निर्जला एकादशी सनातन धर्म के सबसे कठिन और पुण्यकारी व्रतों में से एक है। साल 2026 में यह पवित्र व्रत 25 जून को रखा जाएगा। ज्येष्ठ मास की झुलसाने वाली गर्मी और 45 डिग्री के तापमान में बिना एक बूंद जल ग्रहण किए 24 घंटे का व्रत रखना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब पांडु पुत्र भीमसेन साल की सभी 24 एकादशियों का व्रत करने में असमर्थ थे, तब महर्षि वेदव्यास जी ने उन्हें केवल इस एक व्रत को रखने की सलाह दी थी। मान्यता है कि इस एक व्रत को करने से पूरे वर्ष की एकादशियों का पुण्य प्राप्त हो जाता है।
लेकिन इस जानलेवा धूप में अपनी आस्था को सुरक्षित रखने और सेहत को बिना नुकसान पहुंचाए व्रत को पूरा करने के लिए आपको धर्म और विज्ञान का तालमेल बिठाना होगा। आइए जानते हैं इसके नियम और अचूक तरीके:
1. दशमी की रात न करें ये भारी भूल
इस व्रत की सफलता की तैयारी एक रात पहले (दशमी की रात) से ही शुरू हो जाती है। अक्सर लोग यह गलती करते हैं कि व्रत शुरू होने से ठीक पहले पेट भरकर पानी पी लेते हैं। यह पानी रात में ही पसीने या यूरिन के रास्ते बाहर निकल जाता है और अगले दिन जल्दी प्यास लगने लगती है।
- क्या करें: दशमी की रात भारी और मसालेदार भोजन के बजाय हल्का सात्विक आहार लें। खाने में तरबूज, खीरा या नारियल पानी शामिल करें। ये चीजें शरीर में पानी को लंबे समय तक रोक कर रखती हैं, जिससे अगले दिन गला नहीं सूखता।
2. क्रोध करने और थूकने की है सख्त मनाही
धार्मिक नियमों के अनुसार, व्रत से एक दिन पहले नमक और मसालेदार भोजन से दूरी बनाना अनिवार्य है। नमक शरीर के पानी को सोख लेता है, जिससे अगले दिन भयंकर प्यास लगती है।
- वैज्ञानिक कारण: शास्त्रों में व्रत के दौरान क्रोध करने और बार-बार थूकने की मनाही है। इसका वैज्ञानिक कारण यह है कि गुस्सा करने से शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है और बार-बार थूकने से मुंह की लार खत्म हो जाती है, जिससे प्यास बर्दाश्त करना नामुमकिन सा हो जाता है।
3. जब कंठ सूखने लगे, तो आजमाएं ‘शीतली प्राणायाम’
दोपहर के समय जब धूप अपने चरम पर हो और आपका कंठ पूरी तरह सूखने लगे, तब प्यास बुझाने के लिए आयुर्वेद और योग की तकनीक ‘शीतली प्राणायाम’ का सहारा लें।
- कैसे करें: अपनी जीभ को बाहर निकालकर एक पाइप की तरह गोल मोड़ लें। अब इसी गोल जीभ के रास्ते ठंडी हवा को अंदर की ओर खींचें और फिर मुंह बंद करके नाक से सांस छोड़ें।
- फायदा: यह छोटी सी क्रिया शरीर के अंदरूनी तापमान को तुरंत ठंडा कर देती है और मुंह में लार (Saliva) बनाती है, जिससे बिना पानी पिए भी प्यास शांत हो जाती है।
4. बिना पानी पिए शरीर को ठंडा रखने के तरीके
निर्जला एकादशी के व्रत में गले से नीचे पानी उतारना वर्जित है, लेकिन शास्त्रों में जल के बाहरी स्पर्श की पूरी छूट दी गई है।
- नहाएं और गीला कपड़ा रखें: इस भीषण गर्मी और लू (Heat Stroke) से बचने के लिए आप दिन में 2-3 बार ठंडे पानी से स्नान कर सकते हैं। अगर आप बाहर हैं, तो एक सूती कपड़े को ठंडे पानी में भिगोकर अपने माथे, गर्दन के पिछले हिस्से और पैरों के तलवों पर रखें। इससे व्रत टूटने की नौबत नहीं आएगी।
