राम मंदिर के निर्माण कार्य को लेकर मंदिर से जुड़े एक पूर्व इंजीनियर ने बहुत ही गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पूर्व इंजीनियर का नाम दीनानाथ वर्मा है जिन्होंने वित्तीय अनियमितताओं का एक बड़ा खुलासा किया है। दीनानाथ वर्मा के स्पष्ट दावों के मुताबिक मंदिर निर्माण के पवित्र कार्य में जमकर कमीशनखोरी की गई है। उनका यह भी कहना है कि राम के पावन नाम पर कुछ लोगों द्वारा बहुत सारा पैसा खाया गया है। इन आरोपों ने मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया और पारदर्शिता पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
निर्माण के समय से हेराफेरी: दीनानाथ वर्मा का स्पष्ट आरोप है कि चढ़ावे में चोरी का यह बड़ा खेल तो अब जाकर शुरू हुआ है। लेकिन पैसों की भारी हेराफेरी और कमीशनखोरी का सिलसिला तो मंदिर निर्माण शुरू होने के साथ ही प्रारंभ हो गया था। उनके अनुसार शुरुआती दिनों से ही वित्तीय मामलों में ईमानदारी का पूरी तरह से अभाव रखा गया था। इस कारण निर्माण कार्य के दौरान ही कई करोड़ रुपयों का हेरफेर बड़ी ही आसानी से कर लिया गया। पूर्व इंजीनियर का यह बयान इस पूरे घोटाले को एक नया और बेहद गंभीर आयाम प्रदान कर रहा है।
वित्तीय जिम्मेदारी पर कड़े सवाल: पूर्व इंजीनियर ने अपनी शिकायत में एक प्रमुख पदाधिकारी अनिल मिश्रा का नाम बहुत ही विशेष रूप से लिया है। उन्होंने दावा किया है कि अनिल मिश्रा को ही मंदिर के सभी महत्वपूर्ण वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी दी गई थी। इस अहम जिम्मेदारी का अनुचित फायदा उठाते हुए उन्होंने हर एक काम में अपना कमीशन लेना शुरू कर दिया था। दीनानाथ वर्मा ने अनिल मिश्रा पर सीधे-सीधे हर काम में 40% का भारी कमीशन लेने का आरोप लगाया है। इतने बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी की बात सामने आने के बाद पूरी वित्तीय प्रणाली सवालों के घेरे में है।
पूछताछ का एक लंबा दौर: इन सभी संगीन आरोपों को संज्ञान में लेते हुए जांच एजेंसी एसआईटी ने तुरंत अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। एसआईटी की टीम ने आरोपी बनाए गए अनिल मिश्रा को तलब किया और उनसे विस्तृत पूछताछ शुरू की। जांच अधिकारियों द्वारा अनिल मिश्रा से करीब 3 घंटे तक लगातार और बेहद कड़ाई से पूछताछ की गई है। इस पूछताछ के दौरान जांच टीम ने वित्तीय लेन-देन और कमीशन के दावों को लेकर कई कड़े सवाल पूछे। इस लंबी पूछताछ के आधार पर जांच दल अब घोटाले की कई अन्य कड़ियों को जोड़ने में लगा हुआ है।
मौखिक आदेशों का अनुचित खेल: अनिल मिश्रा से हुई इस लंबी पूछताछ के दौरान कई प्रशासनिक खामियों का भी बहुत बड़ा पर्दाफाश हुआ है। जांच दल ने पाया कि पूरे प्रबंधन में किसी भी तरह के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पालन नहीं हो रहा था। सबसे हैरानी की बात यह है कि कर्मचारियों को उनकी निश्चित जिम्मेदारियां आधिकारिक रूप से आवंटित ही नहीं की गई थीं। मंदिर से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण कार्य सिर्फ बड़े अधिकारियों के मौखिक आदेशों पर ही संचालित हो रहे थे। इसी लचर व्यवस्था का अनुचित लाभ उठाकर भ्रष्टाचार के इस बड़े खेल को अंजाम दिया गया।
आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई: इन सभी वित्तीय अनियमितताओं के सामने आने के बाद अब जांच एजेंसी एसआईटी काफी ज्यादा सतर्क हो गई है। इस समय चढ़ावा चोरी के मामले में लवकुश मिश्रा पहले से ही जांच एजेंसी की सख्त हिरासत में मौजूद है। इसके अलावा करोड़ों के गबन के मुख्य आरोपी टिन्नू यादव पर भी बहुत जल्द ही बड़ा एक्शन लिया जाएगा। एसआईटी के सामने अब इन सभी मौखिक आदेशों और वित्तीय हेराफेरी के ठोस सबूत जुटाने की सबसे बड़ी चुनौती है। इन सभी चुनौतियों से निपटते हुए तीन सदस्यों की यह टीम आगे भी अन्य पदाधिकारियों से अपनी पूछताछ जारी रखेगी।





































