कानपुर: उत्तर प्रदेश पुलिस ने साइबर अपराध पर एक बड़ा प्रहार करते हुए कानपुर में एक शातिर साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के निर्देश पर डीसीपी श्रवण कुमार और एडीसीपी अंजलि विश्वकर्मा की अगुवाई में यह बड़ी कार्रवाई की गई। पुलिस ने आसमान से ड्रोन के जरिए पूरे इलाके की घेराबंदी कर 13 शातिर ठगों को धर दबोचा है। शुरुआती जांच में अब तक 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी का खुलासा हो चुका है।
क्या था ठगी का खौफनाक तरीका?
यह गिरोह लोगों को ब्लैकमेल करने के लिए एक बेहद सुनियोजित और डरावने तरीके का इस्तेमाल करता था:
- फर्जी पुलिस अधिकारी: आरोपी लोगों को कॉल करके खुद को पुलिस, साइबर सेल या किसी बड़ी जांच एजेंसी का अधिकारी बताते थे।
- अश्लील वीडियो का डर: पीड़ितों को अश्लील वीडियो या ऑनलाइन आपत्तिजनक गतिविधियों में फंसाने की झूठी धमकी दी जाती थी।
- दबाव और वसूली: कानूनी कार्रवाई, बदनामी और गिरफ्तारी का खौफ पैदा करके बैंक खातों और UPI के जरिए तुरंत मोटी रकम ट्रांसफर करवा ली जाती थी।
छापेमारी में पुलिस को क्या-क्या मिला?
गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने ठगी के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करने वाले कई अहम साक्ष्य बरामद किए हैं:
- 29 मोबाइल फोन और 3 कारें जब्त की गई हैं।
- जांच में 48 IMEI नंबर और 68 मोबाइल नंबर सक्रिय पाए गए हैं, जिनसे देशभर में अपराध को अंजाम दिया जा रहा था।
- मोबाइलों से व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन के डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है।
देशभर में फैला था ठगी का जाल
इस गिरोह का दायरा सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। पुलिस की अब तक की जांच में कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:
- राष्ट्रीय स्तर पर शिकायतें: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 189 शिकायतों के तार सीधे तौर पर इस गिरोह से जुड़े मिले हैं।
- 60 पीड़ितों का सीधा लिंक: इनमें से 60 शिकायतकर्ताओं के नंबर आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे नंबरों से मैच हुए हैं।
- इन राज्यों के लोग बने शिकार: दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, केरल और तमिलनाडु समेत कई राज्यों के लोग इन साइबर ठगों का शिकार हुए हैं।
आगे की कार्रवाई: कानपुर पुलिस का कहना है कि जब्त किए गए डिजिटल सबूतों की मदद से गिरोह के अन्य स्लीपर सेल्स, बैंक खातों और सहयोगियों की पहचान की जा रही है। जांच आगे बढ़ने पर ठगी का यह आंकड़ा और बड़ा हो सकता है तथा मामले में जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां भी संभव हैं।


























































