राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने जा रहे हैं। शरद पवार की पार्टी के संसद में कुल 8 सांसद हैं, जो इस बैठक में भाग लेंगे। यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में 22 जुलाई को शरद पवार और सुप्रिया सुले ने पीएम से मुलाकात की थी। अब पूरी पार्टी के सांसदों का प्रधानमंत्री से मिलना कई तरह के राजनीतिक संकेत दे रहा है। इस बैठक को लेकर दिल्ली से लेकर मुंबई तक हलचल काफी तेज है।
विधेयकों पर पार्टी का रुख: इस मुलाकात के बाद परिसीमन बिल को लेकर शरद पवार की पार्टी के रुख पर कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि सुप्रिया सुले ने इन सभी कयासों को खारिज करते हुए कहा कि बैठक सिर्फ राज्य के मुद्दों पर है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी FCRA बिल का किसी भी कीमत पर समर्थन नहीं करेगी और विरोध में रहेगी। वहीं दूसरी तरफ शिवसेना UBT ने कहा कि सुप्रिया सुले सभी सहयोगी दलों के मुद्दों को लेकर ही प्रधानमंत्री से मिलने जा रही हैं।
स्थानीय समस्याओं पर चर्चा: सुप्रिया सुले के अनुसार महाराष्ट्र इस समय जल संकट और किसानों की आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। इसके साथ ही तेजी से होते शहरीकरण से उत्पन्न समस्याएं और स्थानीय विकास कार्य भी बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं। सुले ने MPLAD फंड के सही इस्तेमाल न हो पाने का मुद्दा भी प्रधानमंत्री के सामने रखने की बात कही है। सांसदों को मिलने वाले 5 करोड़ के सालाना फंड का इस्तेमाल करने में काफी प्रशासनिक रुकावटें आ रही हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर सहयोग न करने का सीधा आरोप लगाया है।
MVA के गणित पर चर्चा: इस मुलाकात के बाद से ही महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी के भविष्य को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि शरद पवार का यह कदम MVA के लिए एक नया मोड़ ला सकता है। कुछ लोगों का मानना है कि इससे राज्य के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। हालांकि पार्टी नेताओं का कहना है कि यह केवल राज्यहित में की जा रही एक सामान्य मुलाकात है। फिर भी, राजनीतिक विश्लेषक इसे साधारण बैठक मानने को तैयार नहीं हैं।
बीजेपी नेता का समर्थन: बीजेपी नेत्री नवनीत राणा ने शरद पवार के सांसदों की प्रधानमंत्री से मुलाकात का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास के लिए देश के प्रधानमंत्री से मिलना एक बेहद सकारात्मक कदम है। नवनीत राणा के मुताबिक यदि सांसद राज्य की प्रगति को ध्यान में रखकर पीएम से मिल रहे हैं तो इसका स्वागत होना चाहिए। इसमें किसी भी तरह की राजनीति देखना सही नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मुलाकात से राज्य के विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।
अनिश्चितता का माहौल: शरद पवार गुट के सांसदों और पीएम मोदी की इस मुलाकात को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि किसी भी दावे की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। बैठक खत्म होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि किन-किन मुद्दों पर सहमति बनी है। महाराष्ट्र की राजनीति के लिहाज से यह घटनाक्रम काफी संवेदनशील माना जा रहा है। आने वाले समय में इस बैठक के दूरगामी परिणाम राज्य की राजनीति पर स्पष्ट दिखाई देंगे।


























































