नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही भव्य फिल्म ‘रामायण’ अपनी विशाल स्टारकास्ट और भव्य पैमाने को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई है। इस पौराणिक गाथा और विशाल सिनेमाई प्रोजेक्ट में कुल 23 दमदार एक्टर्स महत्वपूर्ण और अहम भूमिकाएं निभाते नजर आने वाले हैं। इस भव्य फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण का किरदार निभा रहे हैं। दिग्गज और मशहूर कलाकारों से सजी इस बड़ी फिल्म में अब एक और सशक्त अभिनेत्री शीबा चड्ढा का महत्वपूर्ण नाम भी जुड़ गया है। अपनी बेहतरीन अदाकारी के लिए जानी जाने वाली शीबा चड्ढा इस महत्वाकांक्षी फिल्म में ‘मंथरा’ का बेहद महत्वपूर्ण रोल निभाएंगी।
किरदार का नया नजरिया: परंपरागत रूप से पौराणिक कथाओं में मंथरा को केवल एक कुटिल और षड्यंत्रकारी दासी के रूप में ही देखा जाता रहा है। लेकिन अभिनेत्री शीबा चड्ढा इस ऐतिहासिक और चर्चित किरदार को एक बिल्कुल नए नजरिए से पर्दे पर पेश करने की तैयारी में हैं। उनका मानना है कि मंथरा के द्वारा लिए गए फैसलों के पीछे भी गहरा भावनात्मक आधार और कई ठोस वजहें मौजूद थीं। इसलिए मंथरा के इस किरदार की भावनात्मक गहराई को सिनेमा के पर्दे पर पूरी शिद्दत के साथ उकेरा जाना बेहद जरूरी है। ‘बधाई दो’, ‘पगलैट’ और ‘बैंडिश डाकुओं’ जैसी चर्चित रचनाओं में अपनी कला का लोहा मनवा चुकीं शीबा इस रोल में जान फूंकेंगी।
ललिता पवार की छाप: भारतीय टेलिविजन के इतिहास में मंथरा का नाम आते ही रामानंद सागर की ‘रामायण’ की दिग्गज अभिनेत्री ललिता पवार याद आती हैं। ललिता पवार ने इस नकारात्मक किरदार को इतनी शिद्दत और जीवंतता से पर्दे पर उतारा था कि दर्शक उन्हें वास्तविक जीवन में भी वैसा ही समझते थे। 1916 में नासिक में जन्मीं ललिता पवार का असली नाम अंबा लक्ष्मण राव सगुन था और वे मुख्यधारा की फिल्मों में हीरोइन बनना चाहती थीं। उन्होंने अपने अभिनय सफर की शुरुआत महज 9 साल की उम्र में साल 1928 की प्रसिद्ध मूक फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ से की थी। एक बाल कलाकार के रूप में सिनेमा जगत में कदम रखकर उन्होंने शुरुआती दौर में ही अपनी अमिट छाप छोड़ दी थी।
सेट पर दर्दनाक हादसा: साल 1942 में फिल्म ‘जंग-ए-आजादी’ के सेट पर शूटिंग के दौरान हुए एक दर्दनाक और भयावह हादसे ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। एक सीन की शूटिंग के दौरान उनके सह-कलाकार का थप्पड़ इतना जोरदार पड़ा कि वे सीधे सेट के फर्श पर नीचे गिर पड़ीं। इस भयंकर हादसे के कारण उनकी आंख की नस फट गई और उनके चेहरे के एक हिस्से को गंभीर रूप से लकवा मार गया था। इस दर्दनाक घटना और शारीरिक क्षति के बाद ललिता पवार का मुख्यधारा की फिल्मों में हीरोइन बनने का सपना हमेशा के लिए टूट गया। हालांकि उन्होंने जीवन में कभी हार नहीं मानी और कई सालों के लंबे इलाज के बाद खुद को मजबूत बनाकर सिनेमा में वापसी की।
खलनायिका के रूप में सफलता: हादसे के बाद ललिता पवार ने खुद को पर्दे पर नकारात्मक भूमिकाओं और सख्त मिजाज सास के किरदारों के लिए पूरी तरह तैयार किया। अपने लंबे और शानदार करियर में उन्होंने हिंदी, मराठी और गुजराती भाषाओं की 700 से भी अधिक फिल्मों में काम करके इतिहास रचा। बड़े पर्दे पर अत्याचारी सास की भूमिका निभाने से लेकर रामानंद सागर की ‘रामायण’ में मंथरा बनने तक उन्होंने हर रोल में लोहा मनवाया। रामानंद सागर के धारावाहिक में मंथरा का अमर किरदार निभाकर वे देश के कोने-कोने में और हर घर-घर में अत्यधिक प्रसिद्ध हो गईं। अपने जीवन के अंतिम दौर में वे मुंह के कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझती रहीं और 1998 में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा।
नए रूप में वापसी: ललिता पवार द्वारा ऐतिहासिक और अमर बनाए गए इस मंथरा के किरदार की यादें आज भी दर्शकों के दिलों में पूरी तरह ताजा हैं। अब नितेश तिवारी की आधुनिक ‘रामायण’ में इस पौराणिक पात्र को नए कलेवर में देखना दर्शकों के लिए काफी दिलचस्प होने वाला है। शीबा चड्ढा जैसी मंझी हुई अभिनेत्री जब इस भूमिका को पर्दे पर उतारेंगी तो उनके अभिनय और दृष्टिकोण पर सभी की निगाहें होंगी। 23 कलाकारों की इस विशाल स्टारकास्ट वाली फिल्म में मंथरा का यह भावनात्मक रूप कहानी में एक नया मोड़ दे सकता है। दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि आधुनिक ‘रामायण’ में मंथरा के इस ऐतिहासिक किरदार को किस नए अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा।









































