यह महीना ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है। 29 जून 2026 को जहाँ ज्येष्ठ पूर्णिमा पर 150 साल बाद गजकेसरी योग बन रहा है, वहीं वक्री बुध और शुक्र के गोचर भी सभी राशियों पर गहरा प्रभाव डालेंगे। साथ ही, अपनी कुंडली के सबसे शक्तिशाली ग्रह को पहचानने के लिए ‘षड्बल’ को समझना भी बेहद जरूरी है। आइए इन सभी ज्योतिषीय घटनाओं का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
1. शुक्र ग्रह का सिंह राशि में गोचर (4 जुलाई – 1 अगस्त)
भौतिक सुख, प्रेम और रचनात्मकता के कारक ग्रह शुक्र, 4 जुलाई को शाम 7 बजकर 18 मिनट पर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे और 1 अगस्त तक इसी राशि में रहेंगे। यह गोचर कुछ राशियों के लिए बेहद शुभ साबित होने वाला है:
- मेष राशि: शुक्र आपके पंचम भाव में गोचर करेगा। शिक्षा, प्रेम और आर्थिक मामलों में सफलता मिलेगी। प्रतियोगी परीक्षाओं में लाभ और निवेश से बंपर मुनाफा हो सकता है। सिंगल लोगों के जीवन में प्रेम का आगमन हो सकता है।
- कर्क राशि: द्वितीय (धन) भाव में गोचर से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। मनचाही नौकरी और पैतृक कारोबार में अपार सफलता मिल सकती है। रचनात्मक लोगों की ख्याति बढ़ेगी और परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा।
- सिंह राशि: आपके लग्न भाव में शुक्र का आना आपके आकर्षण और मान-सम्मान को बढ़ाएगा। व्यापार शुरू करने के लिए समय उत्तम है। पुराने संपर्कों से धन लाभ और माता-पिता का पूरा सहयोग मिलेगा।
- तुला राशि: लाभ भाव में गोचर से आय के नए स्रोत खुलेंगे। नौकरी के साथ नया व्यवसाय शुरू करने के योग हैं। शेयर बाजार से मुनाफा और फंसा हुआ धन वापस मिलने की पूरी संभावना है।
2. ज्येष्ठ पूर्णिमा पर 150 साल बाद गजकेसरी योग (29 जून 2026)
29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन 150 सालों बाद गजकेसरी और त्रिकोणीय योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है (जब चंद्र और गुरु एक-दूसरे से केंद्र में हों)। यह 5 राशियों के लिए वरदान साबित होगा:
- मेष राशि: आय में वृद्धि होगी, नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा और रुके हुए काम पूरे होंगे।
- मिथुन राशि: कारोबारियों को बड़ी डील मिल सकती है। अचानक धन लाभ और करियर में अपार सफलता के योग हैं।
- सिंह राशि: निवेश से भविष्य में बड़ा फायदा होगा। पैतृक संपत्ति का लाभ मिलेगा और घर में शांति रहेगी।
- तुला राशि: अटका धन वापस मिलेगा, प्रमोशन और आय में वृद्धि होगी। मान-सम्मान बढ़ेगा।
- धनु राशि: भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। कोर्ट-कचहरी और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलेगी। मानसिक तनाव दूर होगा।
3. बुध का वक्री गोचर: मिथुन से कर्क राशि तक (29 जून – 24 जुलाई)
बुद्धि और वाणी के देवता बुध 29 जून रात 11:05 बजे मिथुन राशि में वक्री (उल्टी चाल) होंगे और 24 जुलाई की सुबह 4:28 बजे कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार सभी 12 राशियों पर इसका प्रभाव और उपाय:
- मेष (तीसरा भाव): भाई-बहनों से रिश्ते सुधरेंगे और सहयोग मिलेगा। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। उपाय: सुबह उठकर फिटकरी से दांत साफ करें।
