बबीता पांडे के लापता होने के मामले में पुलिस की जांच के दौरान एक बेहद ही चौंकाने वाला सच सामने आया है। पुलिस को अपनी तफ्तीश में पता चला है कि इस ट्रैकिंग यात्रा में एक भारी प्रशासनिक धोखाधड़ी की गई थी। जांच के दौरान यह बात स्पष्ट हुई कि संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी ने उन्हें इस ट्रैक पर भेजने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। ‘प्रो माउंटेन’ नाम की इस ट्रेकिंग एजेंसी ने नियमों को ताक पर रखकर फर्जी परमिट के जरिए युवाओं को दुर्गम रास्ते पर भेज दिया था। इस बड़े खुलासे के बाद पुलिस ने अब ट्रेकिंग एजेंसी के खिलाफ अपनी कार्रवाई को बहुत ज्यादा सख्त कर दिया है।
पर्यटन पोर्टल पर नहीं मिला कोई भी वैध परमिट इस फर्जीवाड़े की पुष्टि जिले के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आधिकारिक रूप से कर दी गई है। उत्तरकाशी के जिला पर्यटन अधिकारी केके जोशी ने इस मामले में एक बहुत ही महत्वपूर्ण और आधिकारिक बयान दिया है। उन्होंने बताया कि बबीता पांडे और उसके साथ गए दोस्तों के पास कोई भी वैध डिजिटल परमिट मौजूद नहीं था। आधिकारिक पर्यटन पोर्टल ‘एक्सप्लोर उत्तरकाशी’ की जांच करने पर उनके नाम से कोई भी पंजीकरण या परमिट दर्ज नहीं मिला है। इससे यह पूरी तरह साफ हो गया है कि एजेंसी ने प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर यह पूरी ट्रैकिंग आयोजित करवाई थी।
नियमों के उल्लंघन पर एजेंसी का लाइसेंस निलंबित फर्जी परमिट का यह मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने ट्रेकिंग एजेंसी के खिलाफ तुरंत सख्त कदम उठाया है। जांच में यह भी पूरी तरह से साबित हो गया है कि ‘प्रो माउंटेन’ एजेंसी ने सरकारी राजस्व नियमों का भारी उल्लंघन किया था। इस धोखाधड़ी और लापरवाही को बेहद गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने एजेंसी का रजिस्ट्रेशन तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से पर्यटकों की जान को सीधा खतरा पैदा होता है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एजेंसी के संचालकों के खिलाफ अब कानूनी कार्रवाई करने की प्रक्रिया भी प्रशासन द्वारा तेजी से शुरू कर दी गई है।
पुलिस की कार्रवाई और दोस्तों को लिया हिरासत में लापता छात्रा की तलाश के साथ-साथ पुलिस अब इस मामले के हर एक संदिग्ध पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है। इसी जांच के सिलसिले में पुलिस ने बबीता के साथ गए उसके दोनों दोस्तों को तुरंत हिरासत में ले लिया है। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए इन युवकों की पहचान हरमनपाल सिंह और हरमनप्रीत सिंह के तौर पर हुई है। इनमें से हरमनपाल उधम सिंह नगर जिले का रहने वाला है जबकि हरमनप्रीत उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर का निवासी है। पुलिस अब इन दोनों से बहुत ही सख्ती के साथ लगातार पूछताछ करके घटना की असली वजह जानने की कोशिश कर रही है।
गाइड और अन्य अधिकारियों से पुलिस की लंबी पूछताछ दोस्तों को हिरासत में लेने के अलावा पुलिस ने एजेंसी के कर्मचारियों पर भी अपना शिकंजा पूरी तरह से कस दिया है। पुलिस की टीम उस ट्रेकिंग गाइड से भी पूछताछ कर रही है जो घटना वाले दिन इन युवाओं के साथ कैंप में मौजूद था। इसके साथ ही ‘प्रो माउंटेन’ ट्रेकिंग एजेंसी के अन्य अधिकारियों को भी तलब करके उनसे लगातार सवाल-जवाब किए जा रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या बबीता के गायब होने में इनमें से किसी की कोई प्रत्यक्ष भूमिका है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन सभी लोगों से पूछताछ के बाद ही इस रहस्यमय घटना का असली सच सामने आ पाएगा।
परिजनों का बेस कैंप पहुंचना और तलाश अभियान जारी इस पूरे घटनाक्रम के बीच बबीता का परिवार बहुत गहरे सदमे और भारी निराशा के दौर से गुजर रहा है। सूचना मिलते ही लापता छात्रा का एक चचेरा भाई जानकारी जुटाने के लिए दयारा के आधार शिविर रैथल पहुंच गया था। परिवार के लोग लगातार पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर अपनी बेटी को जल्द से जल्द खोजने की गुहार लगा रहे हैं। दूसरी तरफ एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आईटीबीपी के 100 से अधिक जवान ड्रोन और हेलीकॉप्टर की मदद से लगातार अपना सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि वे बबीता को खोजने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।





































