सीबीएस की नई रिपोर्ट सामने आने के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में एक बहुत बड़ी आर्थिक हलचल देखने को मिली है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत अचानक छियासी अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर को पार कर गई है। कीमतों में इस भारी उछाल के कारण पूरे वैश्विक ऊर्जा बाजार में सप्लाई और महंगाई को लेकर चिंता बहुत ज्यादा बढ़ गई है। ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित अमेरिकी हमले की खबरों ने तेल व्यापारियों और निवेशकों के बीच भारी दहशत पैदा कर दी है। अगर यह सैन्य संघर्ष आगे और भी लंबा खिंचता है तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतें और भी अधिक आसमान छू सकती हैं।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर असर लगातार बढ़ते इस सैन्य तनाव का सीधा और नकारात्मक असर दुनिया भर के साथ-साथ खुद अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है। तेल की कीमतों में तेजी आने से अमेरिका में आम नागरिकों के लिए ईंधन की लागत पहले से काफी अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों और आवास की लागत में भी भारी उछाल आने से महंगाई की दर में इजाफा होने का खतरा मंडरा रहा है। इसी साल नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले किए गए विभिन्न जनमत सर्वेक्षणों में जनता का गुस्सा साफ तौर पर देखने को मिला है। बड़ी संख्या में मतदाताओं ने अर्थव्यवस्था और युद्ध से जुड़े मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन के कामकाज को लेकर अपना भारी असंतोष जताया है।
संघर्ष की शुरुआती पृष्ठभूमि मध्य-पूर्व में जारी इस खूनी संघर्ष और सैन्य तनाव की असल शुरुआत इसी साल अट्ठाईस फरवरी की एक बड़ी घटना के बाद हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक अट्ठाईस फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के ठिकानों पर संयुक्त रूप से बड़े सैन्य हमले किए थे। इन शुरुआती हमलों के बाद ही पूरे क्षेत्र में राजनीतिक और सैन्य तनाव लगातार एक खतरनाक स्तर तक बढ़ता चला गया। इन हमलों के जवाब में ईरान ने भी अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए कई आक्रामक और उकसावे वाले कदम उठाए। तब से लेकर आज तक दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य टकराव जारी है और शांति की कोई भी उम्मीद फिलहाल नजर नहीं आ रही है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य हुआ बंद अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों की जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने एक बहुत ही बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया था। ईरान ने दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह बंद कर दिया। इस अहम जलमार्ग के बंद होने से दुनिया भर में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक की समुद्री सप्लाई पूरी तरह से रुक गई है। इसके अलावा ईरान ने अपनी आक्रामकता दिखाते हुए फारस की खाड़ी के कई अरब देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले भी किए। इन लगातार हो रहे हमलों के कारण खाड़ी देशों में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों पर बहुत ही गंभीर और विनाशकारी असर पड़ा है।
समुद्री जहाजों पर ड्रोन हमले इस हफ्ते यह पूरा सैन्य संघर्ष तब और भी ज्यादा बढ़ गया जब व्यापारिक समुद्री जहाजों को सीधा निशाना बनाया जाने लगा। मिस्र के दमियेट्टा बंदरगाह पर तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी ले जा रहे दो अहम जहाजों पर खतरनाक ड्रोन हमले किए गए। इन ड्रोन हमलों के कारण समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत बड़ी बहस और चिंता खड़ी हो गई है। जहाजों को निशाना बनाए जाने से ऊर्जा सप्लाई चेन बुरी तरह से बाधित हुई है और इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह युद्ध अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे विश्व व्यापार को प्रभावित कर रहा है।
हथियारों के भंडार में कमी इस लगातार खिंचते जा रहे सैन्य संघर्ष के कारण अमेरिकी सेना के सामने एक नई और बड़ी रसद संबंधी चुनौती खड़ी हो गई है। मौजूदा युद्ध में अत्यधिक इस्तेमाल के कारण अमेरिकी सेना के हथियारों का विशाल भंडार अब धीरे-धीरे काफी कम होता जा रहा है। विशेष रूप से सैन्य ठिकानों की हवाई सुरक्षा में इस्तेमाल होने वाले एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की संख्या चिंताजनक रूप से घट गई है। हथियारों की इस भारी कमी ने अमेरिकी रक्षा विभाग और सैन्य रणनीतिकारों की चिंताओं को कई गुना अधिक बढ़ा दिया है। यदि यह युद्ध आगे भी जारी रहता है तो अमेरिका को अपने सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।


























































