दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने इस चंदा चोरी के मामले को लेकर सत्ताधारी पार्टी पर बहुत बड़ा सियासी हमला बोला है। उन्होंने अयोध्या में अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि चंदा चोरी में बड़े-बड़े रक्षक पूरी तरह से शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर के नाम का गलत इस्तेमाल करके एक पार्टी सत्ता के शीर्ष पर आई है। उनके मुताबिक जिन लोगों ने चोरी की है, दुर्भाग्य से उन्हीं को इस मामले में कार्रवाई भी करनी पड़ रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि एफआईआर में केवल छोटे प्यादों के नाम हैं और किसी बड़े व्यक्ति पर कार्रवाई नहीं हुई।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव का तंज: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी इस एफआईआर और जांच प्रक्रिया पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि इस सरकार में केवल फुनगी को फांसी और शाखाओं को माफी मिल रही है। उनका आरोप है कि पुलिस और जांच एजेंसियों ने पहले ही यह तय कर लिया था कि किन बड़ी मछलियों को बचाना है। उन्होंने कहा कि पहले सबूतों को मिटाया गया और फिर अपने मनमुताबिक रिपोर्ट बनाकर यह कार्रवाई का नाटक किया जा रहा है। उनके अनुसार जनता सब समझती है और वह जानती है कि असली चोरों को बचाने का काम किया जा रहा है।
चंपत राय की गिरफ्तारी की मांग: इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद कई लोगों ने ट्रस्ट के महासचिव को लेकर बड़े सवाल उठाए हैं। प्रमुख संत कंप्यूटर बाबा ने आरोप लगाया है कि महासचिव ने पहले जमीन घोटाला किया और अब चंदा चोरी हुई है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि राम मंदिर करोड़ों सनातनियों की आस्था का केंद्र है, इसलिए संतों को ही इसकी जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। हालांकि दर्ज हुई एफआईआर में ट्रस्ट के महासचिव या किसी अन्य बड़े पदाधिकारी का नाम बिल्कुल भी शामिल नहीं है।
सत्ता पक्ष और भाजपा का पलटवार: विपक्ष के इन गंभीर आरोपों के बीच केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने भी अपना कड़ा बचाव किया है। केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा ने कहा कि मामले की जांच चल रही है और जो भी दोषी होगा उसे कतई नहीं बख्शा जाएगा। उन्होंने सपा प्रमुख पर तंज कसते हुए कहा कि जब कारसेवकों पर गोलियां चली थीं तब उन्हें भगवान राम की याद नहीं आई थी। भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने भी स्पष्ट किया कि रामलला के मंदिर से चोरी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि इस पूरी घटना के पीछे जो भी लोग शामिल हैं, उन सभी को जल्द ही पकड़ा जाएगा।
विहिप ने बताया चुनावी एजेंडा: विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष ने विपक्ष के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल इस धार्मिक मुद्दे को आगामी सत्ताईस के विधानसभा चुनाव का एजेंडा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मानना है कि यूपी पुलिस इस पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच करने में पूरी तरह से सक्षम है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर सीबीआई जांच होती तो प्रक्रिया और भी ज्यादा लंबी और जटिल हो जाती। उनका दावा है कि राजनीतिक लाभ लेने के लिए ही विपक्षी दल इस तरह की बेबुनियाद बयानबाजी कर रहे हैं।
भक्तों की आस्था को पहुंची ठेस: इस करोड़ों रुपये की चंदा चोरी के खुलासे से राम भक्तों और आम जनता की आस्था को गहरी ठेस पहुंची है। अयोध्या के संतों का कहना है कि यह पूरा मामला सीधे तौर पर भगवान राम के भक्तों की मनोदशा को पीड़ित करने वाला है। लोगों की भारी मांग है कि आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले इन सभी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। प्रशासन ने भी यह साफ कर दिया है कि वह सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत इस मामले में कठोर कार्रवाई करेगा। पूरे देश की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस चोरी में शामिल अन्य लोगों तक कानून के हाथ पहुंच पाएंगे।





































