भारतीय नौसेना ने देश की समुद्री सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए बुधवार को एक बड़ा कदम उठाया। नौसेना ने अपने बेड़े में माहे-क्लास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट को आधिकारिक रूप से कमीशन कर लिया है। इस ASW-SWC श्रेणी के दूसरे आधुनिक युद्धपोत को Malvan के नाम से जाना जाएगा। यह जलावतरण नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं को पहले से कई गुना अधिक मजबूत करेगा। देश की रक्षा तैयारियों के लिहाज से इस युद्धपोत का कमीशन होना एक ऐतिहासिक क्षण है।
कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि: इस खास और ऐतिहासिक नेवी कार्यक्रम की अध्यक्षता Air Chief Marshal AP Singh ने की। उनके साथ-साथ Western Naval Command के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी इस दौरान वहां मौजूद रहे। समारोह में Vice Admiral Sanjay Vatsayan ने भी अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। Indian Navy के अन्य सीनियर अफसर और पूर्व सैनिक भी इस विशेष अवसर पर एकजुट हुए। इनके अलावा Kochi स्थित Cochin Shipyard Limited के प्रतिनिधियों ने भी इस कमीशनिंग समारोह में हिस्सा लिया।
हिंद महासागर की महत्ता: Air Chief Marshal AP Singh ने अपने संबोधन में समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यापार के मार्ग समंदर के रास्ते ही तय होते हैं, जो देश का भविष्य बनाते हैं। इसलिए किसी भी देश की आर्थिक वृद्धि के लिए समुद्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि हिंद महासागर का क्षेत्र भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। Indian Navy इसी समुद्री संचार और व्यापार को सुरक्षित एवं निर्बाध बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है।
स्वदेशी निर्माण का शानदार उदाहरण: नया कमीशन किया गया युद्धपोत देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता का उत्कृष्ट प्रमाण है। इस युद्धपोत में 80 प्रतिशत स्वदेशी चीजों और उपकरणों का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया है। इस उपलब्धि के साथ हम जल्द ही पूरी तरह से आत्मनिर्भर भारत के बड़े सपने को साकार करेंगे। Malvan का निर्माण Cochin Shipyard Limited द्वारा किया गया है, जो इसकी गुणवत्ता को दर्शाता है। यह मॉडर्न नेवल शिप-बिल्डिंग और शानदार डिजाइन के सेक्टर में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का जीता-जागता उदाहरण है।
अन्य सेनाओं को मिली प्रेरणा: स्वदेशी उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर वायुसेना प्रमुख ने नौसेना के दृष्टिकोण की खूब सराहना की। Air Chief Marshal AP Singh ने कहा कि नौसेना ने शुरुआत से ही आत्मनिर्भरता के मंत्र को अपनाया है। उन्होंने माना कि भारतीय वायुसेना ने इस स्वदेशी दिशा में अपना काम काफी देर से शुरू किया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अलग-अलग रक्षा क्षेत्रों को पूरी तरह आगे बढ़ने में अलग-अलग समय लगता है। उन्होंने आशा जताई कि अब थलसेना और IAF भी नौसेना से प्रेरणा लेकर आत्मनिर्भर बनने पर अपना फोकस करेंगी।
रक्षा क्षेत्र में देश की छलांग: युद्धपोत के डिजाइन और उसके इंटीग्रेशन में देश ने अपनी पूरी महारत साबित कर दी है। नौसेना ने लगातार देश में बने युद्धपोतों को शामिल करके एक नई मिसाल पेश की है। इससे ठीक पहले स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट INS Mahendragiri को भी भारतीय नौसेना में विधिवत शामिल किया गया था। उस शानदार अवसर पर रक्षामंत्री Rajnath Singh ने देश की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता की काफी प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा था कि नौसेना में शामिल हो रहे ये स्वदेशी पोत असल में आत्मनिर्भर भारत की ताकत का प्रतीक हैं।


























































