अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह प्रस्तावित भारत दौरा एक ऐसे महत्वपूर्ण समय में होने जा रहा है जब दोनों देश बड़े फैसले ले रहे हैं। वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच एक बेहद अहम द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर गहन बातचीत का दौर चल रहा है। इस व्यापारिक वार्ता के संबंध में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बहुत ही सकारात्मक और बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच होने वाला यह व्यापार समझौता अब पूरी तरह से संपन्न होने के बेहद करीब पहुंच चुका है।
वार्ता के सकारात्मक संकेत मार्को रुबियो ने व्यापार वार्ता की वर्तमान स्थिति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि सब कुछ बहुत बढ़िया और सही दिशा में चल रहा है। दोनों देशों के बीच चल रही आर्थिक और व्यापारिक चर्चा इस समय अपने सबसे मजबूत दौर से गुजर रही है। जी7 समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बैठक में भी इस पर चर्चा हुई थी। अमेरिकी प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि वे जल्द ही इस व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में सफल हो जाएंगे। यह सकारात्मक प्रगति दोनों देशों के आर्थिक भविष्य को नई मजबूती देगी।
ऊर्जा सहयोग में साझेदारी व्यापारिक मुद्दों के अलावा भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग के क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर काम किया जा रहा है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि दोनों देश ऊर्जा क्षेत्र में आपूर्ति को निरंतर बढ़ाने के लिए मिलकर प्रयास कर रहे हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और बाजार की जरूरतों को पूरा करना है। ऊर्जा के क्षेत्र में यह आपसी सहयोग आने वाले समय में दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों का एक मुख्य आधार स्तंभ बनने जा रहा है।
कच्चे तेल की रिफाइनिंग क्षमता मार्को रुबियो ने भारत की औद्योगिक और तकनीकी क्षमता की सराहना करते हुए कच्चे तेल के विषय पर एक विशेष तथ्य रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया के उन बेहद चुनिंदा देशों की सूची में शामिल है जिसके पास भारी कच्चे तेल को रिफाइन करने की क्षमता है। भारत की यह विशिष्ट रिफाइनिंग क्षमता उसे वैश्विक तेल बाजार में एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक स्थान प्रदान करती है। अमेरिका भारत की इस तकनीकी विशेषज्ञता और औद्योगिक क्षमता को ध्यान में रखकर ही अपने ऊर्जा संबंधों को आगे बढ़ा रहा है।
आर्थिक मोर्चे पर लाभ इस प्रस्तावित व्यापार और ऊर्जा समझौते के पूरी तरह से लागू होने के बाद दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को व्यापक लाभ मिलेगा। कमोडिटी और अन्य व्यापारिक वस्तुओं के आदान-प्रदान में आने वाली बाधाएं दूर होंगी जिससे द्विपक्षीय व्यापार का ग्राफ तेजी से ऊपर जाएगा। दोनों देशों के बाजार एक-दूसरे के लिए अधिक सुलभ और पारदर्शी तरीके से काम करने के लिए पूरी तरह तैयार हो रहे हैं। यह समझौता वैश्विक मंदी के इस दौर में दोनों मित्र देशों के आर्थिक हितों की रक्षा करने में मददगार होगा।
राजनयिक प्रयासों में तेजी इस ऐतिहासिक समझौते को राष्ट्रपति ट्रंप की संभावित भारत यात्रा के दौरान या उससे पहले अमलीजामा पहनाने की कोशिशें तेज हैं। दोनों देशों के उच्च अधिकारी और राजनयिक इस समय दिन-रात एक करके समझौते के सभी कानूनी और तकनीकी पहलुओं को सुलझा रहे हैं। मार्को रुबियो का यह बयान दर्शाता है कि अमेरिका इस डील को लेकर कितना गंभीर और बेहद उत्सुक नजर आ रहा है। आने वाले कुछ महीने भारत और अमेरिका के आर्थिक और रणनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने वाले साबित होंगे।





































