जिम्बाब्वे के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित करीबा झील में इस सप्ताह एक ओवरलोडेड सरकारी फेरी के अचानक पलट जाने से भीषण तबाही मच गई। इस दिल दहला देने वाली दुर्घटना में 18 मासूम बच्चों सहित 72 लोगों की दुखद मौत हो चुकी है। शनिवार के दिन रेस्क्यू टीम ने काफी मशक्कत के बाद पानी से कई अन्य यात्रियों की लाशें बाहर निकालीं। स्थानीय पुलिस ने 72 मौतों की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। यह दुखद घटना मंगलवार को झील में आई अचानक तेज लहरों और ओवरलोडिंग के कारण घटी।
26 नए शव मिलने से बढ़ा आंकड़ा: मंगलवार को घटे इस भीषण हादसे के बाद से ही राहत एवं बचाव दल झील के विशाल क्षेत्र में लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए थे। शनिवार को बचाव अभियान के दौरान 26 और लाशें बरामद की गईं, जिसके बाद मौतों का कुल आंकड़ा 72 तक पहुंच गया। पानी में हादसों का यह दौर केवल जिम्बाब्वे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसी महीने के शुरुआती दिनों में इंडोनेशिया के भीतर भी एक यात्री बोट में अचानक आग लगने से बड़ा और दर्दनाक हादसा घटित हो चुका है, जिसमें कई लोगों को नुकसान पहुंचा था।
ग्रामीण इलाकों की मुख्य जीवनरेखा थी नाव: दुर्घटना का शिकार हुई यह पुरानी फेरी करिबा शहर से उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित ग्रामीण क्षेत्रों और मछली पकड़ने वाले समुदायों की तरफ अपनी यात्रा पर निकली थी। इन दूरदराज के इलाकों में पक्की सड़कों का भारी अभाव है और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं बेहद कम हैं। जिस नाव के साथ यह दर्दनाक हादसा हुआ, उसका संचालन एक सरकारी एजेंसी कर रही थी। करिबा झील के आसपास रहने वाले ग्रामीण आबादी के लोगों को तट पर स्थित करिबा शहर तक ले जाने के लिए मुख्य रूप से इसी नौका सेवा का इस्तेमाल किया जाता था।
क्षमता से दोगुनी थी यात्रियों की भीड़: हादसे के समय नौका में क्षमता से बहुत अधिक लोग सवार थे। अनुमान है कि नाव पर कुल यात्रियों की संख्या 153 तक पहुंच चुकी थी, जबकि सरकारी अधिकारियों के अनुसार उस फेरी की कुल क्षमता केवल 90 लोगों की ही थी। जिम्बाब्वे की डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 77 यात्रियों को डूबने से बचा लिया। अधिकारी ने जानकारी दी कि इन 77 बचाए गए लोगों को तत्काल झील के एक छोटे द्वीप पर पहुंचाया गया और फिर उन्हें वहां से सुरक्षित बाहर लाने के लिए अतिरिक्त नौकाएं भेजी गईं।
बच्चों की मौतों से पसरा मातम: प्रारंभिक जांच में अधिकारियों ने स्वीकार किया कि सवार बच्चों की वास्तविक संख्या तुरंत पता नहीं चल सकी थी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कम उम्र के बच्चों का टिकट न लगने के कारण उन्हें यात्रियों के शुरुआती अनुमान में जोड़ा ही नहीं गया था। बाद में जारी पुलिस की आधिकारिक सूची से स्पष्ट हुआ कि मरने वाले 18 बच्चों में से 16 की उम्र 10 वर्ष या उससे कम थी। इस दुर्घटना में जान गंवाने वाला सबसे छोटा बच्चा महज एक साल का था, जिसकी मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।
जम्बेजी नदी पर बनी है विशाल करिबा झील: करिबा झील को पूरी दुनिया में इंसानों द्वारा निर्मित सबसे बड़ी झील होने का गौरव प्राप्त है। 1950 के दशक के अंतिम वर्षों और 1960 के दशक की शुरुआत में जम्बेजी नदी पर एक विशाल बांध का निर्माण करके इस झील को तैयार किया गया था। यह झील 200 किलोमीटर से अधिक लंबाई में फैली है और कई जगहों पर इसकी चौड़ाई 40 किलोमीटर तक है। अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे और जाम्बिया इस प्राकृतिक संसाधन वाली झील को साझा करते हैं, और दोनों देशों की सीमा रेखा इसके मध्य से होकर गुजरती है।
















































