जांच एजेंसी ED की कार्रवाई के बाद TMC के बैंक खातों का संचालन पूरी तरह से ठप पड़ गया है। एजेंसी ने पार्टी से जुड़े तीन महत्वपूर्ण HDFC बैंक खातों के किसी भी तरह के इस्तेमाल पर पूरी रोक लगा दी है। इस सख्त पाबंदी को हटवाने के लिए अब पार्टी ने सीधे तौर पर Supreme Court का अहम दरवाजा खटखटाया है। पार्टी को उम्मीद है कि तीन अगस्त को जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच उन्हें राहत देगी। यह पूरा मामला वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध धन के बड़े लेन-देन की जांच से बहुत गहराई से जुड़ा हुआ है।
न्यायिक आदेश के खिलाफ अपील: पार्टी ने अपनी नई याचिका में Calcutta High Court के हालिया फैसले को चुनौती देते हुए बड़ी राहत की मांग की है। दरअसल बीस जुलाई दो हजार छब्बीस को उच्च न्यायालय ने खातों को फ्रीज करने पर किसी भी रोक से साफ मना कर दिया था। न्यायालय के इस इनकार के बाद पार्टी के पास शीर्ष अदालत जाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था। उच्च न्यायालय का यह आदेश पार्टी के रोजमर्रा के आर्थिक कामकाज में एक बहुत बड़ी बाधा बनकर सामने आया है। इसी वजह से पार्टी जल्द से जल्द इस रोक को हटवाने के लिए अपनी पूरी कानूनी ताकत लगा रही है।
मनी लॉन्ड्रिंग का गंभीर मामला: जांच एजेंसी ED के अनुसार यह मामला सीधे तौर पर धन के भारी दुरुपयोग और अवैध मनी लॉन्ड्रिंग का है। आरोप है कि पार्टी के बैंक खाते से लगभग 133.84 करोड़ रुपये की एक बहुत बड़ी राशि ट्रांसफर की गई थी। यह संदिग्ध और भारी-भरकम राशि Carewell Aviation India Private Limited नाम की कंपनी को सीधे तौर पर भेजी गई थी। जांच अधिकारियों को शक है कि यह धन किसी बड़े वित्तीय घोटाले या गलत इस्तेमाल का हिस्सा हो सकता है। इसी बात की गहराई से जांच करने के लिए ही एजेंसी ने खातों को फ्रीज करने का यह सख्त कदम उठाया है।
शिकायत और एफआईआर की प्रक्रिया: खातों पर हुई इस पूरी कार्रवाई की जड़ अठारह जून दो हजार छब्बीस की एक अहम शिकायत में छिपी हुई है। यह शिकायत West Bengal के स्थानीय विधायक बिस्वनाथ दास द्वारा पुलिस को आधिकारिक तौर पर दी गई थी। इसी अहम शिकायत पर संज्ञान लेते हुए स्थानीय पुलिस ने तुरंत ही एक विस्तृत एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस की इस एफआईआर के आधार पर ही जांच एजेंसी ED ने तेईस जून को अपनी नई जांच शुरू की। जांच के दौरान सात जुलाई को जांच अधिकारियों ने कुल छह बैंक खातों को सील कर दिया था जिनमें से तीन पार्टी के थे।
पार्टी के तर्क और विशेष अधिकारी: राजनीतिक दल TMC का दावा है कि खातों पर लगाई गई यह पाबंदी पूरी तरह से मनमानी और निराधार है। पार्टी ने अदालत में दलील दी है कि एजेंसी के पास इस जब्ती को सही ठहराने के लिए कोई भी ठोस सबूत नहीं हैं। उन्होंने याद दिलाया कि नौ जुलाई को उच्च न्यायालय की एक अन्य विशेष बेंच ने उन्हें कुछ अहम राहत प्रदान की थी। उस आदेश में पार्टी को रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए इन खातों से सीमित पैसे निकालने की अनुमति मिली थी। यह अनुमति एक विशेष अधिकारी की कड़ी निगरानी में बैंक खातों के जरूरी संचालन के लिए दी गई थी।
प्राधिकरण के पास जाने का सुझाव: Calcutta High Court ने अपने फैसले में साफ कहा है कि इस चरण पर फंड ट्रांसफर की वैधता तय नहीं हो सकती। न्यायालय ने पार्टी को अपनी सभी आपत्तियां निर्णायक प्राधिकरण के सामने उचित तरीके से पेश करने की सलाह दी है। अदालत का मानना है कि पार्टी आगे की सुनवाई के दौरान अपना पूरा पक्ष मजबूती के साथ सामने रख सकती है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जांच एजेंसी ने बड़ी रकम अलग-अलग संस्थाओं को भेजे जाने के पर्याप्त कारण दर्ज किए हैं। इसलिए जांच एजेंसी द्वारा खातों को फ्रीज करने की यह वर्तमान कार्रवाई पहली नजर में बिल्कुल उचित दिखाई देती है।


























































