उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा मुकाम रखने वाले आजमगढ़ के दिग्गज नेता आलमबदी आजमी का बुधवार को दुखद निधन हो गया। बाइस जुलाई को उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे समाजवादी पार्टी परिवार में एक भारी और गहरी शोक की लहर दौड़ गई है। नब्बे साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले यह नेता पिछले कई महीनों से बहुत ही गंभीर बीमारियों से लगातार जूझ रहे थे। उनके सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से जनता को उनके इस दुखद देहांत की आधिकारिक जानकारी बहुत ही भारी मन से दी गई है। उनकी इस खबर को सुनने के बाद क्षेत्र के लोग अपने इस प्रिय और ईमानदार नेता के अंतिम दर्शन के लिए लगातार इकट्ठा हो रहे हैं।
विधायक पिंकी यादव का शोक: समाजवादी पार्टी की संभल जिले की असमोली सीट से वर्तमान विधायक पिंकी यादव ने इस निधन पर अपना गहरा दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखते हुए कहा कि पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक का जाना अत्यंत दुःखद समाचार है। उन्होंने बताया कि आलमबदी आजमी साहब ने आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा का लगातार पांच बार बहुत ही शानदार प्रतिनिधित्व किया था। नब्बे वर्ष की आयु में उनके इस इंतकाल को पूरी पार्टी और प्रदेश की राजनीति के लिए एक बहुत बड़ा और भारी नुकसान बताया गया है। पिंकी यादव ने अपनी पोस्ट के जरिए उन्हें एक सच्चा समाजवादी नेता बताते हुए अपनी गहरी और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
समाजवादी विचारधारा को समर्पण: विधायक पिंकी यादव ने अपनी शोक संवेदना में स्पष्ट रूप से लिखा है कि उनका पूरा जीवन समाजवादी विचारधारा के प्रति पूरी तरह समर्पित रहा। उन्होंने अपना हर एक पल क्षेत्र की गरीब जनता की सच्ची जनसेवा करने और उनके हकों की लड़ाई लड़ने में निस्वार्थ भाव से बिता दिया। समाज में सभी वर्गों के बीच आपसी सामाजिक सौहार्द के मूल्यों को बनाए रखना उनके राजनीतिक जीवन का एक बहुत ही बड़ा लक्ष्य था। वे हमेशा लोगों के बीच बिना किसी भेदभाव के काम करते थे और यही कारण था कि जनता उन्हें बार-बार अपना विधायक चुनती थी। उनका यह निस्वार्थ सेवा भाव ही उन्हें राजनीति की भीड़ में अन्य सभी नेताओं से बिल्कुल अलग और एक खास पहचान दिलाता था।
संघर्ष और सादगी की मिसाल: आलमबदी आजमी के व्यक्तित्व के बारे में बात करते हुए यह हमेशा कहा जाता है कि वे जीवन भर अपनी सादगी के लिए बहुत जाने जाते थे। अपने इतने लंबे राजनीतिक करियर में उन्होंने कभी भी किसी तरह का कोई घमंड नहीं किया और हमेशा आम जनता के बीच जमीन से जुड़े रहे। उन्होंने अपने जीवन में जो भी संघर्ष किया वह केवल और केवल अपनी क्षेत्र की जनता की भलाई और उनके अधिकारों के लिए ही किया था। जनता के प्रति उनका यह गहरा समर्पण उन्हें राजनीति में एक जीवंत मिसाल बनाता है जिसे आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी। उनका इस तरह से अचानक चले जाना पूरे समाजवादी परिवार एवं उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है जिसे भरा नहीं जा सकता।
लंबे समय से चल रहा था इलाज: बढ़ती उम्र के कारण विधायक आलमबदी आजमी का स्वास्थ्य पिछले कुछ समय से लगातार बहुत ही ज्यादा खराब रहने लगा था। तबीयत ज्यादा बिगड़ने के बाद इसी साल अप्रैल महीने की तेरह और चौदह तारीख को उन्हें बेहतर इलाज के लिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया था। लखनऊ में स्थित मशहूर मेदांता हॉस्पिटल में उन्हें भर्ती कराया गया था ताकि उनके स्वास्थ्य की पूरी तरह से उचित देखभाल की जा सके। इसके बाद लगातार मई, जून और जुलाई के महीनों में भी डॉक्टरों की एक बड़ी टीम उनका सघन इलाज इसी अस्पताल में कर रही थी। इतने लंबे समय तक अस्पताल में चले इस इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी और बुधवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।
नमाज-ए-जनाजा और अंतिम संस्कार: निधन की पुष्टि होने के बाद उनके परिवार ने उनके अंतिम संस्कार से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियों को सार्वजनिक रूप से साझा कर दिया है। उनके जनाजे की विशेष नमाज शाम को चार बजे पूरे धार्मिक सम्मान के साथ अदा करने का समय परिवार की तरफ से तय किया गया है। यह नमाज क्षेत्र के प्रसिद्ध जामियातुर रशाद में अदा की जाएगी जहां उनके हजारों समर्थकों के पहुंचने की पूरी-पूरी उम्मीद जताई जा रही है। सोलह मार्च उन्नीस सौ छत्तीस को जन्मे इस महान नेता की यह अंतिम विदाई उनके समर्थकों के लिए बहुत ही ज्यादा भावुक करने वाली होगी। पांच बार लगातार विधायक बनने का उनका यह सफर आज उनके इस दुखद निधन के साथ ही हमेशा के लिए अपने अंतिम मुकाम पर पहुंच गया है।


























































