पब्लिक सेक्टर की प्रमुख पेट्रोलियम कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन को इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बड़ा झटका लगा है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से जून तिमाही में कंपनी को एकल आधार पर 2,661.37 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा सहना पड़ा है। यह स्थिति पिछले साल की तुलना में बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 5,688.60 करोड़ रुपये का शानदार लाभ कमाया था। इसके अलावा ठीक पिछली तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2026 के बीच इस पेट्रोलियम कंपनी को 11,377.51 करोड़ रुपये की बंपर कमाई हुई थी। कंपनी द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आधिकारिक बयान में इस बात की स्पष्ट जानकारी दी गई है।
कीमतें न बढ़ाने का सीधा असर इस भारी वित्तीय नुकसान का मुख्य कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लगातार स्थिर रखना बताया जा रहा है। कंपनी के चेयरमैन ए. एस. साहनी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की लागत में भारी वृद्धि हुई है। कच्चे तेल की लागत बढ़ने के पीछे पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष एक बहुत बड़ी वजह बनकर उभरा है। लागत में इस तेज वृद्धि के बावजूद अन्य सरकारी ऑयल कंपनियों की तरह इस कंपनी ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम नहीं बढ़ाए। इसी वजह से मुनाफा कमाने के बजाय कंपनी को करोड़ों रुपये के वित्तीय घाटे का सामना करना पड़ा है।
रिफाइनरी मार्जिन और परिचालन दक्षता इस गंभीर नुकसान की कुछ हद तक भरपाई तेल रिफाइनरी मार्जिन में सुधार के कारण संभव हो पाई है। इसके साथ ही कंपनी ने अपनी परिचालन दक्षता में सुधार करके भी घाटे के प्रभाव को कम करने का सफल प्रयास किया है। पहली तिमाही में कंपनी ने अपनी रिफाइनरियों में करीब 1.91 करोड़ टन कच्चे तेल की अब तक की सबसे ज्यादा प्रोसेसिंग की है। इस बेहतर प्रदर्शन के साथ ही ईंधन और अन्य नुकसान की दर भी घटकर 8.04 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है। इससे पहले वाले समय में कंपनी की यह नुकसान दर 8.5 प्रतिशत के स्तर पर दर्ज की गई थी।
ईंधन की रिकॉर्ड बिक्री का आंकड़ा वित्तीय घाटे के बावजूद जून तिमाही में कंपनी की ईंधन बिक्री के आंकड़ों में शानदार तेजी देखने को मिली है। कंपनी के चेयरमैन के अनुसार, इस दौरान 45 लाख टन पेट्रोल और करीब 1.8 करोड़ टन डीजल की रिकॉर्ड बिक्री हुई है। इसके अलावा कंपनी की प्राकृतिक गैस की बिक्री में भी 11 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़ी हुई बिक्री के आंकड़ों से कंपनी के समग्र वित्तीय प्रदर्शन को एक बड़ा सहारा मिला है। इसी का परिणाम है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में तेल कंपनी की ऑपरेशनल इनकम 26 प्रतिशत बढ़कर 2.75 लाख करोड़ रुपये हो गई है।
कच्चे तेल की आपूर्ति और विकल्प पश्चिम एशिया में चल रहे भारी संघर्ष के कारण कंपनी को कच्चे तेल की सप्लाई में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हालांकि कंपनी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पश्चिम अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे नए वैकल्पिक स्रोतों की तरफ अपना रुख किया। इन नए क्षेत्रों से खरीद बढ़ाकर कंपनी ने कच्चे तेल की कमी की सफलतापूर्वक भरपाई कर ली है। कंपनी के चेयरमैन ने स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल की वर्तमान उपलब्धता पूरी तरह से सुरक्षित स्थिति में है। उन्होंने देश को यह आश्वासन भी दिया है कि अगले 45 से 50 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर कोई भी चिंता नहीं है।
शेयर बाजार में कंपनी की स्थिति इस वित्तीय रिपोर्ट के सामने आने के बाद शुक्रवार को शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों में बहुत मामूली हलचल देखी गई। बीएसई पर इंडियन ऑयल के शेयर 0.14 प्रतिशत यानी 0.20 रुपये की मामूली बढ़त के साथ 140.15 रुपये के भाव पर बंद हुए। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, बीएसई पर इस सरकारी तेल कंपनी के शेयरों का 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर 188.90 रुपये है। वहीं दूसरी तरफ इसी दौरान इसका 52 हफ्तों का न्यूनतम स्तर 130.30 रुपये दर्ज किया गया है। वर्तमान में बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक इस सबसे बड़ी तेल कंपनी का कुल मार्केट कैप 1,97,909.16 करोड़ रुपये बना हुआ है।


























































