शिक्षा व्यवस्था को लेकर चल रहे इस भारी बवाल के बीच एक बहुत ही बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। जाने-माने एक्टिविस्ट Sonam Wangchuk ने अपना चल रहा अनशन जल्द ही खत्म करने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। वह पिछले कई दिनों से छात्रों के हक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर लगातार अनशन पर बैठे हुए थे। उनके इस महत्वपूर्ण कदम से सरकार और प्रशासन दोनों ने ही एक बहुत बड़ी राहत की सांस ली है। इस पूरे आंदोलन में उनकी अहम भूमिका को देखते हुए उनका यह ताजा फैसला काफी ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अस्पताल में हुई अहम मुलाकात: अनशन के कारण बिगड़ती तबीयत को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसी दौरान बीते मंगलवार को केंद्र सरकार के दो प्रमुख मंत्रियों ने उनसे जाकर सीधे तौर पर मुलाकात की थी। केंद्रीय मंत्री JP Nadda और मंत्री जितेंद्र सिंह उनका हालचाल जानने के लिए Gurugram के मशहूर मेदांता अस्पताल पहुंचे थे। इन दोनों वरिष्ठ मंत्रियों ने अस्पताल के कमरे में जाकर एक्टिविस्ट के साथ काफी लंबी और विस्तृत बातचीत की थी। इस अहम मुलाकात के बाद ही पूरे आंदोलन की दिशा में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।
सरकार ने दिलाया पक्का भरोसा: अस्पताल में हुई इस खास मुलाकात के दौरान सरकार की तरफ से एक्टिविस्ट को पूरी तरह से आश्वस्त किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों मंत्रियों ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि एजुकेशन सिस्टम में सुधार के लिए तेजी से काम हो रहा है। सरकार शिक्षा के क्षेत्र में जरूरी और बड़े बदलाव लाने के लिए सभी उचित और सख्त कदम लगातार उठा रही है। मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य को लेकर केंद्र सरकार किसी भी तरह का कोई भी समझौता नहीं करेगी। इस पक्के सरकारी भरोसे के बाद ही एक्टिविस्ट के रुख में यह बड़ी और सकारात्मक नरमी देखने को मिली है।
वीडियो जारी कर रखी अपनी शर्तें: अस्पताल के बिस्तर से ही इस जाने-माने एक्टिविस्ट ने देश और सरकार के लिए अपना एक ताजा वीडियो संदेश जारी किया है। इस जारी किए गए वीडियो में उन्होंने अपना अनशन हमेशा के लिए खत्म करने की कुछ अहम शर्तें रखी हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार अगर छात्रों पर बल प्रयोग पूरी तरह से रोकने का पक्का भरोसा दे तो वह अपना अनशन खत्म कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने छात्रों पर दर्ज किए गए सभी मुकदमे तुरंत वापस लेने की भी एक बड़ी मांग रखी है। अब यह पूरी तरह से सरकार पर निर्भर करता है कि वह इन दोनों मांगों को कितनी जल्दी मानकर आधिकारिक घोषणा करती है।
संसद में होगी विस्तृत चर्चा: सड़क और अस्पताल के बाद अब यह पूरा मुद्दा देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद में भी गूंजने वाला है। केंद्र सरकार ने इस पूरे संवेदनशील मुद्दे पर Parliament के भीतर भी एक विस्तृत चर्चा कराने की पूरी तैयारी कर ली है। केंद्रीय मंत्री JP Nadda ने खुद सदन के भीतर पेपर लीक के इस गंभीर मसले पर विस्तार से चर्चा करने का पक्का भरोसा दिया है। सरकार का यह कदम विपक्ष के लगातार बढ़ते दबाव और छात्रों के देशव्यापी आक्रोश को शांत करने की एक बड़ी कोशिश है। इस अहम चर्चा के दौरान सरकार अपनी भविष्य की पूरी कार्ययोजना को भी देश के सामने विस्तार से रख सकती है।
विपक्ष पर लगाया सियासत का आरोप: चर्चा का भरोसा देने के साथ ही केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष को इसके लिए दिन और समय खुद तय करने का पूरा हक दिया है। हालांकि इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Rahul Gandhi पर इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर ओछी सियासत करने का सीधा आरोप भी लगाया। मंत्री ने उनसे तीखा सवाल पूछा कि वह गैर-बीजेपी शासित राज्यों में होने वाले पेपर लीक का कभी जिक्र क्यों नहीं करते हैं। उन्होंने विपक्ष को नसीहत दी कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को राजनीतिक फायदे के लिए बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। अब यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि विपक्ष इस खुली बहस के लिए कौन सा दिन और समय तय करता है।


























































