हिंदू धर्म में देवी देवता की पूजा के साथ साथ तीर्थ स्थलों को भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है मान्यता है कि तीर्थ स्थलों में ईश्वर के दर्शन और पूजन से भक्तों को शांति मिलती है और जीवन में खुशहाली का आगनम होता है देशभर में 52 शक्तिपीठ मौजूद है इन्हीं 52 शक्तिपीठों में से एक बिहार में स्थित है

इस मंदिर को पटन देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है यह भक्ति की आस्था का केंद्र बना हुआ है रोजाना भक्त और श्रद्धालु देवी माता के दर्शन के लिए आते हैं लेकिन नवरात्रि के पावन दिनों में यहां लाखों की संख्या में भक्तों की भीड़ लगती है मान्यता है कि इस मंदिर में देवी मां के दर्शन और पूजन करने से जीवन में सुख समृद्धि और शांति आती है वही भक्तों की सभी मुरादें भी पूरी हो जाती है तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा पटन देवी मंदिर से जुड़ी कुछ रोचक बातें व जानकारी प्रदान कर रहे हैं तो आइए जानते हैं।

वही देवी भागवत और तंत्र चूड़ामणि के मुताबिक इस स्थान पर माता सती की दाहिनी जांघ गिरी थी इसी कारण इसे शक्तिपीठ कहा जाता है इस मंदिर को बड़ी पटन देवी और पाटन देवी के नाम से जाना जाता है। वही इस पवित्र मंदिर में माता के दो स्वरूप है जिन्हें छोटी पटन देवी और बड़ी पटन देवी के नाम से जाना जाता है पूरे पटन की रक्षा का दायित्व छोटी पटन देवी ने अपने सिर लिए हुए है

इसी कारण इन्हें भगवती पटनेश्वरी नाम से भी जानते हैं वही बड़ी पटनी का मंदिर अगल स्थान पर बना हुआ और इस मंदिर में मां सरस्वती, मां लक्ष्मी और महाकाली की प्रतिमा स्थापित की गई है इस स्थान पर भैरव बाबा की भी प्रतिमा है जो देखने लायक मानी जाती है, भक्तों की मान्यता है कि इस पवित्र मंदिर के दर्शन और पूजन करने से सभी मुरादें पूरी हो जाती है और कष्टों का भी निवारण देवी मां कर देती है।





































