प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी केंद्रीय कैबिनेट में राज्य मंत्री के तौर पर काम कर रहे जॉर्ज कुरियन ने पद छोड़ दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की विशेष सलाह पर उनके इस इस्तीफे को तुरंत प्रभाव से मंजूर कर लिया है। कुरियन ने अगस्त 2024 से केंद्रीय राज्य मंत्री का यह महत्वपूर्ण पदभार पूरी जिम्मेदारी से संभाला हुआ था। संविधान के अनुच्छेद पचहत्तर के खंड दो के तहत उनके इस इस्तीफे को औपचारिक रूप से मंजूरी प्रदान की गई है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद केंद्र सरकार के एक अहम अल्पसंख्यक मंत्री की कुर्सी अब खाली हो गई है।
केरल के दिग्गज नेता हैं कुरियन जॉर्ज कुरियन मुख्य रूप से दक्षिणी राज्य केरल के कोट्टायम जिले के रहने वाले मूल निवासी हैं। पैंसठ साल के कुरियन भारतीय जनता पार्टी के एक बेहद ही वरिष्ठ और कद्दावर राज्य नेता हैं। वह अतीत में इस दक्षिणी राज्य की प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष पद की अहम जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। पार्टी के साथ उनका गहरा वैचारिक जुड़ाव साल 1980 से लेकर लगातार अब तक बना हुआ है। पेशे से एक वकील होने के कारण वे वैचारिक और कानूनी मामलों में बहुत ही गहरी राजनीतिक समझ रखते हैं।
ईसाई समुदाय को साधने की कोशिश जॉर्ज कुरियन को मोदी सरकार की इस मौजूदा कैबिनेट में शामिल करना एक बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना गया था। वह मौजूदा केंद्रीय कैबिनेट में एकमात्र ऐसे मंत्री थे जो सीधे तौर पर ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं। उनकी यह अहम नियुक्ति केरलम क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पैठ बढ़ाने के लिए विशेष रूप से की गई थी। इस कदम को ईसाई समुदाय तक पहुंचने की भारतीय जनता पार्टी की एक विशेष कोशिश के तौर पर देखा गया था। पार्टी इस राज्य के अल्पसंख्यक वोट बैंक को अपनी तरफ आकर्षित करने का लगातार और कड़ा प्रयास कर रही है।
प्रधानमंत्री के भाषणों का करते थे अनुवाद जॉर्ज कुरियन केरल की स्थानीय राजनीति में भाजपा के लिए एक बहुत ही खास और उपयोगी नेता रहे हैं। उन्हें अक्सर राज्य के महत्वपूर्ण दौरों के दौरान शीर्ष राष्ट्रीय नेताओं के साथ मंच पर सक्रिय रूप से देखा जाता था। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के हिंदी भाषणों का सटीक मलयालम भाषा में अनुवाद करते थे। स्थानीय जनता तक इन राष्ट्रीय नेताओं का कड़ा संदेश पहुंचाने में उनकी बहुत ही बड़ी और अहम भूमिका होती थी। टीवी डिबेट्स में भी वह अपनी पार्टी की विचारधारा का प्रमुखता से बचाव करते हुए हमेशा नजर आते थे।
तरुण चुग ने ली कुरियन की जगह इक्कीस जून को जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा का आधिकारिक कार्यकाल पूरी तरह से समाप्त हो गया था। भाजपा ने उन्हें अठारह जून को संपन्न हुए राज्यसभा चुनावों में अपना उम्मीदवार बिल्कुल भी नहीं बनाया था। पार्टी ने उनके स्थान पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को आगे करने का कड़ा फैसला किया। तरुण चुग को मध्य प्रदेश से राज्यसभा का टिकट देकर सीधे उच्च सदन का सदस्य बना दिया गया है। इसके अलावा रवनीत सिंह बिट्टू को भी पार्टी ने दोबारा राज्यसभा भेजने का कोई फैसला नहीं लिया।
विधानसभा चुनाव को लेकर हुई थी एंट्री जॉर्ज कुरियन को विशेष रूप से केरल विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर ही सीधे राज्यसभा में लाया गया था। पार्टी को पूरी उम्मीद थी कि उनके माध्यम से राज्य में एक बहुत मजबूत सियासी समीकरण स्थापित किया जा सकेगा। मोदी सरकार में उन्होंने अल्पसंख्यक मामलों के अलावा मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय का भी बड़ा जिम्मा संभाला। उनका मंत्री पद से अचानक हटना राज्य की राजनीति में पार्टी की किसी नई रणनीति का साफ संकेत देता है। अब उन्हें संगठन में कोई नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की पूरी तरह से संभावना जताई जा रही है।





































