उत्तर प्रदेश में इस समय अगस्त महीने के राशन वितरण को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। अपनी विभिन्न लंबित मांगों को मनवाने के लिए मंगलवार को सैकड़ों कोटेदार लखनऊ में इकट्ठा हुए। इन सभी नाराज कोटेदारों ने एकजुट होकर राज्य की विधानसभा का घेराव करने की पूरी तैयारी कर ली थी। लेकिन भारी संख्या में मौजूद पुलिस बल ने उन्हें रास्ते में ही चारबाग के पास पूरी तरह रोक दिया। चारबाग पर रोकने के बाद पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाकर इको गार्डन की तरफ भेज दिया।
राशन रोकने की सख्त चेतावनी: इको गार्डन पहुंचने के बाद कोटेदार संगठन ने राज्य सरकार को एक बेहद सख्त चेतावनी जारी की है। संगठन का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द उनकी सभी जायज मांगों पर सुनवाई करनी चाहिए। अगर सरकार उनकी अनदेखी करती है, तो अगस्त महीने में राशन वितरण का काम पूरी तरह से रोक दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर आंदोलन का भी स्पष्ट ऐलान किया है। कोटेदार आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और बिना मांगे पूरी हुए पीछे हटने को बिल्कुल तैयार नहीं हैं।
वितरण का भारी जिम्मा: मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के पचहत्तर जनपदों में काम करने वाले कोटेदारों की कुल संख्या सत्तर हजार है। ये सभी सत्तर हजार कोटेदार मिलकर हर महीने लगभग अस्सी लाख कुंतल राशन का सफल वितरण करते हैं। इन लोगों पर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन बांटने की बहुत ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके अलावा ये सभी प्रधानमंत्री अन्न योजना के अंतर्गत भी गरीबों को निशुल्क राशन वितरित करते हैं। सरकार की इन दोनों बड़ी और अहम योजनाओं का पूरा भार सीधे तौर पर इन्हीं कोटेदारों के कंधों पर है।
लाभांश में भारी अंतर: कोटेदारों का यह स्पष्ट आरोप है कि अन्य राज्यों की तुलना में यूपी में उनका कमीशन बेहद कम है। उन्होंने बताया कि यूपी सरकार की तरफ से उन्हें लाभांश के रूप में सिर्फ नब्बे रुपए प्रति कुंतल ही मिलते हैं। इसके विपरीत हरियाणा और गोवा जैसे राज्यों में कोटेदारों को दो सौ रुपए तक का अच्छा लाभांश मिलता है। यह भारी आर्थिक अंतर यूपी के कोटेदारों के लिए एक बहुत ही गहरी निराशा का बड़ा कारण बना हुआ है। इसीलिए वे चाहते हैं कि उनके लाभांश को जल्द बढ़ाकर उनके जीवन स्तर को और बेहतर बनाया जाए।
नियमित मानदेय की प्रमुख मांग: संगठन की तरफ से लाभांश बढ़ाने के साथ-साथ एक नियमित मानदेय तय करने की भी प्रमुख मांग रखी गई है। इसके अतिरिक्त कोटेदारों ने अपने बीते तीन महीने के लंबित पड़े हुए भुगतान को भी तत्काल जारी करने को कहा है। वे लगातार यह मांग कर रहे हैं कि अन्य राज्यों की तरह यहां भी कोटेदारों को सम्मानजनक सुविधाएं दी जाएं। उन्होंने बताया कि कुछ अन्य राज्यों में सरकारें न्यूनतम आय गारंटी के तहत विशेष सुविधाएं दे रही हैं। इन राज्यों में इस योजना के अंतर्गत दो सौ हजार रुपए तक की आर्थिक सुविधा प्रदान की जा रही है।
इको गार्डन में भारी तनाव: इस समय पुलिस और प्रशासन ने प्रदर्शन कर रहे सभी कोटेदारों को इको गार्डन के अंदर ही रोक कर रखा है। वहां मौजूद कोटेदारों के आक्रामक तेवर देखकर यही लग रहा है कि यह आंदोलन आसानी से खत्म नहीं होगा। अगर सरकार ने उनकी इन मांगों पर जल्द कोई निर्णय नहीं लिया, तो यह प्रदर्शन भविष्य में और तेज हो सकता है। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर पुलिस और कोटेदारों के बीच काफी देर तक भारी तनाव की स्थिति बनी रही। हालांकि पुलिस की मुस्तैदी के चलते सभी प्रदर्शनकारियों को विधानसभा तक पहुंचने से पूरी तरह रोक लिया गया।









































