अमेरिकी विदेश विभाग ने राजकोषीय पारदर्शिता रिपोर्ट-2026 जारी करते हुए पाकिस्तान के आर्थिक मामलों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अमेरिका ने पाकिस्तान सरकार से साफ शब्दों में पूछा है कि वह अपनी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई पर कितना पैसा खर्च कर रही है। अमेरिका ने मांग की है कि पाकिस्तान अपने सीक्रेट बजट का पूरा हिसाब-किताब दुनिया के सामने पेश करे। इस रिपोर्ट में पाकिस्तान के वित्तीय कामकाज को लेकर टिप्पणी की गई है। अमेरिका ने कहा है कि पाकिस्तान को अपने देश के वित्तीय मामलों में और ज्यादा ट्रांसपेरेंसी लाने की तत्काल आवश्यकता है।
नागरिक निगरानी की सिफारिश: रिपोर्ट में विशेष रूप से सिफारिश की गई है कि सैन्य और खुफिया एजेंसियों के बजट को संसदीय या नागरिक निगरानी में लाया जाए। इसके अलावा सरकारी कर्ज से जुड़ी हर प्रकार की महत्वपूर्ण जानकारी जनता के बीच सार्वजनिक करने पर जोर दिया गया है। अमेरिका ने पाकिस्तान को सलाह दी कि वह केवल समय पर अपना बजट प्रस्ताव पेश करने तक सीमित न रहे। बल्कि उसमें पूर्ण पारदर्शिता भी शामिल करे ताकि हर एक खर्च का सही हिसाब मिल सके। सरकार को यह खुलकर बताना चाहिए कि वह अपनी सेना और खुफिया नेटवर्क पर कुल कितना धन खर्च करती है।
आर्थिक सहायता और जांच प्रक्रिया: अमेरिका उन सभी देशों की हर साल गहन जांच करता है जिन्हें वह किसी प्रकार की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा सही जगह लग रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार साल 2025 में अमेरिका ने पाकिस्तान को लगभग 67 से 78 मिलियन डॉलर की मदद दी थी। इसके बाद जुलाई 2026 में पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर की मुद्रा स्थिरता सुविधा की मांग रखी थी। हालांकि अमेरिका ने पाकिस्तान की इस बड़ी मांग को अभी तक अपनी आधिकारिक मंजूरी प्रदान नहीं की है।
पाकिस्तान का विशाल रक्षा बजट: पाकिस्तान की शहबाज सरकार ने जून 2026 में अपना नया वार्षिक बजट संसद में पेश किया था। इस बजट के अनुसार पाकिस्तान ने अपने रक्षा क्षेत्र के लिए लगभग 3 ट्रिलियन रुपये का प्रावधान रखा है। यह राशि लगभग 3,000 अरब रुपये या लगभग Rs 3.01 ट्रिलियन के बराबर मानी जा रही है। पाकिस्तान का यह नया सैन्य बजट पिछले साल 2025-26 के मूल बजट से करीब 17.6 से 17.7 प्रतिशत ज्यादा है। इतनी बड़ी रकम सीधे सेना और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के नाम पर आवंटित कर दी गई है।
कुल बजट में सेना का हिस्सा: पाकिस्तान का कुल राष्ट्रीय बजट ही लगभग 18.77 ट्रिलियन से 18.8 ट्रिलियन रुपये के आसपास सीमित है। इस सीमित बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा, यानी करीब 16 फीसदी भाग, केवल रक्षा बजट पर खर्च किया जाता है। इतने विशाल रक्षा आवंटन के बावजूद इसके बड़े हिस्से को सीक्रेट बजट के रूप में छिपाकर रखा जाता है। इसी अप्रत्यक्ष खर्च व्यवस्था और गुप्त नीतियों के कारण अमेरिका ने पाकिस्तान के वित्तीय प्रबंधन पर कड़े सवाल उठाए हैं। अमेरिका चाहता है कि हर एक रुपये का पारदर्शी हिसाब देश के नागरिकों के सामने हो।
भावी आर्थिक संबंधों पर असर: अमेरिका द्वारा हिसाब मांगे जाने के बाद अब पाकिस्तान की आर्थिक नीतियों और विदेशी कर्ज प्रणाली पर संकट गहरा गया है। यदि पाकिस्तान अपनी सैन्य और आईएसआई फंडिंग को संसदीय निगरानी के दायरे में नहीं लाता, तो उसे अमेरिकी मदद मिलने में बड़ी कठिनाई आ सकती है। 10 अरब डॉलर की मुद्रा स्थिरता सुविधा का रुकना इसी सख्त रुख का एक हिस्सा माना जा रहा है। पाकिस्तान को अब यह साबित करना होगा कि उसकी अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता कायम है। अन्यथा उसे वैश्विक वित्तीय मंचों पर और भी अधिक पाबंदियों व जांच का सामना करना पड़ेगा।


























































