वॉशिंगटन से आई एक बड़ी खबर के अनुसार अमेरिकी सीनेट ने 7 अगस्त को एक विशेष बिल पारित किया। इस बिल के माध्यम से अमेरिकी राष्ट्रपति को बहुत बड़े अधिकार सौंप दिए गए हैं। अब राष्ट्रपति रूस से कच्चा तेल और नेचुरल गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगा सकते हैं। यह टैरिफ 100 प्रतिशत तक लगाया जा सकता है, जिससे व्यापार पर बड़ा असर पड़ेगा। इस दायरे में भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार देश मुख्य रूप से शामिल किए गए हैं।
व्यापार रोकने की अमेरिकी मंशा: अमेरिकी सीनेट का मानना है कि रूस से तेल और गैस खरीदना यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा देना है। बिल में कहा गया है कि इस तरह का व्यापार रूस की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखता है। इससे रूस को यूक्रेन में अपने सैन्य अभियानों के लिए फंड जुटाने में सीधी मदद मिलती है। इसी वित्तीय मदद को रोकने के लिए अमेरिका ने यह सख्त कदम उठाने का फैसला लिया है। राष्ट्रपति के काउंसलर पीटर नवारो ने भी इस वैश्विक स्थिति पर मीडिया से चर्चा की।
भारी बहुमत से पास हुआ प्रस्ताव: सीनेट में यह महत्वपूर्ण बिल 86-11 के बड़े बहुमत से सफलता पूर्वक पारित हुआ। यह कानून उन सभी देशों को सीधे तौर पर दंडित करने का प्रावधान करता है जो व्यापार जारी रखे हैं। इसका मूल उद्देश्य रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तेल, गैस और अन्य सामानों से मिलने वाले राजस्व से वंचित करना है। यह कदम दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के एक साल लंबे चले अभियान का परिणाम है। वे यूक्रेन के समर्थन में लगातार आवाज उठा रहे थे।
पीटर नवारो की सीधी टिप्पणी: एएनआई के सवाल का जवाब देते हुए पीटर नवारो ने लिंडसे ग्राहम बिल पर अपनी राय रखी। उन्होंने बताया कि रूस से तेल खरीदने वाले पांच देशों पर 100% टैरिफ की तैयारी है। भारत भी उन पांच देशों में शामिल है, जिससे दोनों देशों के संबंधों पर चर्चा शुरू हो गई है। नवारो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बहुत अच्छे कामकाजी संबंध हैं। दोनों नेता इस व्यापारिक मुद्दे को आपस में बातचीत करके आसानी से सुलझा लेंगे।
फाइनेंशियल टाइम्स के लेख का जिक्र: नवारो ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए अपने पुराने लेख की याद दिलाई। उन्होंने छह महीने पहले फाइनेंशियल टाइम्स में भारत के तेल व्यापार पर एक लेख लिखा था। उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस के साथ इस व्यापार में शामिल नहीं था। बाद में भारत बहुत ज्यादा शामिल हुआ और रूसी रिफाइंड प्रोडक्ट बेचने लगा। नवारो ने दावा किया कि उनके इस लेख के बाद इंटरनेट पर भारतीय लोगों ने उनकी काफी आलोचना की थी।
दोनों देशों के बीच सुलझेंगे मुद्दे: नवारो ने कहा कि अमेरिका में समस्याओं का समाधान इंटरनेट पर आलोचना करने से नहीं होता है। हालांकि उन्होंने माना कि वह पुराना मामला अब पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। नवारो ने स्पष्ट किया कि ट्रंप और मोदी के बीच बातचीत से ही रास्ता निकलेगा। दो देशों के शीर्ष प्रमुखों के बीच दखल देने की उनकी कोई मंशा या भूमिका नहीं है। दोनों वैश्विक नेता आपसी समझ से इस 100 प्रतिशत टैरिफ के मुद्दे का सही समाधान निकाल लेंगे।


























































