1 नवंबर 2026 को रविवार के दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि रहेगी। सप्तमी तिथि दोपहर 2:52 बजे तक रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। रात्रिकाल में अष्टमी तिथि होने के कारण आज अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन पुष्य नक्षत्र का विशेष संयोग रहेगा, जो अगले दिन सुबह 4:31 बजे तक विद्यमान रहेगा। साध्य योग दोपहर 2:40 बजे तक रहेगा और इसके बाद शुभ योग प्रारंभ होगा। आज रवि पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का भी विशेष संयोग बन रहा है। माताएं संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से अहोई अष्टमी का व्रत रखेंगी।
मुख्य पंचांग विवरण
वार: रविवार
विक्रम संवत: 2083, सिद्धार्थि संवत्सर
शक संवत: 1948, पराभव संवत्सर
अयन: दक्षिणायन
ऋतु: हेमंत
मास: कार्तिक मास
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: सप्तमी दोपहर 2:52 बजे तक, इसके बाद अष्टमी
नक्षत्र: पुष्य अगले दिन सुबह 4:31 बजे तक, इसके बाद आश्लेषा
योग: साध्य दोपहर 2:40 बजे तक, इसके बाद शुभ योग
करण: बव दोपहर 2:52 बजे तक, इसके बाद बालव
सूर्य राशि: तुला
चंद्र राशि: कर्क
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:50 बजे से सुबह 5:42 बजे तक
प्रातः संध्या: सुबह 5:16 बजे से सुबह 6:33 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:00 बजे से दोपहर 2:44 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:43 बजे से शाम 6:09 बजे तक
सायाह्न संध्या: शाम 5:43 बजे से शाम 7:00 बजे तक
अमृत काल: रात 10:25 बजे से रात 11:56 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 6:33 बजे से अगले दिन सुबह 4:31 बजे तक
रवि पुष्य योग: सुबह 6:33 बजे से अगले दिन सुबह 4:31 बजे तक
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल (दिल्ली मानक): शाम 4:13 बजे से शाम 5:36 बजे तक
यमगण्ड काल: दोपहर 12:04 बजे से दोपहर 1:27 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 2:50 बजे से शाम 4:13 बजे तक
दिशाशूल: पश्चिम दिशा
सूर्य और चंद्र उदय-अस्त समय
सूर्योदय: सुबह 6:33 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:36 बजे
चन्द्रोदय: रात 8:40 बजे
चन्द्रास्त: अगले दिन दोपहर 8:42 बजे
दिन की चौघड़िया
उद्वेग (अशुभ): सुबह 6:33 बजे से सुबह 7:56 बजे तक
चर (सामान्य): सुबह 7:56 बजे से सुबह 9:19 बजे तक
लाभ (शुभ): सुबह 9:19 बजे से सुबह 10:42 बजे तक
अमृत (सर्वोत्तम): सुबह 10:42 बजे से दोपहर 12:04 बजे तक
काल (अशुभ): दोपहर 12:04 बजे से दोपहर 1:27 बजे तक
शुभ (शुभ): दोपहर 1:27 बजे से दोपहर 2:50 बजे तक
रोग (अशुभ): दोपहर 2:50 बजे से शाम 4:13 बजे तक
उद्वेग (अशुभ): शाम 4:13 बजे से शाम 5:36 बजे तक
रात्रि की चौघड़िया
शुभ (शुभ): शाम 5:36 बजे से रात 7:13 बजे तक
अमृत (सर्वोत्तम): रात 7:13 बजे से रात 8:50 बजे तक
चर (सामान्य): रात 8:50 बजे से रात 10:28 बजे तक
रोग (अशुभ): रात 10:28 बजे से मध्यरात्रि 12:05 बजे तक
काल (अशुभ): मध्यरात्रि 12:05 बजे से रात 1:42 बजे तक
लाभ (शुभ): रात 1:42 बजे से रात 3:19 बजे तक
