गायों में तेजी से फैल रही लंपी बीमारी के लक्षण: इन दिनों पशुओं में लंपी त्वचा रोग को लेकर चिंता बनी हुई है। यह एक संक्रामक विषाणुजनित बीमारी है, जो गाय और भैंस दोनों को प्रभावित कर सकती है, हालांकि इसके मामले मुख्य रूप से गायों में देखने को मिलते हैं। यह रोग पॉक्सविरिडी परिवार के निथलिंग विषाणु से फैलता है और संक्रमित पशु के शरीर पर इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं। बीमारी से पीड़ित गाय को तेज बुखार आ सकता है, जबकि उसकी त्वचा पर बड़ी-बड़ी गांठें और फोड़े बनने लगते हैं। इसका असर पशु की सेहत के साथ दूध उत्पादन पर भी पड़ता है और गाय पहले की तुलना में कम दूध देने लगती है। ऐसे में पशुपालकों और आम लोगों के मन में सवाल उठता है कि लंपी से संक्रमित गाय का दूध इस्तेमाल करना सुरक्षित है या नहीं। खासतौर पर उन परिवारों को चिंता रहती है, जो नियमित रूप से गाय का दूध पीते हैं और संक्रमण के इंसानों तक पहुंचने की आशंका से परेशान हैं।
क्या संक्रमित गाय का दूध पीने से इंसानों को लंपी हो सकती है: पशु चिकित्सा अधिकारी के.एम. वार्ष्णेय के अनुसार, लंपी बीमारी को जूनोटिक रोग नहीं माना जाता, यानी यह बीमारी पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारी नहीं है। उनके बताए विवरण के मुताबिक, लंपी विषाणु से संक्रमित गाय का दूध पीने से मनुष्यों में लंपी बीमारी फैलने की आशंका नहीं मानी जाती। इस रोग का मुख्य प्रभाव पशु की त्वचा पर दिखाई देता है और संक्रमित गाय के शरीर पर गांठें, फोड़े तथा बुखार जैसे लक्षण उभरते हैं। बीमारी के दौरान दूध उत्पादन में कमी भी आ सकती है। हालांकि, दूध को सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है। केवल इस आधार पर कि बीमारी इंसानों में नहीं फैलती, दूध को बिना सावधानी के पीना उचित नहीं है। दूध की स्वच्छता, उसे सही तरीके से गर्म करना और पशु की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है, ताकि दूध के सेवन से जुड़ी दूसरी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से बचा जा सके।
दूध पीने से पहले अच्छी तरह उबालने की सलाह: लंपी से प्रभावित गाय के दूध को इस्तेमाल करने को लेकर पशु चिकित्सा अधिकारी ने इसे सामान्य दूध की तरह उबालकर पीने की सलाह दी है। दिए गए विवरण के अनुसार, दूध को पीने से पहले कम से कम 15 से 20 मिनट तक अच्छी तरह उबालना चाहिए। उच्च तापमान पर दूध गर्म करने से उसमें मौजूद कई प्रकार के रोगाणुओं को नष्ट करने में मदद मिलती है। इसलिए संक्रमित पशु का दूध इस्तेमाल करने वाले लोगों को कच्चा दूध पीने के बजाय उसे अच्छी तरह उबालने पर ध्यान देना चाहिए। दूध को केवल हल्का गर्म करके छोड़ देने के बजाय उसे पर्याप्त समय तक उबालना जरूरी बताया गया है। इसके बाद ही उसे पीने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। यह सावधानी दूध के सेवन से जुड़े जोखिम को कम करने के उद्देश्य से बताई गई है। पशुपालकों को भी दूध निकालने और उसे घर तक पहुंचाने के दौरान स्वच्छता बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।
कच्चा दूध पीने से बचें और स्वच्छता का रखें ध्यान: लंपी से संक्रमित गाय का दूध इस्तेमाल करने वालों के लिए सबसे अहम सावधानी यह है कि दूध को बिना उबाले न पिएं। कच्चे दूध में अलग-अलग प्रकार के हानिकारक सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं, इसलिए उसे सीधे पीने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने का जोखिम रहता है। बीमारी से पीड़ित पशु का दूध निकालते समय भी सफाई का ध्यान रखना चाहिए और दूध को इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह उबालना चाहिए। परिवार में बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों को दूध देने से पहले उसकी स्वच्छता तथा सही तरीके से उबाले जाने को लेकर विशेष सतर्कता रखनी चाहिए। लंपी रोग के इंसानों में फैलने की आशंका और दूध के सामान्य स्वास्थ्य जोखिम अलग-अलग बातें हैं। इसलिए बीमारी के बारे में जानकारी होने के बावजूद दूध की सफाई और उसे सही तरीके से तैयार करने की प्रक्रिया को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
संक्रमित गाय के बछड़े को दूध पिलाते समय भी बरतें सावधानी: लंपी से पीड़ित गाय के दूध का इस्तेमाल केवल मनुष्यों के लिए ही नहीं, बल्कि उसके बछड़े को दूध पिलाने के मामले में भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पशु चिकित्सा अधिकारी के बताए विवरण के अनुसार, संक्रमित गाय का दूध सीधे उसके बच्चे को पिलाने से बचना चाहिए। यदि किसी परिस्थिति में दूध पिलाना बहुत जरूरी हो, तो उसे उबालकर देने की बात कही गई है। इस दौरान दूध को सही तरीके से गर्म करना और उसे साफ बर्तन में रखना महत्वपूर्ण है। पशुपालकों को गाय और बछड़े की सेहत पर भी नजर रखनी चाहिए तथा बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर पशु चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। गाय को तेज बुखार हो, त्वचा पर गांठें या फोड़े दिखाई दें अथवा दूध उत्पादन अचानक कम हो जाए, तो इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर पशु चिकित्सा सलाह लेने से बीमारी के प्रबंधन और पशु की देखभाल में मदद मिल सकती है।
लंपी से प्रभावित गाय के दूध के इस्तेमाल में इन बातों को प्राथमिकता दें: लंपी बीमारी के दौरान पशुपालकों और दूध का सेवन करने वाले परिवारों को बीमारी के लक्षणों के साथ दूध की स्वच्छता पर भी ध्यान देना चाहिए। पशु चिकित्सा अधिकारी के.एम. वार्ष्णेय के अनुसार, लंपी रोग इंसानों में फैलने वाला संक्रमण नहीं है और संक्रमित गाय के दूध से मनुष्यों को यह बीमारी होने की आशंका नहीं मानी जाती। इसके बावजूद कच्चा दूध पीने से बचना चाहिए और दूध को इस्तेमाल करने से पहले कम से कम 15 से 20 मिनट तक अच्छी तरह उबालने की सलाह दी गई है। संक्रमित गाय के बछड़े को सीधे दूध पिलाने से भी बचना चाहिए और जरूरत पड़ने पर उबालकर दूध देने की बात कही गई है। पशुपालकों को गाय की सेहत, दूध उत्पादन में बदलाव और त्वचा पर दिखाई देने वाले लक्षणों पर नजर रखनी चाहिए। बीमारी के दौरान उचित देखभाल, स्वच्छता और पशु चिकित्सक की सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है।
















































