Tamil Nadu राज्य के Madurai में एक प्रसिद्ध मंदिर की बेशकीमती जमीन से जुड़ा एक और बड़ा मामला सामने आया है। यह गंभीर मामला प्रतिष्ठित Arulmigu Meenakshi Sundareshwarar मंदिर की एक मूल्यवान संपत्ति के साथ हुई धोखाधड़ी से संबंधित है। इस पूरे मामले में मदुरै की सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 19 लोगों के विरुद्ध FIR दर्ज की है। पुलिस ने यह मुकदमा मंदिर प्रशासन के एक बड़े अधिकारी द्वारा दी गई लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज किया है। इतने सारे लोगों के खिलाफ एक साथ मामला दर्ज होने से पूरे इलाके में हड़कंप का माहौल बन गया है।
जॉइंट कमिश्नर ने दर्ज कराई शिकायत सेंट्रल क्राइम ब्रांच को यह विस्तृत शिकायत मंदिर के जॉइंट कमिश्नर की ओर से आधिकारिक रूप से सौंपी गई थी। शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने कथित रूप से मदुरै के चोक्कीकुलम में स्थित मंदिर की एक कीमती संपत्ति को निशाना बनाया। इन सभी आरोपियों ने इस बेशकीमती जमीन का पट्टा धोखाधड़ी से ट्रांसफर करने की एक बहुत बड़ी साजिश रची थी। इसके अलावा गैर-कानूनी मॉर्गेज डीड और पावर-ऑफ-अटॉर्नी रजिस्ट्रेशन कराने का भी गंभीर आरोप इन लोगों पर लगा है। अब पुलिस इस शिकायत के आधार पर सभी नामजद 19 आरोपियों की भूमिका की बहुत ही गहनता से जांच कर रही है।
चैरिटी के लिए दान में मिली थी जमीन धोखाधड़ी का शिकार हुई इस बेशकीमती प्रॉपर्टी का एक बहुत ही पुराना और धार्मिक महत्व वाला इतिहास रहा है। यह प्रॉपर्टी मूल रूप से साल 1930 में बनी एक रजिस्टर्ड वसीयत के अंतर्गत इस पवित्र मंदिर को दान में मिली थी। इस जमीन को दान करने का मुख्य उद्देश्य मंदिर के चैरिटी और धार्मिक सेवा के महत्वपूर्ण काम पूरे करना था। वसीयत के अनुसार इस संपत्ति से होने वाली आय का उपयोग केवल धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए ही किया जाना था। लेकिन भू-माफियाओं ने लालच में आकर इस पवित्र संपत्ति को भी अपने गैर-कानूनी मंसूबों का सीधा निशाना बना लिया।
रेवेन्यू रिकॉर्ड में की गई हेराफेरी इस बड़े घोटाले की जांच कर रहे अधिकारियों ने इस पूरे फर्जीवाड़े के तरीके को लेकर भी कई अहम खुलासे किए हैं। जांच करने वालों का स्पष्ट आरोप है कि कुछ प्राइवेट लोगों ने सरकारी महकमे के साथ मिलकर इस अपराध को अंजाम दिया। इन भू-माफियाओं ने राजस्व और सब-रजिस्ट्रार विभाग के पूर्व अधिकारियों के साथ मिलकर रेवेन्यू रिकॉर्ड में बड़ी हेराफेरी की। सरकारी दस्तावेजों में यह छेड़छाड़ इसलिए की गई ताकि गैर-कानूनी लेन-देन को बिल्कुल कानूनी रूप दिया जा सके। पुराने अधिकारियों की इस संदिग्ध मिलीभगत के कारण ही यह फर्जीवाड़ा इतने लंबे समय तक आसानी से छिप सका था।
पवित्र पहाड़ी को बताया गया था वक्फ मदुरै के हिंदू समुदाय और मंदिरों की संपत्ति को लेकर यह कोई पहला विवादित मामला नहीं है जो सामने आया है। इससे कुछ समय पहले भी हिंदुओं की एक बहुत ही पवित्र पहाड़ी को लेकर एक बहुत बड़ा और गंभीर विवाद खड़ा हो गया था। उस दौरान कुछ लोगों द्वारा उस पवित्र हिंदू पहाड़ी को वक्फ की संपत्ति कहा जा रहा था, जिससे काफी रोष फैला था। इस तरह के दावों से स्थानीय लोगों की धार्मिक भावनाओं को बहुत गहरी ठेस पहुंची थी और तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। मंदिरों और हिंदुओं की पवित्र संपत्तियों पर हो रहे इन लगातार कब्जों के दावों के कारण लोगों में काफी ज्यादा आक्रोश है।
हिंदू समुदाय ने किया था जोरदार प्रदर्शन जब उस पवित्र पहाड़ी को वक्फ की संपत्ति बताया गया था, तब इसका पूरे राज्य में बहुत ही कड़ा विरोध हुआ था। उस समय तमिलनाडु के मदुरै में हिंदू समुदाय ने सड़कों पर उतरकर इस दावे के खिलाफ अपना जोरदार प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने मांग की थी कि मंदिरों और हिंदुओं की सभी पवित्र संपत्तियों की सरकार द्वारा पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अब मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर की संपत्ति का यह नया घोटाला सामने आने के बाद समुदाय का गुस्सा फिर से भड़क सकता है। फिलहाल प्रशासन और पुलिस इस पूरे मामले को बहुत ही गंभीरता से लेते हुए आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं।

























































