सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू हो चुका है और आज यानी 3 अगस्त 2026 को सावन का पहला सोमवार है। सनातन धर्म में सावन के सोमवार व्रत की अत्यंत महिमा बताई गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी श्रद्धालु श्रावण मास के सोमवार को व्रत रखकर देवों के देव महादेव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट और दुख समाप्त हो जाते हैं तथा भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है।
अक्सर व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठता है कि सावन सोमवार का व्रत कैसे रखा जाता है, इसके क्या नियम हैं और इस दौरान किन-किन चीजों का सेवन किया जा सकता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं:
सावन सोमवार व्रत में क्या खाएं? (सात्विक एवं फलाहारी आहार)
सावन सोमवार व्रत के दौरान केवल सात्विक और शुद्ध फलाहारी भोजन का ही सेवन करना चाहिए। इस व्रत में आप निम्नलिखित चीजों का सेवन आसानी से कर सकते हैं:
- ताजे फल: सेब, केला, अनार, पपीता, अंगूर, आम, अनानास, जामुन आदि सभी प्रकार के मौसमी फलों का सेवन किया जा सकता है।
- दूध व दुग्ध उत्पाद: ताजा दूध, दही, छाछ, मक्खन और पनीर आदि का सेवन करना उत्तम माना जाता है।
- फलाहारी अनाज: साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और समा के चावल (मोरधन) से बने व्यंजनों का सेवन कर सकते हैं।
- सब्जियां: आलू, शकरकंद, लौकी, कद्दू, टमाटर, अरबी, हरी मिर्च और हरा धनिया व्रत के भोजन में शामिल किया जा सकता है।
- सूखे मेवे (डाई ड्राई फ्रूट्स): बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट, मखाना और मूंगफली का सेवन ऊर्जा बनाए रखने के लिए कर सकते हैं।
- मसाले व नमक: केवल सेंधा नमक का ही प्रयोग करें। इसके अलावा जीरा, काली मिर्च, हरी इलायची, चीनी, चाय और कॉफी का सेवन भी किया जा सकता है।
सावन सोमवार व्रत में क्या न खाएं? (वर्जित चीजें)
व्रत की पवित्रता बनाए रखने के लिए कुछ चीजों का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है:
- अनाज व दालें: गेहूं, चावल, बेसन, सूजी, मैदा और किसी भी प्रकार की दालों का सेवन न करें।
- तामसिक भोजन: प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक चीजों से पूरी तरह परहेज करें।
- मसाले: साधारण सफेद नमक, लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला, धनिया पाउडर और हल्दी का प्रयोग व्रत के भोजन में नहीं किया जाता है।
सावन सोमवार व्रत के मुख्य नियम व पूजा विधि
व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
- प्रातः स्नान: सोमवार के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान ध्यान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
- संकल्प व पूजा: भगवान शिव के समक्ष बैठकर व्रत का संकल्प लें और फिर विधि-विधान से शिव जी की पूजा-अर्चना आरंभ करें।
- जलाभिषेक व पत्रम्: शिवलिंग पर शुद्ध जल, दूध, गंगाजल अर्पित करें तथा बेलपत्र, धतूरा और आंक के फूल चढ़ाएं।
- पाठ व आरती: शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में कपूर या घी के दीपक से शिव जी की आरती उतारें।
- व्रत कथा: सावन सोमवार की प्रामाणिक व्रत कथा अवश्य पढ़ें या सुनें। इसे आप सुबह या शाम अपनी सुविधा अनुसार पढ़ सकते हैं।
- संध्या पूजन: शाम के समय पुनः हाथ-पैर धोकर या स्नान कर भगवान शिव की आरती करें और फलाहार ग्रहण करें।
- संयम व आचरण: व्रत के दौरान मन में किसी के प्रति बुरे विचार न लाएं और ब्रह्मचर्य के नियमों का पूर्ण पालन करें।


























































