अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा मांगे जा रहे वित्तीय मुआवजे का कड़ा जवाब देते हुए एक नया कूटनीतिक दांव चला है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका ईरान को किसी भी प्रकार का कोई मुआवजा या भुगतान नहीं देने वाला है। इसके विपरीत, ट्रंप ने यह स्पष्ट मांग रखी है कि इस युद्ध और पुराने संघर्षों में हुए भारी नुकसान की भरपाई करने के लिए ईरान को ही अमेरिका को मुआवजा देना चाहिए। ट्रंप का यह बयान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर दोनों देशों के बीच चल रहे भारी तनाव के बीच आया है।
पुराने हमलों और हताहतों का किया जिक्र: ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर अपनी पोस्ट में ईरान पर तीखा हमला बोलते हुए पुराने जख्मों को कुरेदा है। उन्होंने उन सभी अमेरिकियों के लिए मुआवजे की मांग की है जिन्हें ईरान ने अपने रोडसाइड बमों और अन्य सैन्य कार्रवाइयों के जरिए मारा या गंभीर रूप से घायल किया है। इस कड़ी में ट्रंप ने विशेष तौर पर जनरल कासिम सुलेमानी का नाम लिया है। ट्रंप ने याद दिलाया कि यूएसएस कोल (USS Cole) पर हुए जानलेवा हमले में मारे गए लोगों के परिवारों को भी न्याय और उचित मुआवजा मिलना बाकी है।
मानवाधिकार हनन का उठाया कड़ा मुद्दा: अमेरिकी सैनिकों के नुकसान के अलावा ट्रंप ने ईरान के भीतर हुए मानवाधिकार हनन का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में उल्लेख किया है कि उन लाखों बेगुनाह ईरानी प्रदर्शनकारियों के परिवारों को भी मुआवजा दिया जाना चाहिए जिन्हें वहां की सरकार ने पिछले 50 सालों में बेरहमी से मारा है। साथ ही, ट्रंप ने दावा किया कि पिछले केवल पांच महीनों के संघर्ष में ही लगभग 52,000 लोग मारे जा चुके हैं, जिनकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर ईरान पर आती है। यह बयान ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
अधिकारियों को ट्रंप के सख्त निर्देश: डोनाल्ड ट्रंप ने मुआवजे के इस मुद्दे को केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रखा है बल्कि इसे कूटनीतिक स्तर पर भी लागू करने की तैयारी कर ली है। उन्होंने अपने प्रशासन और राजनयिक प्रतिनिधियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे भविष्य में ईरान के साथ होने वाली किसी भी तरह की बातचीत या समझौते में इस मुआवजे की मांग को पूरी मज़बूती के साथ सामने रखें। अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जब भी बातचीत की मेज पर दोनों देश बैठें, तो अमेरिकी हताहतों का मुद्दा सबसे ऊपर रहे।
बिना समझौते के संघर्ष समाप्ति के संकेत: इन कड़े बयानों और मुआवजे की मांगों के बीच कूटनीतिक हलचल भी तेज है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपी एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप अपने करीबी अधिकारियों को कुछ अलग संकेत भी दे चुके हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में व्यापारिक और समुद्री यातायात को पूरी तरह से बहाल कर देता है, तो अमेरिका परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए बिना भी इस मौजूदा सैन्य संघर्ष को समाप्त करने का कोई मध्य मार्ग तलाश सकता है। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका अभी भी व्यापारिक सुरक्षा को सर्वोपरि मान रहा है।
गतिरोध बरकरार, दोनों पक्षों से आ रहे बयान: फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है और दोनों ओर से तरह-तरह के राजनीतिक और रणनीतिक बयान लगातार आ रहे हैं। एक तरफ जहां ट्रंप ने नाकाबंदी को ‘स्टील की दीवार’ बताते हुए अपना पूरा नियंत्रण घोषित कर दिया है, वहीं ईरान भी अरबों डॉलर और अमेरिकी सैनिकों की वापसी जैसी अपनी कड़ी मांगों पर अड़ा हुआ है। इन सब के बावजूद, अभी तक किसी भी ठोस शांति समझौते या कूटनीतिक समाधान पर नहीं पहुंचा जा सका है, जिससे पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल लगातार बना हुआ है।


























































