व्हाइट हाउस ने गुरुवार रात स्पष्ट किया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance अपनी Switzerland यात्रा को टाल रहे हैं। उन्हें वहां ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर होने वाली बातचीत के एक नए दौर की अगुवाई करनी थी। स्विस विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि कर दी है कि बर्गनस्टॉक माउंटेनटॉप रिज़ॉर्ट में शुक्रवार को होने वाली यह बातचीत अब नहीं होगी। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य तेहरान और वाशिंगटन के बीच युद्ध खत्म करने के समझौते को लागू करने पर चर्चा करना था। यह यात्रा टलने से युद्ध खत्म करने के मकसद से हुए इस शुरुआती समझौते के भविष्य पर कई नए सवाल उठने लगे हैं।
यात्रा रद्द होने के पीछे की असली वजह: व्हाइट हाउस के अनुसार JD Vance की अगुवाई वाली टीम इस बातचीत के लिए पूरी तरह से रवाना होने के लिए तैयार थी। लेकिन बातचीत से जुड़ी विभिन्न लॉजिस्टिकल चुनौतियों की वजह से ऐन मौके पर इस जरूरी यात्रा को टालने का फैसला लिया गया। यह महत्वपूर्ण घोषणा लेबनानी चैनल अल-मायादीन की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आने के ठीक बाद हुई है। रिपोर्ट में बताया गया कि लेबनान में इजराइल के लगातार जारी मिलिट्री ऑपरेशन की वजह से ईरान अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने में देरी कर रहा है। इसी देरी और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए दोनों पक्षों ने फिलहाल इस बैठक को कुछ समय के लिए स्थगित करना ही उचित समझा है।
लेबनान पर इजराइल का विनाशकारी हमला: एक तरफ शांति वार्ता रद्द हो रही है, वहीं दूसरी तरफ Israel ने Lebanon पर अपने सैन्य हमले काफी तेज कर दिए हैं। लेबनान की नेशनल न्यूज़ एजेंसी के अनुसार दक्षिणी लेबनान के नबातीह ज़िले में इजराइली हवाई हमलों ने रात भर भारी तबाही मचाई है। इस भयानक तोपखाने की गोलाबारी और बमबारी में कम से कम सोलह लोग मारे गए हैं और कई अन्य लापता हो गए हैं। न्यूज़ एजेंसी ने इस विनाशकारी बमबारी को हाल के महीनों में इस इलाके पर हुए सबसे भीषण इजराइली हमलों में से एक बताया है। आधी रात के ठीक बाद हुए इस अचानक हमले में मुख्य रूप से कई रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया गया है।
ईरान की अमेरिका को सख्त चेतावनी: इस टूटते समझौते के बीच ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने अमेरिका को एक बेहद ही कड़ी चेतावनी जारी की है। सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अगर अमेरिका शांति समझौते का उल्लंघन करता है, तो ईरान के पास जवाबी कार्रवाई की योजना मौजूद है। काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि वह तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक ईरानी राष्ट्र के पूरे अधिकार पूरी तरह बहाल नहीं हो जाते। उन्होंने साफ तौर पर आगाह किया है कि अगर अमेरिका की तरफ से समझौते से कोई भी विचलन होता है तो परिणाम गंभीर होंगे। ईरान ने कहा है कि वह ऐसी स्थिति में अपनी पहले से तय योजना के अनुसार तुरंत और कड़ी जवाबी कार्रवाई करेगा।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भी टाली यात्रा: इस तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच Pakistan के प्रधानमंत्री Shahbaz Sharif ने भी अपनी Switzerland यात्रा को टालने का फैसला किया है। उन्हें वहां अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले महत्वपूर्ण समारोह में हिस्सा लेने के लिए विशेष रूप से जाना था। उनके प्रवक्ता मुशर्रफ़ ज़ैदी ने कहा कि यह प्रस्तावित यात्रा इसलिए टाल दी गई है क्योंकि समझौता ज्ञापन पर पहले ही हस्ताक्षर हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक रूप से हुआ यह समझौता सफलतापूर्वक लागू हो चुका है और अब जमीनी स्तर पर इस पर अमल भी हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि Pakistan भविष्य में कई तकनीकी-स्तर के चरणों के अगले हिस्से का पूरी तरह से समर्थन करेगा।
शांति समझौते के भविष्य पर मंडराते संकट के बादल: इन सभी ताजा और विवादास्पद घटनाक्रमों के बाद इस ऐतिहासिक समझौते के सही तरीके से लागू होने पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। कूटनीतिक बैठकों का रद्द होना और सैन्य हमलों का लगातार जारी रहना इस पूरी शांति प्रक्रिया के लिए बहुत बड़ा खतरा बन चुका है। मध्य पूर्व में हर दिन लगातार बदलती यह स्थिति शांति के प्रयासों को हर दिन नई चुनौतियों की ओर धकेल रही है। दुनिया के सभी देशों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच आगे की बातचीत कैसे और कब होगी। सभी वैश्विक नेता यही उम्मीद कर रहे हैं कि यह समझौता टूटने के बजाय इस अशांत क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने में सफल होगा।


























































