पेंटागन ने मिडिल-ईस्ट की मौजूदा स्थिति पर अपना एक बहुत ही महत्वपूर्ण सैन्य बयान जारी किया है। पेंटागन के मुताबिक अमेरिका की तरफ से यह मिलिट्री ऑपरेशन जॉर्डन में अपने एयरबेस पर हुए मिसाइल हमले के बाद शुरू किया गया था। जॉर्डन में हुए उस भीषण मिसाइल हमले में कुल दो अमेरिकी सैनिक मौके पर ही मारे गए थे। उस हमले के बाद अमेरिकी सेना का एक सैनिक अचानक लापता भी हो गया था। इसके अलावा 4 अन्य घायल अमेरिकी सैनिकों को इलाज के लिए तुरंत हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा था।
अमेरिकी कार्रवाई का मकसद: अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इन जवाबी सैन्य हमलों के पीछे के रणनीतिक उद्देश्यों को विस्तार से स्पष्ट किया है। उनके मुताबिक इन जवाबी पलटवार का मुख्य मकसद ईरान के आईआरजीसी (IRGC) को उनके किए की तेजी से कड़ी सजा देना था। अमेरिका ने यह कदम ईरान की बढ़ती आक्रामक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए उठाया है। अमेरिकी सेना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Strait of Hormuz से तेल टैंकरों के आवागमन को सुरक्षित बनाना चाहती है। अमेरिका इस रास्ते में तेल टैंकरों को रोकने की ईरान की ताकत को हर हाल में कम करना चाहता है।
ईरानी सैन्य क्षमता पर चोट: अमेरिकी सेंट्रल कमांड के रणनीतिकारों का मानना है कि ईरान लगातार अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में तेल के जहाजों के लिए खतरा पैदा कर रहा है। इसलिए अमेरिका इन हवाई हमलों के जरिए ईरान की वास्तविक सैन्य ताकत को काफी हद तक कम करना चाहता है। अमेरिका की योजना ईरान के प्रमुख सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को तबाह कर उसे कमजोर करने की है। इसी बड़े उद्देश्य को पूरा करने के लिए अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के अंदर घुसकर कई ठिकानों पर बमबारी की थी। इस अमेरिकी कार्रवाई ने दोनों देशों के बीच जंग को और तेज कर दिया।
कुवैत में जवाबी हमला: ईरान ने अपनी जमीन पर हुए अमेरिकी हमलों का बदला लेने में बिल्कुल भी देर नहीं लगाई। उसने शनिवार और रविवार की दरमियानी रात को ही कुवैत में बने अमेरिकी ठिकानों को अपने निशाने पर ले लिया। ईरान ने कुवैत के कैंप उदैरी में अमेरिकी फौज के गोला-बारूद डिपो पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। इन हमलों के लिए ईरान ने अपने विशेष रूप से तैयार किए गए टारगेटेड ड्रोन का इस्तेमाल किया। इन ड्रोन ने अमेरिकी गोला-बारूद के डिपो पर सटीक निशाना साधकर वहां भीषण तबाही मचा दी।
तकनीकी तंत्र पर हमला: गोला-बारूद डिपो को नष्ट करने के साथ ही ईरान ने अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली को भी निशाना बनाया। कुवैत के अली अल सलेम एयरबेस पर तैनात पैट्रियट रडार सिस्टम पर ईरान ने घातक प्रहार किया। इसके अलावा वहां मौजूद एयर सर्विलांस रडार के विरुद्ध भी आत्मघाती ड्रोन से बड़े पैमाने पर अटैक किया गया। इन आत्मघाती ड्रोन हमलों के कारण अमेरिकी सेना की पैट्रियट मिसाइल प्रणाली का रडार पूरी तरह से ठप हो गया। ईरान के इस दोहरे हमले ने कुवैत में अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी।
नागरिक संपत्तियों को नुकसान: कुवैत में हुए इस भयंकर सैन्य टकराव में केवल सैन्य संपत्तियों को ही नुकसान नहीं पहुंचा है। ईरान की सेना ने इस मिलिट्री एक्शन के दौरान कुवैत में आम लोगों की संपत्तियों को भी भारी क्षति पहुंचाई। इसके साथ ही वहां के ऊर्जा से जुड़े महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी ड्रोन हमलों से काफी नुकसान हुआ है। इस संघर्ष के शुरू होने के बाद से अब तक मध्य-पूर्व के इलाके में 16 अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ 430 से ज्यादा जवान इस युद्ध में अब तक घायल हो चुके हैं।

























