- पहनावा: धूप में निकलने से बचें और केवल ढीले, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर को हवा मिलती रहे।
5. इन शीतलता प्रदान करने वाली चीजों का करें दान
इस पावन दिन पर अत्यधिक मेहनत वाले काम न करें, क्योंकि पसीना बहने से शरीर का सारा पानी खत्म हो जाएगा। घर में आराम से बैठकर प्रभु का ध्यान करें। शास्त्रों के अनुसार, निर्जला एकादशी पर ठंडी चीजों के दान का बहुत महत्व है। इस दिन मिट्टी के घड़े (मटके), जल से भरे कलश, खरबूजा, आम, सत्तू और हाथ के पंखे का दान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
6. ‘प्राण रक्षा’ है सबसे बड़ा धर्म (संकट के समय का नियम)
सनातन धर्म में ‘प्राणों की रक्षा’ को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। यदि व्रत के दौरान दोपहर या शाम के समय आपकी तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ने लगे, चक्कर आएं, आंखों के आगे अंधेरा छा जाए या धड़कन बेकाबू हो जाए, तो अपनी जान जोखिम में न डालें।
- क्या करें: ऐसी स्थिति में जबरदस्ती व्रत न खींचें। भगवान विष्णु के सामने हाथ जोड़कर क्षमा मांगें और तुरंत नींबू पानी या ओआरएस (ORS) का घोल पीकर प्राणों की रक्षा करें। पुराणों में स्पष्ट है कि संकट के समय शरीर की रक्षा करना ही सच्ची भक्ति है।
📌 निर्जला एकादशी व्रत से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. निर्जला एकादशी पर प्यास से बचने के लिए एक रात पहले क्या करना चाहिए? Ans: दशमी की रात भारी, तैलीय और अत्यधिक नमक वाले भोजन से बचें। इसकी जगह सात्विक आहार के साथ नारियल पानी, तरबूज, खीरा या पुदीने का पानी लें, जो शरीर को अगले दिन के लिए हाइड्रेटेड रखते हैं।
Q2. भीषण गर्मी में गला बहुत ज्यादा सूखने लगे, तो क्या करें? Ans: बिना पानी के कंठ सूखने पर ‘शीतली प्राणायाम’ करें। जीभ को पाइप की तरह गोल मोड़ें और ठंडी हवा अंदर खींचकर नाक से सांस छोड़ें। इससे शरीर का तापमान गिरेगा और प्यास शांत होगी।
Q3. क्या निर्जला एकादशी पर गर्मी से बचने के लिए बार-बार नहा सकते हैं? Ans: हां, व्रत के नियमों के तहत पानी पीना वर्जित है, लेकिन बाहरी स्पर्श की पूरी छूट है। लू और गर्मी से बचने के लिए आप दिन में 2-3 बार ठंडे पानी से नहा सकते हैं या शरीर पर गीला सूती कपड़ा रख सकते हैं।
Q4. निर्जला एकादशी के दिन किन चीजों का दान शुभ माना जाता है? Ans: ज्येष्ठ माह की गर्मी को देखते हुए इस दिन शीतलता प्रदान करने वाली वस्तुओं जैसे- मिट्टी के घड़े, जल से भरे कलश, खरबूजा, आम, सत्तू, छाता और हाथ का पंखा दान करने से महापुण्य मिलता है।
Q5. अत्यधिक गर्मी के कारण तबीयत बिगड़ने लगे, तो क्या व्रत तोड़ा जा सकता है? Ans: बिल्कुल। शास्त्रों में ‘प्राण रक्षा’ को सर्वोपरि माना गया है। गंभीर डिहाइड्रेशन या चक्कर आने पर भगवान से क्षमा मांगते हुए तुरंत नींबू पानी या ORS का घोल पीकर व्रत खोल लेना चाहिए। शरीर को अस्वस्थ करके कष्ट देना शास्त्रों में वर्जित है।





































