मई 2026 पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व
सनातन धर्म में अधिक मास की पूर्णिमा, जिसे ‘पुरुषोत्तम पूर्णिमा’ भी कहा जाता है, का विशेष धार्मिक महत्व है। माना जाता है कि इस पावन तिथि पर जो भी श्रद्धालु पूरी निष्ठा और सच्चे मन से व्रत रखता है, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और तर्पण का विशेष फल प्राप्त होता है।
पूर्णिमा तिथि एवं व्रत की महत्वपूर्ण तिथियाँ
- पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ: 30 मई 2026, सुबह 11:57 बजे से।
- पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 31 मई 2026, दोपहर 2:14 बजे तक।
- पूर्णिमा व्रत: 30 मई 2026 को रखा जाएगा।
- स्नान-दान की तिथि: 31 मई 2026।
- चंद्रोदय का समय (30 मई): रात्रि 07:36 बजे।
शुभ मुहूर्त (30 मई 2026)
पूजा और शुभ कार्यों के लिए निम्नलिखित मुहूर्त अत्यंत लाभकारी हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:02 से 04:43 तक।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:27 से 03:37 तक।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:38 से 07:01 तक।
- निशिता मुहूर्त: शाम 07:13 से 07:33 तक।
स्नान-दान के लिए शुभ समय (31 मई 2026)
- अमृत काल: सुबह 04:33 से 06:20 तक।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:08 से 04:56 तक।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:57 से दोपहर 12:51 तक।
अधिक मास पूर्णिमा के दिन क्या करें? (पूजा विधान)
- व्रत एवं पूजन: इस दिन उपवास रखें और शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन करें।
- पवित्र स्नान: संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें; यदि न जा सकें, तो घर पर ही गंगाजल मिले जल से स्नान करें।
- दान-पुण्य: दान, तप और पुण्य कार्यों के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ माना गया है। जरूरतमंदों को भोजन या दान दें।
- धार्मिक पाठ: इस विशेष दिन पर श्रीमद्भगवद्गीता और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यंत पुण्यदायी होता है।
- पीपल की पूजा: पूर्णिमा पर पीपल के वृक्ष की पूजा का भी विशेष महत्व है, इससे आर्थिक कष्ट दूर होते हैं।




































