रखते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2028-29 तक डिफेंस एक्सपोर्ट को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाया जाएगा। भारत अब केवल देश के अंदर नए हथियारों का निर्माण ही नहीं कर रहा, बल्कि उनकी मरम्मत और अपग्रेडेशन की क्षमता भी बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत दुनिया के नक्शे पर डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के एक विशाल केंद्र के रूप में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा। आज का यह प्रोजेक्ट इसी आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाया गया एक अहम कदम है।
टैंक मरम्मत क्षमता का विकास: जबलपुर में शुरू होने वाली इस नई सुविधा से हर साल टी-72 और टी-90 श्रेणी के 80 टैंकों की मरम्मत का काम पूरा किया जा सकेगा। राजनाथ सिंह ने भरोसा जताया कि यह नई परियोजना निर्धारित समय के अंदर और उच्च गुणवत्ता के मानकों के अनुसार पूरी कर ली जाएगी। इस नई सुविधा के शुरू होने से न केवल सेना को मदद मिलेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी आजीविका और रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे। स्थानीय स्तर पर कुशल और अकुशल दोनों तरह के लोगों को काम मिलने की उम्मीद है।
सेना की क्षमता में इजाफा: भारतीय सेना को अपने अभियानों के लिए हर साल लगभग 230 टैंकों के नियमित रखरखाव और मरम्मत की सख्त आवश्यकता होती है। चेन्नई के अवाडी स्थित Heavy Vehicles Factory में फिलहाल हर साल करीब 150 टैंकों की मरम्मत करने की क्षमता ही मौजूद है। जबलपुर की Vehicle Factory में बनने वाली यह नई व्यवस्था इस कमी को पूरा करेगी और सेना की जरूरतों को समय पर निपटाएगी। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर भी रक्षा मंत्री ने पिछले 12 वर्षों के दौरान रक्षा क्षेत्र में आई इस प्रगति की सराहना की थी।














































