क्या कैंसर अचानक होता है?
कैंसर एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जिसे पूर्णतः समझना और समय रहते पहचानना आम जनता के लिए आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई बार पूरी तरह से स्वस्थ, फिट और अनुशासित जीवनशैली जीने वाले व्यक्तियों को भी अचानक तीसरी (Stage 3) या चौथी (Stage 4) स्टेज के कैंसर का निदान (Diagnosis) होता है। ऐसी स्थिति में हर व्यक्ति के मन में यह यक्ष प्रश्न उठता है कि “क्या कैंसर रातों-रात या अचानक होता है?”
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, कैंसर कभी भी एक दिन, एक सप्ताह या अचानक उत्पन्न नहीं होता। यह प्रक्रिया हमारे शरीर की कोशिकाओं (Cells) में वर्षों से धीरे-धीरे होने वाले असामान्य और सूक्ष्म बदलावों का परिणाम होती है।
दिल्ली स्थित अपोलो हॉस्पिटल्स के वरिष्ठ कंसल्टेंट (हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजी) डॉक्टर अक्षत मलिक के अनुसार, हमारे शरीर में कैंसर की उत्पत्ति और विकास में लंबा समय लगता है। समय-समय पर नियमित कैंसर स्क्रीनिंग (Screening) कराने से इस खतरे को प्रारंभिक अवस्था में ही पहचाना और टाला जा सकता है। यदि शरीर में कोई भी असामान्य लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। समय पर सटीक इलाज मिलने से कैंसर से पूरी तरह ठीक होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
कैंसर क्या है और यह शरीर में कैसे फैलता है?
डॉक्टर अक्षत मलिक के अनुसार, कैंसर को गहराई से समझने के लिए शरीर की कोशिकीय संरचना (Cellular Structure) को समझना आवश्यक है:
- अनियंत्रित कोशिकीय वृद्धि: सामान्य अवस्था में हमारे शरीर की कोशिकाएं एक नियंत्रित नियम के तहत विभाजित होती हैं, पुरानी कोशिकाएं नष्ट होती हैं और नई कोशिकाएं बनती हैं। परंतु कैंसर की स्थिति में शरीर की कुछ कोशिकाएं इस प्राकृतिक नियंत्रण से बाहर होकर असामान्य और अनियंत्रित रूप से विभाजित होने लगती हैं।
- ट्यूमर (गांठ) का निर्माण: ये अत्यधिक बढ़ी हुई कोशिकाएं एकत्र होकर एक गांठ या ट्यूमर (Tumor) का रूप ले लेती हैं।
- कैंसरस बनाम नॉन-कैंसरस ट्यूमर: यह ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है कि शरीर की हर गांठ या ट्यूमर कैंसर नहीं होता। कई ट्यूमर ‘नॉन-कैंसरस’ (Benign) होते हैं, जो शरीर के अन्य भागों में नहीं फैलते। वहीं, ‘कैंसरस’ (Malignant) ट्यूमर की कोशिकाएं धीरे-धीरे आसपास के उत्तकों और रक्त या लसिका (Lymph) प्रवाह के माध्यम से शरीर के अन्य दूरस्थ अंगों तक फैल जाती हैं।
कैंसर उत्पन्न होने के मुख्य कारण एवं जोखिम कारक
आम जनमानस में यह भ्रम रहता है कि कैंसर का कोई एक निश्चित कारण है। डॉक्टर्स और ऑन्कोलॉजिस्ट्स की मानें तो कैंसर किसी एक वजह से नहीं, बल्कि जीवनशैली, आनुवंशिक, जैविक और पर्यावरणीय कारकों के जटिल जुड़ाव से होता है। मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. आनुवंशिक बदलाव (Genetic Mutations)
कोशिकाओं के डीएनए (DNA) में होने वाले म्यूटेशन या गड़बड़ी के कारण कैंसर का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है। डीएनए में यह बदलाव कुछ लोगों में जन्मजात (वंशानुगत) हो सकते हैं, जबकि अधिकांश लोगों में उम्र और बाहरी कारकों के कारण समय के साथ विकसित होते हैं।
2. तंबाकू और धूम्रपान का सेवन
कैंसर के सबसे प्रमुख और रोके जा सकने वाले कारणों में सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, खैनी और तंबाकू चबाने की आदत शामिल है। यह मुंह, गले, फेफड़े, भोजन नली और मूत्राशय के कैंसर का सबसे बड़ा कारण बनता है।
3. असंतुलित एवं अनहेल्दी लाइफस्टाइल
लंबे समय तक खराब जीवनशैली अपनाना कैंसर के जोखिम को न्योता देता है। शारीरिक गतिविधि का अभाव, गतिहीन जीवनशैली, मोटापा, अत्यधिक जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन शरीर में सूजन (Inflammation) और कोशिकीय क्षति को बढ़ाता है।
4. अत्यधिक शराब (अल्कोहल) का सेवन
जो लोग नियमित या अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन करते हैं, उनमें लिवर, भोजन नली, स्तन और आंतों का कैंसर होने की संभावना सामान्य लोगों की तुलना में काफी अधिक होती है।
5. गंभीर वायरल व बैक्टीरियल संक्रमण
शरीर में कुछ दीर्घकालिक इंफेक्शन भी कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं। उदाहरण के लिए:
- हेपेटाइटिस बी एवं सी: लिवर कैंसर का जोखिम बढ़ाते हैं।
- एचआईवी (HIV): प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर विभिन्न कैंसर का कारण बनता है।
- हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (H. pylori): पेट के कैंसर का खतरा उत्पन्न करता है।
6. पर्यावरणीय व औद्योगिक कारक
प्रदूषित वातावरण में लंबे समय तक रहना भी कैंसर का मुख्य कारण बन रहा है। अत्यधिक वायु प्रदूषण, विषैले रसायनों (जैसे एस्बेस्टस), हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों और अत्यधिक रेडिएशन के संपर्क में रहने से कोशिकाओं का डीएनए क्षतिग्रस्त हो जाता है।
7. बढ़ती उम्र एवं पारिवारिक इतिहास
उम्र बढ़ने के साथ-साथ शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत करने की क्षमता घटने लगती है, जिससे बुजुर्गों में कैंसर का जोखिम बढ़ता है। इसके अतिरिक्त, यदि परिवार में माता-पिता या भाई-बहन को कैंसर रहा हो, तो आनुवंशिक रूप से इसका खतरा बढ़ जाता है।
कैंसर से बचाव और नियमित स्क्रीनिंग का महत्व
यदि आपकी उम्र अधिक है, वजन नियंत्रित नहीं है, तंबाकू या शराब का सेवन करते हैं, या परिवार में कैंसर का इतिहास रहा है—तो आपको सतर्क रहने की आवश्यकता है। कैंसर से बचाव के लिए निम्नलिखित कदम उठाएं:
- नियमित हेल्थ चेकअप व स्क्रीनिंग: मैमोग्राफी, पैप स्मीयर, बायोप्सी या सीटी स्कैन जैसी जांचों से शुरुआती दौर में ही कैंसर की पहचान संभव है।
- संतुलित जीवनशैली: दैनिक आहार में हरी सब्जियां, ताजे फल और एंटी-ऑक्सीडेंट्स शामिल करें तथा नियमित व्यायाम करें।
- व्यसनों से दूरी: तंबाकू, सिगरेट और शराब का पूर्णतः त्याग करें।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या, लक्षण या उपचार के लिए हमेशा अपने विशेषज्ञ डॉक्टर या ऑन्कोलॉजिस्ट से परामर्श लें।
















































