युद्धविराम लागू होने के बावजूद मध्य पूर्व में हिंसा का दौर अभी भी पूरी तरह से रुकने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को दक्षिणी लेबनान में इज़राइली हवाई हमलों और खतरनाक ड्रोन हमलों में कम से कम पांच निर्दोष लोग मारे गए। सरकारी समाचार एजेंसी एनएनए ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इज़राइली लड़ाकू विमानों और ड्रोनों ने रात भर भीषण हमले किए। शनिवार सुबह तक नबातीह इलाके में लगातार कई हमले किए गए, जिनमें कई रिहायशी इमारतें और घर पूरी तरह नष्ट हो गए। इस अप्रत्याशित हमले ने शांति समझौते की उम्मीदों को गहरा झटका दिया है और इलाके में फिर से दहशत का माहौल बना दिया है।
अमेरिका के लिए बड़ा इम्तिहान लेबनान पर हुए इस ताज़ा हमले के बाद अमेरिका की मध्यस्थता और उसके वैश्विक प्रभाव पर कई सवाल उठने लगे हैं। दोहा इंस्टीट्यूट फॉर ग्रेजुएट स्टडीज़ के विशेषज्ञ मुहनाद सेलूम ने कहा कि वर्तमान स्थिति अमेरिका के लिए एक बड़ा इम्तिहान है। सेलूम के अनुसार, ईरानी नेतृत्व अब यह देखना चाहता है कि क्या अमेरिका सच में इज़राइल को कंट्रोल कर सकता है। ईरान इस बात की भी परीक्षा ले रहा है कि वाशिंगटन अपने सहयोगी देश इज़राइल की आक्रामकता पर लगाम लगा सकता है या नहीं। इस घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि शांति प्रक्रिया में अमेरिका की भूमिका को क्षेत्र के देश बहुत बारीकी से देख रहे हैं।
ईरान को सता रहा भविष्य का डर दोहा इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ मुहनाद सेलूम ने ईरान के दृष्टिकोण और उसकी सुरक्षा चिंताओं को भी विस्तार से समझाया है। उन्होंने बताया कि तेहरान के नज़रिए से इस समय वाशिंगटन की कूटनीतिक शक्ति और विश्वसनीयता सवालों के घेरे में है। अगर वाशिंगटन वर्तमान में इज़राइल को लेबनान पर इस तरह के घातक हमले करने से नहीं रोक पाता है, तो चिंताएं बढ़ेंगी। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि इस बात की क्या गारंटी है कि भविष्य में इज़राइल खुद ईरान पर सीधा हमला नहीं करेगा। इसी अविश्वास के कारण ईरान क्षेत्र में अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका से ठोस और स्पष्ट आश्वासन चाहता है।
इज़राइल शांति को बिगाड़ सकता है ईरान के उप-विदेश मंत्री सईद खतीबज़ादेह ने अमेरिका और ईरान के बीच हो रहे वर्तमान शांति समझौते के मुख्य उद्देश्य पर प्रकाश डाला है। उप-विदेश मंत्री का कहना है कि अमेरिका-ईरान समझौते का असल मकसद पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में लंबे समय तक स्थिरता लाना है। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र की अस्थिरता को लेकर इज़राइल की आक्रामक नीतियों के खिलाफ एक बहुत ही गंभीर चेतावनी भी दी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि इज़राइल अपने लगातार हमलों से इस अहम शांति प्रक्रिया को बिगाड़ सकता है। खतीबज़ादेह के इस बयान से साफ जाहिर होता है कि ईरान शांति चाहता है लेकिन वह इज़राइल के रवैये से बेहद चिंतित है।
ब्रिटेन की मंत्री ने की कड़ी निंदा इज़राइली मंत्री के एक विवादास्पद बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी कड़ी आलोचनाओं का सिलसिला शुरू हो गया है। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, यूके की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने इज़राइल के मंत्री के बयान की सख्त निंदा की है। इज़राइल के दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के हमले के बाद यह भड़काऊ बयान दिया था। हिज़्बुल्लाह के हमले में चार इज़राइली सैनिकों के मारे जाने के बाद इतामार बेन-ग्विर ने कहा था कि पूरे लेबनान को जल जाना चाहिए। इस अत्यधिक हिंसक और गैर-जिम्मेदाराना बयान के कारण ही ब्रिटेन की विदेश मंत्री को अपनी तीखी प्रतिक्रिया दर्ज करानी पड़ी है।
इज़राइली मंत्री का भयानक बयान यूके की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट के जरिए अपना कड़ा विरोध जताया है। कूपर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि पूरे लेबनान को जलाने की बात कहना किसी भी इज़राइली मंत्री का भयानक और घिनौना बयान है। उन्होंने कहा कि इस तरह की चरमपंथी भाषा का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और शांति प्रयासों के लिए बेहद नुकसानदेह साबित होता है। विदेश मंत्री ने आगे स्पष्ट किया कि ऐसे भड़काऊ विचारों वाले नेता पर यूके सरकार ने बिल्कुल सही तौर पर प्रतिबंध लगाया है। उनके इस कड़े रुख से यह संदेश जाता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस तरह की युद्ध भड़काने वाली बयानबाजी को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।





































