बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि पंजाब में दलित व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाना कांग्रेस का चुनावी हथकंड़ा है। यह तय है कि वहां कांग्रेस गैर दलित के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेगी। ठीक इसी प्रकार उत्तर प्रदेश में भाजपा का भी ओबीसी समाज के प्रति उभरा नया प्रेम वास्तव में दिखावटी एवं हवा हवाई है।
मायावती ने सोमवार को लखनऊ में बयान जारी कर कहा कि बेहतर होता यदि कांग्रेस पंजाब में दलित वर्ग से पूरे पांच साल के लिएमुख्यमंत्री बनाती। अब कुछ समय के लिए कमान दलित वर्ग के चरणजीत सिंह चन्नी के हाथ में देना केवल चुनावी हथकंडा ही है। कांग्रेस के इस कदम से साफ है कि वह पंजाब में अकाली दल और बसपा के गठबंधन से घबराई हुई है। पंजाब का दलित वर्ग इनके बहकावे में बिल्कुल भी आने वाला नहीं है।
उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू एंड कंपनी के पास यदि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर से ज्यादा काबिल कोई और व्यक्ति होता तो उन्हें संविधान निर्माण में शामिल नहीं किया जाता। बाबा साहब की वजह से ही दलितों एवं अल्पसंख्यक समाज के लोगों को अधिकार मिले। मायावती ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इसी तरह से यूपी में भाजपा का नया ओबीसी प्रेम है। यदि यह वास्तव में सच्चा एवं सार्थक होता तो इनकी केंद्र व यूपी समेत अन्य राज्यों की सरकारें नौकरियों में एसी, एसटी का बैकलॉग पूरा कर देतीं और न ही ओबीसी की जातीय जनगणना की मांग को स्वीकार किया जा रहा है। भाजपा का भी इस वर्ग के वोट की खातिर कोई नाटक चलने वाला नहीं है। दलित और ओबीसी न तो भाजपा के और न ही कांग्रेस के बहकावे में आएंगे।
चरनजीत सिंह चन्नी के साथ ही सुखजिंदर रंधावा और ओमप्रकाश सोनी ने भी पंजाब के नए उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली है। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी शामिल हुए। उनके साथ हरीश रावत और अजय माकन भी चन्नी को बधाई देने पहुंचे। राहुल ने चन्नी को शुभकामनाएं दी।
बता दें कि पंजाब में दलित दो हिस्सों में बंटा हुआ है। यहां रविदासी और वाल्मीकि दो बड़े वर्ग दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाला दलितों का बड़ा हिस्सा डेरों से जुड़ा हुआ है। चुनाव के समय यह डेरे अहम भूमिका निभाते हैं।





































