प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विवादित टिप्पणी के मामले में पुलिस ने सख्त कानूनी कदम उठाए हैं। उनतीस जुलाई को नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में पंद्रह वर्षीय रुचिका सिंह के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता की संबंधित और कठोर धाराओं के तहत दर्ज किया है। आरोपी पर संवैधानिक पद की गरिमा को जानबूझकर ठेस पहुंचाने का बहुत ही गंभीर आरोप लगाया गया है। इसके अलावा उस पर समाज में अशांति फैलाने और जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने का भी मामला बना है।
पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचा केस नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद इसे अधिकार क्षेत्र के हिसाब से आगे भेज दिया गया है। अब इस पूरे आपराधिक मामले को दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में आधिकारिक रूप से स्थानांतरित कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस अब इस मामले से जुड़े सभी तथ्यों और वायरल वीडियो की बहुत ही गहनता से जांच कर रही है। पुलिस की टीमें लगातार सबूत जुटाने और फरार आरोपी लड़की का पता लगाने के लिए जरूरी कदम उठा रही हैं। इस घटना ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही स्तरों पर एक बहुत बड़ी बहस को जन्म दे दिया है।
नोएडा की सोसाइटी से गायब है आरोपी पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी रुचिका सिंह नोएडा की एक हाउसिंग सोसाइटी में रहती थी। वह इस फ्लैट में अपनी मां के साथ निवास करती थी लेकिन वर्तमान में यह फ्लैट पूरी तरह से बंद मिला है। सोसाइटी में तैनात सुरक्षाकर्मियों के मुताबिक तेईस जुलाई के प्रदर्शन के बाद से वह लड़की घर वापस नहीं लौटी है। पुलिस की टीम ने इसी सिलसिले में सोसाइटी पहुंचकर वहां रहने वाले अन्य लोगों से भी काफी लंबी पूछताछ की है। फिलहाल पुलिस को उसके छिपने के ठिकाने के बारे में कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग सका है।
आयोजकों ने दर्ज कराई कड़ी आपत्ति जंतर-मंतर पर इस पूरे प्रदर्शन का आयोजन करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने इस एफआईआर पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने एफआईआर दर्ज किए जाने की पुलिसिया कार्रवाई पर गहरी आपत्ति जताई है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने का समर्थन बिल्कुल भी नहीं किया जा सकता है। लेकिन उनका यह भी मानना है कि ऐसी टिप्पणियों पर सीधे आपराधिक मुकदमा दर्ज करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। पार्टी के अनुसार ऐसे मामलों को आपराधिक श्रेणी में रखना पूरी तरह से गलत और अलोकतांत्रिक कदम है।
मानहानि का मामला दर्ज करने का सुझाव कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता ने इस मामले से निपटने के लिए एक अलग कानूनी विकल्प का भी सुझाव दिया है। उनका कहना है कि यदि किसी भी पक्ष को इन बातों से आपत्ति है तो वह सीधे मानहानि का मामला दर्ज करा सकता है। लेकिन इस तरह के बयानों को आधार बनाकर किसी पर आपराधिक कार्रवाई करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस की इस तरह की सख्त कार्रवाई से आम जनता के बीच एक डर का माहौल पैदा होता है। उनका दल अभिव्यक्ति की आजादी के समर्थन में खड़ा है और वह इस मुद्दे पर लगातार अपनी राय रख रहा है।
वीडियो जारी कर मांगी गई माफी इन सब विवादों और कानूनी कार्रवाइयों के बीच अब आरोपी रुचिका का एक माफीनामा वीडियो भी सामने आ गया है। वीडियो में उसने पंद्रह साल की उम्र का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों के प्रभाव में आकर बयान देने की बात कबूली है। उसने हाथ जोड़कर कहा है कि वह अपनी इस पहली और आखिरी गलती के लिए पूरे देश से माफी मांगती है। दिलचस्प बात यह है कि यह वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान के बाद आया जिसमें उन्होंने गाली देने वालों को माफ कर दिया था। प्रधानमंत्री ने इंस्टाग्राम पर कहा था कि अपशब्द परेशान करने वाले थे लेकिन युवाओं को अपनी गलतियों से सीखने का मौका मिलना चाहिए।













































