संसद का वर्तमान मानसून सत्र जारी है, लेकिन लगातार हंगामे के कारण कामकाज प्रभावित हो रहा है। शुक्रवार को लोकसभा की कार्यवाही सुबह जैसे ही शुरू हुई, भारी शोर-शराबे के कारण उसे तुरंत स्थगित करना पड़ा। विपक्षी दलों के सांसद अपनी मांगों को लेकर लगातार हंगामा कर रहे थे, जिसके चलते सदन को चलाना मुश्किल हो गया। इसके बाद तय किया गया कि सदन की कार्यवाही दोपहर बाद दोबारा शुरू की जाएगी। इस हंगामे के कारण लोकसभा के कई अहम विधायी कार्य और निर्धारित प्रश्नकाल भी पूरी तरह से प्रभावित हुए हैं।
प्रियंका गांधी का प्रदर्शन: सदन के अंदर ही नहीं, बल्कि बाहर भी विपक्षी दलों का सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन जारी है। इसी कड़ी में 20 जुलाई को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद के मकर द्वार पर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। उनके साथ कई अन्य प्रमुख विपक्षी सांसद भी इस धरने में शामिल हुए और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से CJP (नागरिक न्याय मंच) के शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में किया गया था। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाना बनाया और उनके खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।
कई अहम बिलों पर चर्चा: इस हंगामे के बीच शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में कई अहम विधायी प्रस्तावों पर चर्चा का कार्यक्रम भी तय है। एक तरफ लोकसभा में जहां ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026’ पेश किया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ राज्यसभा में भी अहम कामकाज होगा। ऊपरी सदन यानी राज्यसभा में ‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) बिल, 2026’ पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। सरकार की पूरी कोशिश है कि हंगामे के बावजूद इन सभी महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में चर्चा के बाद जल्द से जल्द पारित करा लिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या: निचले सदन में आज एक और बहुत ही महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित विधेयक पेश किया जाने वाला है। संसदीय मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ‘सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2026’ को पटल पर रखेंगे। इस बिल के जरिए सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की वर्तमान स्वीकृत संख्या में बदलाव करने का अहम प्रस्ताव रखा गया है। सरकार इस बिल को चर्चा के बाद लोकसभा में पारित कराने का भी पूरा प्रयास करेगी। माना जा रहा है कि अदालतों में लंबित मुकदमों के भारी बोझ को कम करने के लिए यह एक बहुत ही जरूरी कदम साबित होगा।
विपक्ष से सहयोग की अपील: सरकार संसद में लंबित पड़े सभी जरूरी विधायी कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करना चाहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी विपक्षी दलों से शांति बनाए रखने और सकारात्मक सहयोग करने की विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सदन में अपने सभी जरूरी मुद्दे उठाने की पूरी आजादी है, लेकिन इसके लिए उन्हें नियमों का पालन करना चाहिए। मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि महत्वपूर्ण बिलों के पास होने या प्रश्नकाल के दौरान बाधा डालना किसी के भी फायदे में नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संसद के सुचारू रूप से कामकाज के लिए सभी सदस्य अपना पूरा सहयोग देंगे।
शिक्षा पर सरकार का रुख: विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार शिक्षा और परीक्षा सुधारों को लेकर अपनी प्रतिबद्धता भी लगातार जाहिर कर रही है। हाल ही में पास हुए ‘पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ का जिक्र करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि हर कोई शिक्षा को लेकर बहुत गंभीर है। विशेष रूप से देश भर में फैल रही परीक्षा पेपर लीक की गंभीर समस्या से निपटने के लिए यह कानून बहुत जरूरी था। उन्होंने कहा कि छात्रों के सुरक्षित भविष्य के लिए इस नए और कड़े कानून को जल्द से जल्द पूरे देश में लागू करना सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है।








































