हिंदू धर्म में मां दुर्गा की उपासना का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी का पावन व्रत किया जाता है। आगामी सोमवार को यह शुभ व्रत रखा जाएगा। इस दिन श्रद्धालु माता रानी की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं और पूरे दिन का उपवास रखते हैं। धार्मिक मान्यता है कि मासिक दुर्गाष्टमी के दिन मां भगवती की सच्चे मन से आराधना करने से भक्तों के जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि व खुशहाली का वास होता है।
आइए विस्तार से जानते हैं मासिक दुर्गाष्टमी का शुभ मुहूर्त, पूजा की सही विधि और वे प्रभावशाली मंत्र जिनका जाप इस दिन अवश्य करना चाहिए।
मासिक दुर्गाष्टमी 2026: शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का समय इस प्रकार रहेगा। शुभ योग और मुहूर्त में की गई पूजा विशेष फलदायी होती है:
- अष्टमी तिथि का आरंभ: 21 जून 2026, दोपहर 03 बजकर 20 मिनट से
- अष्टमी तिथि का समापन: 22 जून 2026, दोपहर 03 बजकर 39 मिनट तक
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 04 मिनट से सुबह 04 बजकर 44 मिनट तक (ध्यान और पूजा के लिए सर्वोत्तम समय)
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक (किसी भी शुभ कार्य के लिए श्रेष्ठ समय)
मासिक दुर्गाष्टमी: सरल और सटीक पूजा विधि
व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए माता रानी की पूजा विधि-विधान से करनी चाहिए। आप इन सरल चरणों का पालन कर सकते हैं:
- स्नान और संकल्प: अष्टमी के दिन प्रातःकाल जल्दी (संभव हो तो ब्रह्म मुहूर्त में) उठें। स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल और पुष्प लेकर मां दुर्गा के निमित्त व्रत व पूजा का संकल्प लें।
- स्थान की शुद्धि: अपने घर के मंदिर या पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें और वहां गंगाजल छिड़क कर उसे पवित्र कर लें।
- चौकी की स्थापना: एक लकड़ी की चौकी लें और उस पर लाल रंग का नया व साफ वस्त्र बिछाएं। अब इस चौकी पर माता रानी की सुंदर प्रतिमा या तस्वीर आदरपूर्वक स्थापित करें।
- श्रृंगार और अर्पण: देवी मां को लाल गुड़हल का फूल अत्यंत प्रिय है, उन्हें लाल फूल अर्पित करें। इसके साथ ही लाल चुनरी, सोलह श्रृंगार की सामग्री (चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी आदि), रोली और अक्षत (चावल) चढ़ाएं।
- भोग लगाएं: मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए उन्हें ताजे फल, मेवा, मिष्ठान, घर की बनी खीर या हलवे का सात्विक भोग लगाएं।
- दीपक और पाठ: माता की प्रतिमा के सामने शुद्ध देसी घी का दीपक प्रज्वलित करें और धूप जलाएं। इसके बाद ‘दुर्गा सप्तशती’ का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- आरती और क्षमा प्रार्थना: अंत में परिवार सहित खड़े होकर मां दुर्गा की आरती करें और पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें।
मासिक दुर्गाष्टमी पर जपने योग्य सिद्ध मंत्र
पूजा के दौरान या दिन भर में माता रानी के इन शक्तिशाली और चमत्कारी मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और हर प्रकार की बाधा दूर होती है:
1. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।
2. ऊँ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते।।
3. या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
4. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
5. या देवी सर्व भूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।।
सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया मासिक दुर्गाष्टमी का यह व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और देवी मां की असीम कृपा दिलाता है।





































