भारत की पहली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन का संचालन मुख्य रूप से हरियाणा राज्य में किया जाना तय हुआ है। यह आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल ट्रेन हरियाणा के जींद से सोनीपत रेल सेक्शन के बीच चलाई जाएगी। रेल मंत्रालय द्वारा इस मार्ग पर ट्रेन के संचालन को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं। जिन रेल मार्गों पर फिलहाल ओवरहेड वायरिंग यानी बिजली के तार नहीं हैं, वहां यह बेहतर विकल्प है। इन बिना बिजली वाले रूटों के लिए हाइड्रोजन तकनीक को गेम-चेंजर माना जा रहा है।
दस कोच की मंजूरी: बीते 27 मई को भारतीय रेलवे ने इस संबंध में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आधिकारिक फैसला लिया था। रेलवे ने नॉर्दर्न रेलवे के जींद-सोनीपत सेक्शन पर 10-कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की मंजूरी प्रदान की थी। यह विशेष ट्रेन पूरी तरह से हाइड्रोजन फ्यूल सेल-बेस्ड प्रोपल्शन सिस्टम पर आधारित होकर काम करेगी। रेल मंत्रालय के मुताबिक, यह 10 कोच वाली ट्रेन अब पटरियों पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस मंजूरी के बाद से ही हरियाणा के इस रेल खंड पर तैयारियां तेज हैं।
तकनीकी क्षमता और गति: रेल मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार इस ट्रेन में शक्तिशाली प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है। यह ट्रेन 1200 किलोवाट (KW) के हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम का प्रयोग करके ऊर्जा उत्पन्न करेगी। व्यावसायिक संचालन के दौरान यह ट्रेन 75 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम स्पीड से पटरियों पर दौड़ेगी। यह गति सीमा यात्रियों की सुरक्षा और ईंधन की दक्षता को संतुलित रखने के लिए तय की गई है। इस गति के साथ ट्रेन कम समय में सफर पूरा करने में सक्षम होगी।
ट्रेन का आकर्षक रंग: जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली देश की यह पहली हाइड्रोजन ट्रेन देखने में भी बहुत अनूठी होगी। इस पूरी ट्रेन का रंग विशेष रूप से चमकीला नीला निर्धारित किया गया है जो इसकी पहचान बनेगा। नीले रंग की यह ट्रेन अपनी आधुनिक बनावट और आकर्षक लुक के कारण यात्रियों को बहुत पसंद आएगी। इसका इंटीरियर भी यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर बेहद आरामदायक और विश्वस्तरीय बनाया गया है। यह ट्रेन भारतीय पटरियों पर एक नया और खूबसूरत आकर्षण जोड़ने जा रही है।
ईंधन और कार्यप्रणाली: इस हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना किसी धुएं के संचालित होती है। इस ट्रेन में लगी हाइड्रोजन गैस वायु में मौजूद ऑक्सीजन के साथ रासायनिक क्रिया करके बिजली बनाती है। इसी बिजली की मदद से ट्रेन का शक्तिशाली मोटर चलता है और ट्रेन पटरियों पर आगे बढ़ती है। इस पूरी रासायनिक प्रक्रिया में कोई भी हानिकारक तत्व या गैस पर्यावरण में उत्सर्जित नहीं होती है। एक बार ईंधन भरने पर यह ट्रेन बिना रुके कई सौ किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है।
अगले महीने से शुरुआत: यदि आगामी समय में सब कुछ निर्धारित योजना के अनुसार ठीक रहा, तो इसकी शुरुआत बेहद करीब है। यह नीले रंग की आधुनिक ट्रेन अगले महीने से ही पटरियों पर अपनी व्यावसायिक दौड़ लगाती नजर आएगी। जींद से सोनीपत के बीच के स्थानीय यात्रियों के लिए यह सेवा एक बड़ी सौगात साबित होने वाली है। पर्यावरण के प्रति जागरूक नागरिकों के लिए भी इस ट्रेन का सफर एक बेहद सुखद अनुभव लेकर आएगा। रेलवे प्रशासन इस ऐतिहासिक उद्घाटन को भव्य बनाने की अंतिम तैयारियों में जुटा हुआ है।





































