हमीरपुर जिले में बेतवा नदी के ऊपर बन रहे एक विशाल पुल का हिस्सा गिरने से एक बहुत बड़ी त्रासदी हो गई है। गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात को अचानक आए भीषण आंधी-तूफान ने इस निर्माणाधीन पुल को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया। घटना के समय पुल के निर्माण कार्य में लगे कई मजदूर उसी के नीचे गहरी नींद में सो रहे थे, जो मलबे की चपेट में आ गए। इस भयंकर दुर्घटना में अब तक पांच मजदूरों के दर्दनाक मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिससे उनके परिवारों में कोहराम मच गया है। अभी भी कुछ अन्य मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका है, जिससे मृतकों का यह आंकड़ा और भी बढ़ने का डर सता रहा है।
मुख्यमंत्री की भावुक अपील सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इसे एक अत्यंत हृदय विदारक दुर्घटना करार दिया है। मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक शोक संदेश में कहा कि बेतवा नदी पर हुई इस जनहानि से उन्हें व्यक्तिगत रूप से बहुत ज्यादा दुख पहुंचा है। उन्होंने पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि इस अत्यंत मुश्किल समय में सरकार की पूरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं। मुख्यमंत्री ने प्रभु श्री राम से प्रार्थना की है कि वह सभी दिवंगत आत्माओं को अपने श्री चरणों में उच्च स्थान प्रदान करें। इसके साथ ही उन्होंने इस हादसे में घायल हुए सभी मजदूरों के शीघ्र ही पूर्ण रूप से स्वस्थ होने की भी ईश्वर से कामना की है।
युद्ध स्तर पर बचाव कार्य घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश पर स्थानीय जिला प्रशासन पूरी तरह से हरकत में आ गया है। मलबे में फंसे लोगों की जान बचाने के लिए राज्य आपदा मोचन बल यानी एसडीआरएफ की टीमों को तत्काल मौके पर बुला लिया गया है। एसडीआरएफ के साथ-साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन की टीमें भी लगातार बिना रुके इस कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन में पूरी जी-जान से जुटी हुई हैं। भारी भरकम मलबे को हटाने के लिए बड़ी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि फंसे हुए मजदूरों तक जल्द पहुंचा जा सके। प्रशासन का सबसे पहला और मुख्य लक्ष्य मलबे में दबे जीवित लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और उन्हें तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
मुआवजे की तत्काल घोषणा इस हृदय विदारक त्रासदी के बाद पीड़ित परिवारों की दयनीय आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तुरंत सहायता का हाथ बढ़ाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मलबे में दबकर जान गंवाने वाले सभी पांच मजदूरों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये का भारी मुआवजा देने का ऐलान किया है। जान गंवाने वालों के अलावा, इस दर्दनाक हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए मजदूरों को भी पचास-पचास हजार रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। जिला प्रशासन को यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वह बिना किसी देरी के जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी करके पीड़ितों को यह मुआवजा राशि सौंपे। सरकार की इस त्वरित आर्थिक मदद से इन गरीब मजदूर परिवारों को इस भयानक दुख के समय में थोड़ी बहुत राहत जरूर मिलेगी।
पुल की भौगोलिक अहमियत यह निर्माणाधीन पुल हमीरपुर जिले के दो महत्वपूर्ण इलाकों को आपस में जोड़ने के लिए एक बड़ी और अहम परियोजना के तहत बनाया जा रहा था। इसका मुख्य उद्देश्य थाना लालपुर के मोराकंदर गांव को कुरारा इलाके की मवाईजार सीमा से सीधे तौर पर जोड़कर आवागमन को आसान बनाना था। इस पुल के निर्माण से स्थानीय लोगों को बेतवा नदी पार करने में लगने वाले समय और दूरी दोनों में भारी कमी आने की पूरी उम्मीद थी। लेकिन तेज आंधी और तूफान के कारण पुल गिरने से इलाके के लोगों का यह महत्वपूर्ण सपना फिलहाल पूरी तरह से अधूरा ही रह गया है। अब इस पुल के मलबे को हटाने और दोबारा निर्माण कार्य शुरू करने में काफी समय लग सकता है, जिससे स्थानीय जनता को यातायात के लिए और इंतजार करना पड़ेगा।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी भयंकर आंधी-तूफान के कारण पुल के इतने बड़े हिस्से के ढह जाने से इसके निर्माण में इस्तेमाल हुई सामग्री की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों द्वारा यह अत्यंत गंभीर आरोप लगाया जा रहा है कि पुल के निर्माण कार्य में मजदूरों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम बिल्कुल नहीं किए गए थे। एक मजबूत पुल का तेज हवाओं को न झेल पाना निर्माण कार्य में हुई भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार की तरफ बहुत सीधा इशारा कर रहा है। प्रशासन अब इस बात की भी गहन जांच करेगा कि निर्माण के दौरान मानक प्रक्रियाओं और आवश्यक सुरक्षा दिशा-निर्देशों का सही से पालन किया गया था या नहीं। इस भयंकर हादसे के बाद निर्माण कंपनी की पूरी जवाबदेही तय करने और सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग लगातार जोर पकड़ रही है।


























