उद्वेग (अशुभ): रात 3:19 बजे से सुबह 4:56 बजे तक
नोट: इसके बाद चौघड़िया का क्रम सूर्योदय तक जारी रहेगा।
राज्यवार राहुकाल
| क्रमांक | राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | राजधानी | राहुकाल समय |
|---|---|---|---|
| 1 | उत्तर प्रदेश | लखनऊ | शाम 3:59 से शाम 5:22 बजे तक |
| 2 | दिल्ली (NCT) | नई दिल्ली | शाम 4:13 से शाम 5:36 बजे तक |
| 3 | जम्मू और कश्मीर | श्रीनगर | शाम 4:12 से शाम 5:33 बजे तक |
| 4 | बिहार | पटना | दोपहर 3:45 से शाम 5:08 बजे तक |
| 5 | मध्य प्रदेश | भोपाल | शाम 4:16 से शाम 5:40 बजे तक |
| 6 | राजस्थान | जयपुर | शाम 4:22 से शाम 5:45 बजे तक |
| 7 | उत्तराखंड | देहरादून | शाम 4:09 से शाम 5:31 बजे तक |
| 8 | झारखंड | रांची | दोपहर 3:47 से शाम 5:10 बजे तक |
| 9 | छत्तीसगढ़ | रायपुर | दोपहर 3:59 से शाम 5:23 बजे तक |
| 10 | पंजाब | चंडीगढ़ | शाम 4:15 से शाम 5:36 बजे तक |
| 11 | हरियाणा | चंडीगढ़ | शाम 4:15 से शाम 5:36 बजे तक |
| 12 | हिमाचल प्रदेश | शिमला | शाम 4:12 से शाम 5:33 बजे तक |
| 13 | गुजरात | गांधीनगर | शाम 4:41 से शाम 6:05 बजे तक |
| 14 | महाराष्ट्र | मुंबई | शाम 4:43 से शाम 6:09 बजे तक |
| 15 | गोवा | पणजी | शाम 4:42 से शाम 6:08 बजे तक |
| 16 | कर्नाटक | बेंगलुरु | शाम 4:25 से शाम 5:52 बजे तक |
| 17 | केरल | तिरुवनंतपुरम | शाम 4:28 से शाम 5:57 बजे तक |
| 18 | तमिलनाडु | चेन्नई | शाम 4:15 से शाम 5:42 बजे तक |
| 19 | आंध्र प्रदेश | अमरावती | शाम 4:16 से शाम 5:41 बजे तक |
| 20 | तेलंगाना | हैदराबाद | शाम 4:19 से शाम 5:44 बजे तक |
| 21 | ओडिशा | भुवनेश्वर | दोपहर 3:47 से शाम 5:11 बजे तक |
| 22 | पश्चिम बंगाल | कोलकाता | दोपहर 3:33 से शाम 4:56 बजे तक |
| 23 | असम | दिसपुर | दोपहर 3:13 से शाम 4:36 बजे तक |
| 24 | अरुणाचल प्रदेश | इटानगर | दोपहर 3:07 से शाम 4:30 बजे तक |
| 25 | नागालैंड | कोहिमा | दोपहर 3:07 से शाम 4:30 बजे तक |
| 26 | मणिपुर | इंफाल | दोपहर 3:09 से शाम 4:32 बजे तक |
| 27 | मिजोरम | आइजोल | दोपहर 3:13 से शाम 4:36 बजे तक |
| 28 | त्रिपुरा | अगरतला | दोपहर 3:19 से शाम 4:42 बजे तक |
| 29 | मेघालय | शिलांग | दोपहर 3:14 से शाम 4:37 बजे तक |
| 30 | सिक्किम | गंगटोक | दोपहर 3:26 से शाम 4:49 बजे तक |
अहोई अष्टमी व्रत का महत्व
1 नवंबर को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से उपवास करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत सूर्योदय से पहले शुरू होता है और रात्रि में तारों के दर्शन करने के बाद उन्हें अर्घ्य देकर पूरा किया जाता है। इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है। मान्यता है कि अहोई माता की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से संतान की रक्षा होती है तथा घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। वर्ष 2026 में अष्टमी तिथि रात्रिकाल में 1 नवंबर को होने के कारण इसी दिन अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा।
















































