अयोध्या के राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी मामले ने अब एक बहुत ही गंभीर रूप ले लिया है। इस बड़े चोरी मामले की जांच अब एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी द्वारा तेजी से की जा रही है। पुलिस की मुस्तैदी से इस मामले में अब तक चोरी करने के आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उसके भतीजे मनीष यादव को पुलिस ने अपनी रिमांड में ले लिया है। इन दोनों अहम आरोपियों से पुलिस रिमांड में फिलहाल बहुत ही कड़ाई से लगातार पूछताछ की जा रही है।
भ्रष्टाचार से खराब हुई छवि: चोरी की इन घटनाओं के बीच निर्मोही अखाड़ा ने भी मंदिर ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार को लेकर कड़ा प्रहार किया है। अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि ट्रस्ट के कुछ सदस्यों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। इन सभी नकारात्मक घटनाओं और भ्रष्टाचार के आरोपों से राम मंदिर की शानदार छवि पर बहुत गहरा असर पड़ा है। इसी वजह से अखाड़े ने राम मंदिर ट्रस्ट के सभी वित्तीय लेन-देन का एक निष्पक्ष फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है। अखाड़े का मानना है कि फोरेंसिक ऑडिट होने से ट्रस्ट के वित्तीय मामलों में पूरी तरह से पारदर्शिता आ सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट से न्याय की गुहार: निर्मोही अखाड़ा ने अपनी इन सभी चिंताओं को लेकर नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अखाड़े ने अपनी नई याचिका में दावा किया है कि साल 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सही पालन नहीं हुआ है। फैसले के करीब सात साल बीत जाने के बाद भी अखाड़े को उसके उचित कानूनी अधिकार नहीं मिल पाए हैं। याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन तो कर दिया है। लेकिन इस ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को उचित जगह और उसका सही प्रतिनिधित्व बिल्कुल भी नहीं दिया गया है।
अयोग्य लोगों को शामिल करने का आरोप: निर्मोही अखाड़ा ने मौजूदा ट्रस्ट के सदस्यों की योग्यता पर भी बहुत बड़े और गंभीर सवाल खड़े किए हैं। याचिका के मुताबिक ट्रस्ट में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है जिनका राम जन्मभूमि से कोई संबंध नहीं है। इन सदस्यों का राम मंदिर से कोई भी ऐतिहासिक, धार्मिक या फिर कानूनी नाता कभी नहीं रहा है। अखाड़े का स्पष्ट कहना है कि किसी भी मंदिर का संचालन उसके पारंपरिक सेवायत के बिना सफलतापूर्वक नहीं हो सकता है। इसलिए ट्रस्टियों की नई नियुक्ति के लिए एकदम साफ नियम बनने चाहिए और सही लोगों का चयन होना चाहिए।
स्वतंत्र समिति की विशेष मांग: मंदिर के सुचारू संचालन और पुराने आदेशों के पालन के लिए अखाड़े ने एक नई समिति की मांग की है। अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट से 2019 के फैसले के पालन की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में दोबारा गठित करने की मांग की गई है। अखाड़े ने यह भी मांग की है कि मंदिर में श्री रामलला विराजमान की मूल मूर्तियों को फिर से स्थापित किया जाए। अखाड़ा चाहता है कि मंदिर में सभी पूजा, सेवा और भोग केवल रामानंदी परंपरा के अनुसार ही विधिवत कराए जाएं।
ट्रस्ट डीड में संशोधन का आग्रह: निर्मोही अखाड़ा ने कानूनी रूप से ट्रस्ट डीड में कुछ जरूरी बदलाव करने की भी कोर्ट से अपील की है। अखाड़े ने कोर्ट से आग्रह किया है कि वह केंद्र सरकार को इस ट्रस्ट डीड में उचित संशोधन करने का कड़ा निर्देश दे। रामानंदी बैरागी संप्रदाय के सदस्यों वाले एक निगरानी बोर्ड को भी न्यासी मंडल में शामिल करने की बात कही गई है। इससे मंदिर के दैनिक कामकाज और वित्तीय लेन-देन पर एक सही और पारदर्शी निगरानी रखी जा सकेगी। इसके अलावा ट्रस्टियों का चयन केवल उच्च सत्यनिष्ठा वाले उन लोगों में से होना चाहिए जिनका रामानंदी परंपराओं से संबंध हो।

























































