चेन्नई/दिंडीगुल: तमिलनाडु के विश्व प्रसिद्ध पलनी दंडायुधस्वामी मंदिर की 1.4 एकड़ बेशकीमती जमीन की फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा होते ही मुख्यमंत्री विजय जोसेफ के नेतृत्व वाली TVK सरकार तुरंत हरकत में आ गई है। सरकार ने कार्रवाई करते हुए दिंडीगुल जिला रजिस्ट्रार ससिकला और पलनी के सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणीगंडन को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
हाई कोर्ट ने रद्द की रजिस्ट्री, CB-CID को सौंपी गई जांच
इस मामले में कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई की गई है:
- हाई कोर्ट का आदेश: मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने रजिस्ट्रेशन विभाग द्वारा 13 जुलाई को दर्ज कराई गई FIR का संज्ञान लेते हुए इस फर्जी रजिस्ट्री को तुरंत रद्द करने का आदेश दे दिया है।
- CB-CID करेगी जांच: राज्य के DGP महेश कुमार अग्रवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पलनी मंदिर की जमीन से जुड़ी इस बड़ी अनियमितता की जांच क्राइम ब्रांच-CID (CB-CID) को सौंप दी है।
क्या है पूरा विवाद?
जिस जमीन पर यह धोखाधड़ी हुई, वह पलनी पहाड़ी की तलहटी में स्थित है और मंदिर प्रबंधन इसका इस्तेमाल श्रद्धालुओं के लिए फ्री पार्किंग के रूप में करता है। दस्तावेजों के मुताबिक, करीब 100 साल पहले यह जमीन दंडायुधस्वामी मठ के नाम की गई थी। यह मंदिर सरकार के ‘हिन्दू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग’ (HR & CE) के अंतर्गत आता है।
धोखाधड़ी का खेल: मुरुगदास नाम के एक व्यक्ति ने इस 1.4 एकड़ सरकारी/मंदिर की जमीन को अपने पूर्वजों की संपत्ति बताते हुए फर्जी तरीके से वेल्लइदुरई और सेतुपथी नाम के दो अन्य लोगों को बेच दिया।
मंदिर प्रबंधन की चेतावनियों को किया गया नजरअंदाज
मंदिर प्रबंधन को पिछले साल ही भनक लग गई थी कि मुरुगदास इस जमीन को बेचने की फिराक में है। इसके बाद:
- मंदिर प्रशासन ने पिछले एक साल में जिला रजिस्ट्रार कार्यालय को कई पत्र लिखकर आगाह किया था कि इस जमीन की रजिस्ट्री न की जाए।
- आरोपियों ने मार्च में भी रजिस्ट्री की कोशिश की थी, लेकिन तत्कालीन रजिस्ट्रार ने इसे मंदिर की जमीन बताते हुए खारिज कर दिया था।
- इसके बाद आरोपियों ने चालाकी से कोर्ट का रुख किया। उन्होंने कोर्ट से यह तथ्य छिपाया कि यह जमीन मंदिर की है और यह आदेश ले आए कि यदि दस्तावेज सही हैं तो 10 अप्रैल से पहले रजिस्ट्री की जा सकती है।
अधिकारियों के ट्रांसफर और छुट्टी का उठाया फायदा
इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए प्रशासनिक फेरबदल का पूरा फायदा उठाया गया:
- 1 जुलाई: मार्च में रजिस्ट्री खारिज करने वाले ईमानदार सब-रजिस्ट्रार का ट्रांसफर कर दिया गया।
- 3 जुलाई: नए सब-रजिस्ट्रार ने चार्ज संभाला तो आरोपियों ने फिर कोशिश की। नए अधिकारी ने जांच की बात कहकर मामला पेंडिंग में डाला और 4 जुलाई से छुट्टी पर चले गए।
- 6 जुलाई: छुट्टी पर गए अधिकारी की जगह जस्टिन मणीगंडन को अतिरिक्त ड्यूटी पर भेजा गया। मणीगंडन ने बिना समय गंवाए 6 जुलाई को ही मुरुगदास के पक्ष में जमीन की रजिस्ट्री वेल्लइदुरई और सेतुपथी के नाम कर दी।
सरकार का रुख और आरोपी की सफाई
मामला खुलने के बाद सस्पेंड हुए सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणीगंडन ने सफाई दी है कि उन्हें इस जमीन की केस हिस्ट्री (विवाद) के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। गिरफ्तारी के डर से उन्होंने अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए याचिका दायर की है।
दूसरी ओर, TVK सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए जनता को भरोसा दिलाया है कि CB-CID की जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। इस पूरी साजिश में शामिल किसी भी अधिकारी या भू-माफिया को बख्शा नहीं जाएगा।

























































