लखनऊ में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय एकता और देश की अखंडता को लेकर अपनी बात रखी। वह सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत की एकता को चुनौती देने के लिए कुत्सित प्रयास किए जा रहे हैं और इनका सामना देशवासियों को एकजुट होकर करना होगा। मुख्यमंत्री ने 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिन को देशभर में राष्ट्रीय एकता के कार्यक्रमों के आयोजन से जोड़ने का आह्वान किया था। उन्होंने सरदार पटेल को भारत माता का महान सपूत और प्रखर राष्ट्रवादी नेतृत्वकर्ता बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। योगी ने कहा कि लौहपुरुष की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखना और उनके बताए रास्ते पर राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना ही उनके प्रति सच्चा सम्मान है।
देश की 563 से अधिक रियासतों का एकीकरण कर बनाया भारतीय गणराज्य: मुख्यमंत्री ने आजादी के बाद देश के सामने मौजूद रियासतों के एकीकरण की चुनौती का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने 563 से अधिक रियासतों को भारतीय गणराज्य का हिस्सा बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। योगी ने गुजरात के केवड़िया में नर्मदा नदी के तट पर सरदार सरोवर के पास स्थापित पटेल की विशाल प्रतिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लौहपुरुष की स्मृतियों को स्थायी रूप से जीवंत रखने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा स्थापित कराई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह प्रतिमा पटेल के विराट व्यक्तित्व और देश को एक सूत्र में बांधने के उनके योगदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आजादी के समय जूनागढ़ और हैदराबाद जैसी रियासतों ने भारत में शामिल होने को लेकर आनाकानी की थी, लेकिन सरदार पटेल ने दृढ़ता के साथ इस चुनौती का सामना किया और देश के एकीकरण का काम आगे बढ़ाया।
जूनागढ़ का नवाब पाकिस्तान भागा, हैदराबाद के निजाम को भी छोड़ना पड़ा क्षेत्र: योगी आदित्यनाथ ने जूनागढ़ के नवाब और हैदराबाद के निजाम का उदाहरण देकर सरदार पटेल के फैसलों और दृढ़ रुख का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जूनागढ़ के नवाब ने भारत में शामिल होने से इनकार किया था। उस समय सरदार पटेल ने उन्हें चेतावनी दी थी कि केवल बातचीत से बात नहीं बनी तो दूसरा रास्ता भी अपनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इसके बाद नवाब अपने बच्चों तक को छोड़कर पाकिस्तान भाग गया और जूनागढ़ भारत का हिस्सा बन गया। हैदराबाद के निजाम पर टिप्पणी करते हुए योगी ने आरोप लगाया कि वहां हिंदुओं, सिखों, बौद्धों और जैनियों का व्यापक कत्लेआम कराया गया तथा उनका धर्मांतरण करवाया गया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल की चेतावनी के बाद निजाम को भी वहां से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हैदराबाद समेत उसके अधीन आने वाले सभी क्षेत्र आज भारत का हिस्सा हैं। उनके अनुसार, इन घटनाओं से देश के एकीकरण में पटेल की भूमिका का महत्व स्पष्ट होता है।
नेहरू के फैसले और अनुच्छेद 370 पर उठाए सवाल: कश्मीर के मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कश्मीर को नेहरू ने अपने पास रखा था और बाद में कबायली हमले के दौरान उसका एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया। योगी ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हिंदुओं, सिखों, बौद्धों और जैनियों का व्यापक कत्लेआम हुआ और वहां इन समुदायों की आबादी बहुत कम रह गई। उन्होंने आरोप लगाया कि शेष कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू करने का फैसला जवाहरलाल नेहरू ने लिया था, जबकि डॉ. भीमराव आंबेडकर इसका विरोध कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने इस फैसले को कांग्रेस की गलती बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370 को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया। योगी के अनुसार, इस कदम के बाद कश्मीर को उसी तरह भारत का हिस्सा बनाया गया, जैसे लखनऊ और उत्तर प्रदेश हैं। उन्होंने इसे सरदार पटेल और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सहित स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के सपने की पूर्ति बताया।
एक देश में दो कानून नहीं चलेंगे, एक प्रधान और एक निशान की व्यवस्था: मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में अब दो कानून नहीं चलेंगे और देश में एक प्रधान, एक विधान तथा एक निशान ही रहेगा। उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जिस राष्ट्रीय एकता की कल्पना की थी, उसे साकार करने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और अमित शाह की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। योगी ने कहा कि अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों के समान रूप में जोड़ा गया है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि राष्ट्रीय एकता के इस संकल्प को मजबूत करने में सभी अपनी भूमिका निभाएं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि देश की एकता को नुकसान तब पहुंचता है, जब समाज जाति और क्षेत्र के नाम पर बंट जाता है। जातिवाद, क्षेत्रवाद और भाषावाद जैसी प्रवृत्तियां समाज की सामूहिक शक्ति तथा प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करती हैं। उनके मुताबिक, कमजोर समाज बाहरी आक्रमणों के सामने भी अधिक असुरक्षित हो जाता है।
जिन्ना को आदर्श मानने वालों पर टिप्पणी, राष्ट्रवाद को बताया पटेल की पहचान: योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो लोग मोहम्मद अली जिन्ना को अपना आदर्श मानते हैं, वे सरदार वल्लभभाई पटेल के अनुयायी नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि लौहपुरुष का सच्चा अनुयायी वही है जिसके भीतर राष्ट्रवाद की भावना हो और जो भारत, उसकी एकता, सुरक्षा तथा संप्रभुता को सबसे ऊपर रखता हो। मुख्यमंत्री ने विभाजनकारी सोच और समाज को बांटने वाले तत्वों की आलोचना करते हुए कहा कि जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर समाज को बांटना राष्ट्रीय एकता के लिए नुकसानदेह है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत की संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करने और देश की एकता तथा अखंडता को चुनौती देने के प्रयास किए जा रहे हैं। योगी ने कहा कि इन सभी चुनौतियों का मुकाबला मिलकर करना होगा। उनके अनुसार, सरदार पटेल की जयंती पर देशवासियों का यही संकल्प होना चाहिए कि वे आपसी विभाजन से ऊपर उठकर राष्ट्र की एकता और संप्रभुता की रक्षा करें।














































