देश भर में पेपर लीक के गंभीर मुद्दे को लेकर छात्रों का गुस्सा और विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है। इसी कड़ी में नई दिल्ली के जंतर मंतर सहित देश के कई अन्य बड़े शहरों में भी भारी प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और जेन जी के बीच इस पूरे मामले को लेकर भारी नाराजगी और आक्रोश है। युवा पीढ़ी का यह गुस्सा सड़कों पर उतर आया है और वे सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इन देशव्यापी प्रदर्शनों ने कानून व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात: राजधानी दिल्ली के सबसे प्रमुख प्रदर्शन स्थल जंतर मंतर पर छात्रों की भारी भीड़ लगातार एकजुट हो रही है। छात्रों के इस उग्र होते प्रदर्शन और किसी भी संभावित अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। कानून और व्यवस्था को सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने वहां सुरक्षा के बहुत कड़े इंतजाम किए हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने जंतर मंतर पर कुल अट्ठारह डीसीपी तैनात करने का बड़ा फैसला किया है। इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती यह दर्शाती है कि पुलिस इस विरोध प्रदर्शन को लेकर कितनी ज्यादा सतर्क है।
संघ प्रमुख का युवाओं के नाम संदेश: छात्रों के इन भारी प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने एक बहुत ही बड़ा संदेश दिया है। विश्व मांगल्य सभा के एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने युवाओं की वर्तमान स्थिति पर अपनी गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज का पूरा माहौल भौतिक साधनों और तरह-तरह के भ्रामक प्रचार से काफी ज्यादा प्रभावित हो चुका है। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में युवाओं को भ्रम और गलत सूचनाओं के जाल से बाहर निकालने की बहुत सख्त जरूरत है। उन्होंने समाज से अपील की है कि वे इस मुश्किल समय में युवाओं को सही दिशा दिखाने का महत्वपूर्ण काम करें।
आदेश से नहीं संवाद से बनेगी बात: भागवत ने स्पष्ट किया कि आज की युवा पीढ़ी का स्वभाव और सोचने का तरीका पहले के मुकाबले काफी बदल गया है। पहले के समय में परिवारों के अंदर माता-पिता की बात बिना किसी सवाल या बहस के आसानी से मान ली जाती थी। लेकिन आज की पीढ़ी हर बात पर सवाल पूछती है और उन्हें संतुष्ट करने के लिए हर बात का तर्क बताना पड़ता है। इसलिए मौजूदा समय में युवाओं की किसी भी समस्या का समाधान उन्हें केवल आदेश देकर बिल्कुल भी नहीं निकाला जा सकता है। परिवारों और समाज को अब युवाओं को डिक्टेशन देने के बजाय उनके साथ एक खुला और सकारात्मक डिस्कशन करना होगा।
परिवारों में बातचीत बढ़ाना जरूरी: संघ प्रमुख ने कहा कि युवाओं को भटकने से बचाने के लिए उन्हें बहुत ज्यादा अपनापन और सही मार्गदर्शन देने की जरूरत है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि आज के आधुनिक परिवारों में आपसी बातचीत पहले की तुलना में काफी ज्यादा कम हो गई है। बच्चों और युवाओं के साथ घर में होने वाला नियमित संवाद ही उन्हें समाज में एक सही और स्पष्ट दिशा दे सकता है। केवल सख्त आदेश देने से बात नहीं बनेगी बल्कि परिवार को युवाओं के साथ क्वालिटी समय बिताना होगा। परिवार के सदस्यों को उनके मन की बात सुननी होगी और उन्हें आदेश की जगह पूरी जागरूकता प्रदान करनी होगी।
सही उदाहरणों से मिलेगा सही मार्ग: समाज में यह जो गलत धारणा बन गई है कि आज की नई पीढ़ी पूरी तरह भटक गई है उसे भागवत ने नकार दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नई पीढ़ी को आज के समाज में अपने लिए सही और सच्चे आदर्श बिल्कुल नहीं मिल पा रहे हैं। अगर समाज के वरिष्ठ लोग अपने स्वयं के जीवन से अच्छे और प्रमाणिक उदाहरण पेश करेंगे तो उसका गहरा असर जरूर पड़ेगा। जहां भी युवाओं को अच्छे और सच्चे उदाहरण मिलते हैं वहां वे समाज की भलाई के लिए अपना पूरा जीवन तक समर्पित कर देते हैं। इसलिए समाज में सकारात्मक सोच और सार्थक जीवन का एक बेहतरीन उदाहरण नई पीढ़ी के सामने रखा जाना चाहिए।


























































