अयोध्या के इस पवित्र मंदिर परिसर में कुल मिलाकर अठारह छोटे-बड़े मंदिर स्थापित किए गए हैं। इन सभी मंदिरों और पूरे परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए करीब चालीस दानपात्र रखे गए हैं। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इन दानपात्रों में नकदी और आभूषणों का भारी मात्रा में दान करते हैं। दानपात्रों से निकाले गए इन सभी पैसों और आभूषणों को यात्री सुविधा केंद्र के बेसमेंट में ले जाया जाता है। इसी सुरक्षित बेसमेंट में चढ़ावे की गिनती करने के लिए एक विशेष काउंटिंग सेंटर बनाया गया है।
गिनती की कार्यप्रणाली: इस स्थापित काउंटिंग सेंटर में चढ़ावे की गिनती का काम मुख्य रूप से दो शिफ्टों में किया जाता है। गिनती की पहली शिफ्ट सुबह आठ बजे से शुरू होकर दोपहर दो बजे तक लगातार चलती है। इसके बाद दूसरी शिफ्ट दोपहर दो बजे से आरंभ होकर रात आठ बजे तक पूरी की जाती है। प्रत्येक शिफ्ट में इस काम को करने के लिए बाईस-बाईस कर्मचारियों को विशेष रूप से तैनात किया जाता है। कुल मिलाकर करीब पचास लोग इस पूरी प्रक्रिया में शामिल रहते हैं, जिनमें बैंक और निजी एजेंसियों के कर्मचारी मौजूद हैं।
नियमों का खुला उल्लंघन: चढ़ावे की गिनती को सुरक्षित रखने के लिए कई कड़े नियम पहले से ही तय किए गए थे। गिनती करने वाले सभी कर्मचारियों को विशेष रूप से बिना जेब वाले कपड़े पहनकर आना अनिवार्य था। इसके अलावा काउंटिंग रूम में प्रवेश करने से पहले और बाहर निकलते समय उनकी कड़ी तलाशी ली जानी थी। लेकिन हालिया जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि इन महत्वपूर्ण नियमों का बिल्कुल पालन नहीं हुआ। सुरक्षा मानकों में हुई इस भारी लापरवाही ने ही मंदिर परिसर में चोरी की इस बड़ी घटना को जन्म दिया।
कैमरे बंद करने की साजिश: सुरक्षा नियमों की अनदेखी के साथ-साथ गिनती के दौरान एक और बड़ी साजिश को अंजाम दिया गया। जांच में यह हैरान करने वाली बात सामने आई है कि कई बार काउंटिंग के दौरान कैमरे जानबूझकर बंद कर दिए जाते थे। जब कैमरे बंद होते थे तो नकदी और आभूषणों की कथित हेराफेरी को आसानी से अंजाम दिया जाता था। जो फुटेज जांचकर्ताओं को मिली है, उसमें कुछ लोग नोटों की गड्डियां अपनी जेबों में छिपाते हुए भी दिखाई दिए हैं। इन लोगों ने अपने कपड़ों में बड़ी चालाकी से चढ़ावे की रकम को छिपाने का सीधा प्रयास किया है।
पूर्व इंजीनियर के आरोप: मंदिर निर्माण से जुड़े रहे एक पूर्व इंजीनियर ने इस पूरे विवाद में कई नए और गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि मंदिर में होने वाली ये सभी वित्तीय अनियमितताएं कोई नई बात नहीं हैं। उनके मुताबिक मंदिर निर्माण के शुरुआती दौर में भी जमकर कमीशनखोरी और पैसों की भारी हेराफेरी होती रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट आरोप लगाया है कि इस संबंध में बार-बार शिकायत करने पर भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनके अनुसार इस मुद्दे पर ट्रस्ट के महासचिव से भी शिकायत की गई थी लेकिन उन्होंने पूरी तरह से आंखें फेर ली थीं।
संदेह के घेरे में कई नाम: इस चोरी और हेराफेरी के खुलासे के बाद प्रबंधन से जुड़े कई लोग जांच के दायरे में आ गए हैं। जांच एजेंसियों की नजर निर्माण सहायक से लेकर गिनती करने वाले कई छोटे-बड़े कर्मचारियों पर बनी हुई है। इनमें टिन्नू यादव, केडी तिवारी, सुभाष श्रीवास्तव, राजेश पाठक और मनीष यादव जैसे कई प्रमुख नाम सामने आए हैं। इनके अलावा करुण, ऋतिक, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और सोमेश सहित अन्य लोगों पर भी जांच दल की पैनी नजर है। इन सभी संदिग्धों से कड़ी पूछताछ करके इस पूरे आर्थिक घोटाले का असली सच सामने लाने की लगातार कोशिश की जा रही है।





































