नेपाल में बाढ़ के कारण आई भीषण तबाही से वहां के निवासी अब तक पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं। बीते 26 अगस्त को तिब्बत सीमा के पास रसुवा और पड़ोसी जिलों में विनाशकारी बाढ़ आई थी। इस प्राकृतिक आपदा के कारण बड़े पैमाने पर जनधन और संपत्ति का भारी नुकसान दर्ज किया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस आपदा में अब तक 1355 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। इसके अलावा आपदा के बाद से लगभग 5000 लोग अभी भी रहस्यमय तरीके से लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल सरकार ने घोषित किया राष्ट्रीय शोक बाढ़ से हुए भारी नुकसान को देखते हुए नेपाल सरकार ने सोमवार को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया। सोमवार 7 सितंबर को शोक व्यक्त करने के लिए पूरे देश में सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान किया गया है। आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की याद में कई स्थानों पर सामूहिक श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित हुईं। रक्सौल सीमा से लगे बीरगंज महानगरपालिका के घंटाघर चौक पर स्थानीय नागरिक एकत्र होकर पहुंचे। वहां पर लोगों ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए दीप जलाकर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
सरकारी भवनों पर आधा झुका रहेगा तिरंगा आपदा को 13 दिन पूरे होने पर हिंदू परंपराओं के तहत 13वें दिन का शोक मनाया जा रहा है। नेपाल गृह मंत्रालय के अनुसार शोक दिवस के दिन विशेष प्रशासनिक औपचारिकताएं निभाई जाएंगी। सोमवार को नेपाल के सभी सरकारी कार्यालयों पर देश का राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। साथ ही विदेशों में स्थित सभी नेपाली दूतावासों और राजनयिक मिशनों पर भी ध्वज आधा झुकेगा। पूरा देश इस समय प्राकृतिक आपदा से पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कर रहा है।
राहत एजेंसियों और सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन आपदा के कारण मकानों, पुलों, सड़कों और हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स को गंभीर नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबलों द्वारा खोज और बचाव अभियान लगातार जारी रखा गया है। जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास तेज हैं। भारतीय सेना, एनडीआरएफ और बीआरओ की टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में दिन-रात काम कर रही हैं। ये सभी दल क्षतिग्रस्त रास्तों की जगह नए और सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग बनाने में जुटे हुए हैं।
32 हजार परिवार हुए आपदा से विस्थापित तबाही के आंकड़ों से पता चलता है कि नेपाल में कम से कम 7500 मकान पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं। इस विनाशकारी बाढ़ के कारण 32,000 से अधिक परिवार अपने घरों से पूरी तरह विस्थापित हो गए हैं। लोगों के रहने के ठिकाने और आजीविका के साधन इस बाढ़ की चपेट में आकर पूरी तरह बह गए हैं। प्राकृतिक आपदा ने वहां के जरूरी बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक व्यवस्था को बहुत चोट पहुंचाई है। लापता लोगों के परिजनों की तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें मलबे में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
लापता लोगों की खोज में जुटे सुरक्षाबल नेपाल के विभिन्न सुरक्षाबल और स्थानीय प्रशासन दिन-रात राहत एवं बचाव कार्यों में लगे हुए हैं। तमाम चुनौतियों के बाद भी आपदा प्रबंधन दल सुरंगों और मलबे से लोगों को निकाल रहे हैं। बेघर हुए हजारों परिवारों के लिए राहत शिविरों और भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य लापता लोगों का जल्द से जल्द पता लगाना और मदद पहुंचाना है। 1355 मौतों के इस विशाल आंकड़े ने पूरे नेपाल देश को गहरे दुख और शोक में डुबो दिया है।













