- वृष (दूसरा भाव): धन लाभ होगा, करियर में बेहतरी और नई चीज़ें सीखने का मौका मिलेगा। उपाय: अपने पास चांदी की कोई चीज़ रखें।
- मिथुन (लग्न भाव): मान-सम्मान आपके कर्मों पर निर्भर करेगा। अपनी वाणी और जीभ के स्वाद पर नियंत्रण रखें। उपाय: हरे रंग की चीज़ें मंदिर में दान करें।
- कर्क (बारहवां भाव): सुख-सुविधाओं के लिए अधिक मेहनत करनी होगी। आमदनी सोच-समझकर खर्च करें। उपाय: गले में पीले रंग का धागा पहनें।
- सिंह (ग्यारहवां भाव): आमदनी बढ़ेगी, सुख-साधन मिलेंगे और इच्छाएं पूरी होंगी। उपाय: गले में तांबे का पैसा धारण करें।
- कन्या (दसवां भाव): करियर में हल्की रुकावटें आ सकती हैं। पिता और अपनी सेहत का ध्यान रखें। उपाय: मां दुर्गा की उपासना करें।
- तुला (नौवां भाव): भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। मेहनत का बेहतरीन परिणाम और आर्थिक स्थिरता मिलेगी। उपाय: हरे रंग की चीज़ों के उपयोग से बचें।
- वृश्चिक (आठवां भाव): शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रहेंगे। मेहनत का जल्द रिजल्ट मिलेगा। उपाय: बुधवार को मिट्टी के बर्तन में शहद डालकर वीराने में दबा दें।
- धनु (सातवां भाव): जीवनसाथी के साथ नोकझोंक हो सकती है, रिश्ते को संभालकर रखें। उपाय: मिट्टी के बर्तन में भीगे हुए हरे मूंग मंदिर में दान करें।
- मकर (छठा भाव): दोस्तों का साथ मिलेगा, शत्रुओं से छुटकारा। दिल खोलकर काम करेंगे। समुद्री यात्राएं शुभ रहेंगी। उपाय: शुभ कार्य से पहले कन्या का आशीर्वाद लें।
- कुंभ (पांचवां भाव): पढ़ाई में मन लगेगा। लवमेट के साथ रिश्ते मधुर होंगे और गुरु का सहयोग मिलेगा। उपाय: गाय की सेवा करें।
- मीन (चौथा भाव): भूमि, भवन और वाहन सुख के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ेगी, लेकिन सफलता मिलेगी। माता का सहयोग मिलेगा। उपाय: मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं।
4. ज्योतिष शास्त्र में ‘षड्बल’ (Shadbala) क्या है?
कुंडली में कौन सा ग्रह सबसे अधिक बलवान है, यह जानने के लिए ‘षड्बल’ (6 प्रकार की शक्तियां) का आंकलन किया जाता है। षड्बल में मजबूत ग्रह अपनी महादशा में शानदार परिणाम देता है, भले ही वह कुंडली में कमजोर दिख रहा हो। राहु-केतु को छोड़कर 7 ग्रहों का षड्बल निकाला जाता है।
षड्बल के 6 मुख्य स्तंभ:
- स्थान बल: ग्रह किस भाव या राशि (उच्च, स्वराशि, मित्र राशि) में बैठा है।
- दिगबल (दिशा बल): ग्रह अपनी अनुकूल दिशा में होने पर दिगबली होता है।
- काल बल: जातक का जन्म दिन में हुआ है या रात में (जैसे सूर्य दिन में और चंद्र रात में बली होते हैं)।
- चेष्टा बल: ग्रह की गति (वक्री या मार्गी) से मिलने वाला बल।
- नैसर्गिक बल: ग्रहों का प्राकृतिक बल (सूर्य सबसे बलवान, फिर चंद्र, शुक्र, गुरु, बुध, मंगल और अंत में शनि)।
- दृग् बल (दृष्टि बल): शुभ ग्रहों (गुरु, शुक्र) की दृष्टि पड़ने से मिलने वाला बल।
सबसे शक्तिशाली ग्रह कैसे जानें? हर बल का 1 अंक होता है। जिस ग्रह को षड्बल में सबसे अधिक अंक मिलते हैं, वह कुंडली का सबसे शक्तिशाली ग्रह कहलाता है। यदि कोई ग्रह कुंडली में राजयोग बना रहा हो लेकिन षड्बल में कमजोर हो, तो उसका फल नहीं मिलता। इसके विपरीत, षड्बल में मजबूत ग्रह हमेशा सकारात्मक और चमत्कारी परिणाम देता है।





































