श्रावण (सावन) मास में पड़ने वाले सभी मंगलवार अत्यंत पवित्र और फलदायी माने जाते हैं। सावन के प्रत्येक मंगलवार को ‘मंगला गौरी व्रत’ रखने का विधान है। इस व्रत में जगज्जननी माता पार्वती (गौरी जी) की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। पौराणिक ग्रंथों एवं शास्त्रों में इस व्रत को ‘मोराकत व्रत’ के नाम से भी जाना जाता है।
सनातन परंपरा और पुराणों के अनुसार, संपूर्ण सावन का महीना देवों के देव महादेव और माता पार्वती को अति प्रिय है। इसी कारण सावन के सोमवार को भगवान शिव और मंगलवार को माता गौरी की साधना-आराधना का विशेष महत्व बताया गया है।
मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी व्रत रखने से साधक को कई प्रकार के शुभ फलों की प्राप्ति होती है:
- अखंड सौभाग्य की प्राप्ति: सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्यवती रहने का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- दांपत्य जीवन में खुशहाली: पति-पत्नी के बीच आपसी प्रेम बढ़ता है और वैवाहिक जीवन से जुड़ी सभी परेशानियां व तनाव दूर होते हैं।
- मनोवांछित फल: कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है तथा संतान सुख की इच्छा रखने वाले दंपतियों की मनोकामना पूरी होती है।
वर्ष 2026 में 18 अगस्त (मंगलवार) को सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत रखा जा रहा है। व्रत का पूर्ण शुभ फल प्राप्त करने के लिए शास्त्रों में कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है।
व्रत के दिन क्या करें और क्या न करें
सावन मंगला गौरी व्रत के दिन साधक को अपने आचार-विचार और पहनावे पर विशेष ध्यान देना चाहिए:
- क्रोध और विवाद से बचें: व्रत के दिन मन को शांत रखें। किसी पर भी गुस्सा न करें और न ही वाद-विवाद या बहस में उलझें, अन्यथा व्रत खंडित हो सकता है।
- बुजुर्गों का सम्मान करें: घर या बाहर किसी भी बड़े-बुजुर्ग का अपमान न करें। उनका आशीर्वाद लेने पर ही व्रत का पूर्ण फल मिलता है।
- वाणी पर संयम रखें: किसी भी व्यक्ति को अपशब्द, कटु वचन या झूठे बोल न कहें।
- वस्त्रों का चयन: पूजा के दिन काले, गहरे नीले या स्लेटी (ग्रे) रंग के कपड़े पहनने से पूरी तरह बचें। पूजा-पाठ और शुभ कार्यों में ये रंग अशुभ माने जाते हैं। लाल, पीले, गुलाबी या हरे रंग के वस्त्र धारण करना उत्तम होता है।
- सोलह श्रृंगार: सुहागिन महिलाओं को पूजा के समय पूरा श्रृंगार (सोलह श्रृंगार) करना चाहिए। बिना सिंदूर और बिंदी के पूजा में बैठना वर्जित माना गया है।
व्रत में किन चीजों का सेवन न करें
मंगला गौरी व्रत के दौरान आहार को लेकर कड़े नियमों का पालन करना होता है:
- अन्न का त्याग: व्रत के दिन गेहूं, चावल और दालों का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है।
- तामसिक पदार्थों से दूरी: मांस, मदिरा, सिगरेट या किसी भी प्रकार के नशीले व तामसिक पदार्थों का सेवन भूलकर भी न करें।
- प्याज और लहसुन: घर के भोजन और रसोई में प्याज-लहसुन का प्रयोग पूरी तरह से बंद रखें।
- सफेद नमक पर रोक: व्रत के फलाहार में सामान्य (सफेद) नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
- हल्दी व सरसों तेल: फलाहारी भोजन तैयार करते समय हल्दी और सरसों के तेल का उपयोग करने से बचें। इसके स्थान पर शुद्ध देसी घी या मूंगफली के तेल का ही इस्तेमाल करें।
व्रत में क्या खाना चाहिए (फलाहार नियम)
मंगला गौरी व्रत के दिन केवल सात्विक और फलाहारी खाद्य पदार्थों का ही सेवन करना चाहिए:
- सात्विक फलाहार: व्रत में शुद्ध सात्विक आहार ग्रहण करें।
- कुट्टू और सिंघाड़ा: कुट्टू के आटे या सिंघाड़े के आटे से बनी पूड़ी, पराठा या हलवा बनाकर खाया जा सकता है।
- सब्जियां: फलाहार में आलू, लौकी, अरबी और कद्दू (सीताफल) की सात्विक सब्जी बनाकर सेवन कर सकते हैं।
- सेंधा नमक: यदि भोजन में नमक की आवश्यकता हो, तो केवल और केवल सेंधा नमक (व्रत का नमक) ही प्रयोग करें।
- साबूदाना: साबूदाने की खिचड़ी, साबूदाने के वड़े या साबूदाने की खीर का सेवन किया जा सकता है।
- ताजे फल व डेयरी उत्पाद: सेब, केला, पपीता, अनार समेत अन्य मौसमी फलों का सेवन करें। इसके अलावा दूध, दही, मलाई और छाछ का सेवन भी किया जा सकता है।
















































