ज्येष्ठ अधिकमास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि शनिवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र तिथि पर किया गया दान, जप और व्रत अन्य सभी पूर्णिमाओं की तुलना में कई गुना अधिक कल्याणकारी और फलदायी माना जाता है।
अधिकमास का दुर्लभ संयोग पद्म पुराण में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि अधिकमास का आगमन हर तीन साल में केवल एक बार होता है। इस विशेष दिन पर भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा, पवित्र नदियों में स्नान और सामर्थ्य अनुसार दान करने का फल कई हजार गुना अधिक प्राप्त होता है।
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ग्रहों की स्थिति और शुभ मुहूर्त द्रिक पंचांग के अनुसार, शनिवार के दिन सूर्य देव वृषभ राशि में और चंद्र देव तुला राशि में विराजमान रहेंगे। शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। वहीं, राहुकाल का समय सुबह 8 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 10 बजकर 35 मिनट तक रहेगा, जिसमें कोई भी नया या शुभ कार्य करने से बचना चाहिए।
सर्वसिद्धिदायिनी पूर्णिमा का प्रभाव अधिकमास की यह पूर्णिमा सर्वसिद्धिदायिनी मानी जाती है, जिसका अर्थ है कि यह हर तरह की मनोकामनाओं को पूर्ण और सिद्ध करने वाली है। ऐसी मान्यता है कि इस पावन तिथि पर व्रत रखने, पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाने और अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करने से साधक को सामान्य दिनों के मुकाबले अनंत गुना अधिक पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
भगवान नारायण को समर्पित है यह पावन तिथि यह शुभ तिथि जगत के पालनहार भगवान नारायण यानी भगवान विष्णु को पूर्ण रूप से समर्पित है। इस दिन श्रद्धापूर्वक उपवास रखने और भगवान सत्यनारायण की कथा का पाठ करने या सुनने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि, शांति और धन-धान्य की अपार वृद्धि होती है।
विशेष पूजा विधि इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करने के लिए सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्यकर्म और स्नान पूर्ण करें। यदि संभव हो तो नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद स्वच्छ या पीले रंग के साफ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर को साफ कर वहां गंगाजल का पवित्र छिड़काव करें और एक लकड़ी की चौकी स्थापित करें। उस चौकी पर पीला या लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की सुंदर मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। अब श्री हरि को ताजे फूल, मौसमी फल, चंदन, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें। भगवान के भोग में तुलसी दल अनिवार्य रूप से शामिल करें। इस दिन पूरे परिवार के साथ भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें या स्वयं पढ़ें। इसके साथ ही विष्णु सहस्रनाम या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर जप करें।
इन वस्तुओं का दान माना गया है महापुण्यदायी ज्येष्ठ का महीना होने के कारण इस समय भीषण गर्मी का प्रकोप रहता है। इसलिए अधिकमास की इस पूर्णिमा पर शीतल जल से भरी मटकी या मिट्टी का घड़ा, सत्तू, आम, खरबूजा, हाथ का पंखा, सूती वस्त्र या अन्न का दान करना महापुण्यदायी माना जाता है। किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति या योग्य ब्राह्मण को अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार इन वस्तुओं का दान अवश्य करें।





































