अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने फैसलों से वैश्विक राजनीति में हलचल मचाने के लिए जाने जाते हैं। चाहे वेनेजुएला में अमेरिकी सेना का मिलिट्री ऑपरेशन हो, विभिन्न देशों पर टैरिफ लगाना हो या फिर ईरान पर बदलती नीतियां हों, उनके फैसलों ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उथल-पुथल पैदा की है। अब ट्रंप ने अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन को निर्देश दिया है कि वह साउथ कोरिया के साथ प्रस्तावित संयुक्त सैन्य अभ्यास को काफी हद तक कम करे। राष्ट्रपति के इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
ईरान विवाद और नॉर्थ कोरिया: इस कदम के पीछे प्रमुख वजह ईरान से जुड़े वैश्विक कूटनीतिक समीकरणों को बताया जा रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि साउथ कोरिया ने ईरान को परमाणु मुक्त बनाने की अमेरिकी कोशिशों में भागीदार बनने से मना कर दिया था। इसके साथ ही ट्रंप ने नॉर्थ कोरिया के प्रति अपनी नरमदिली का प्रदर्शन करते हुए किम जोंग उन के साथ अपने बेहतर संबंधों का हवाला दिया। साउथ कोरिया द्वारा अपेक्षित सहयोग न मिलने और नॉर्थ कोरिया से अच्छे संबंधों के चलते ही ट्रंप ने मिलिट्री एक्सरसाइज में कटौती करने का यह बड़ा फैसला लिया है।
खर्चीला अभ्यास और अनुचित संदेश: राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए कहा कि इस हफ्ते आयोजित होने वाला यह अभ्यास न केवल अत्यधिक महंगा है, बल्कि नॉर्थ कोरिया के प्रति गलत और दुश्मनी भरा संदेश भी भेजता है। ट्रंप ने कहा कि उनके राष्ट्रपति काल में नॉर्थ कोरिया ने कभी भी अमेरिका के सामने खतरा पैदा नहीं किया, बल्कि हमेशा सम्मान प्रदर्शित किया। उन्होंने तर्क दिया कि भारी भरकम खर्च करके सहयोगी देशों के साथ ऐसा अभ्यास करना नॉर्थ कोरिया जैसे देश के साथ संबंधों को बेवजह तनावपूर्ण बनाने जैसा है।
पीट हेगसेथ को दिए गए निर्देश: ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा कि चूंकि इस एक्सरसाइज को पूरी तरह रद्द करने की समय-सीमा बीत चुकी है, इसलिए उन्होंने सेक्रेटरी ऑफ वॉर, पीट हेगसेथ को अभ्यास के पैमाने को काफी छोटा करने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि हाल ही में उन्होंने साउथ कोरिया के राष्ट्रपति से इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के डीन्यूक्लियराइज़ेशन में अमेरिका का साथ देने का आग्रह किया था, लेकिन सियोल की तरफ से इनकार कर दिया गया। इसी बात को आधार बनाकर ट्रंप ने पेंटागन को अभ्यास में कटौती का आदेश थमाया है।
वैश्विक कूटनीति में बड़ा बदलाव: राष्ट्रपति ट्रंप के इस रुख को अमेरिकी विदेश नीति में आ रहे एक बड़े बदलाव के रूप में आंका जा रहा है। ट्रंप अपने पारंपरिक मित्र देश से दूरी बनाकर उस देश के तानाशाह के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं जिसे पूर्व अमेरिकी प्रशासन अपना प्रमुख प्रतिद्वंद्वी मानते थे। इससे पूर्व भी ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ संघर्ष में पर्याप्त समर्थन न देने पर नाटो के सहयोगी देशों की सार्वजनिक आलोचना की थी। साउथ कोरिया के प्रति ट्रंप प्रशासन का यह हालिया कदम दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों में दूरियां ला सकता है।
ड्रिल का मकसद और तीखी प्रतिक्रिया: यह 11 दिवसीय संयुक्त सैन्य अभ्यास नॉर्थ कोरिया द्वारा संयुक्त राष्ट्र के बैन के बावजूद बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षणों के बाद प्लान किया गया था, जिसमें 18,000 साउथ कोरियन सैनिकों को शामिल होना था। इसका उद्देश्य दोनों देशों की रक्षा तैयारियों को मजबूत करना था। डेमोक्रेटिक सेनेटर मार्क केली ने ट्रंप के इस निर्णय को बेहद गलत और संकीर्ण सोच वाला करार दिया है। वहीं, हाल ही में ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण की बात दोहराते हुए कहा था कि अमेरिका इस क्षेत्र पर अपना वर्चस्व बनाए रखेगा।
















































