क्या आप जानते हैं कि वर्ष में चैत्र और आश्विन माह की प्रसिद्ध शारदीय व वासंतिक नवरात्रि के अलावा भी दो और नवरात्रि आती हैं? हिंदू पंचांग के अनुसार, एक वर्ष में कुल चार नवरात्रि होती हैं, जिनमें से दो को ‘गुप्त नवरात्रि’ कहा जाता है। इनमें से एक गुप्त नवरात्रि माघ महीने में आती है, तो दूसरी आषाढ़ महीने में मनाई जाती है। 15 जुलाई से आषाढ़ माह की इस अत्यंत फलदायी गुप्त नवरात्रि का पावन शुभारंभ हो चुका है।
सामान्य नवरात्रि की तरह ही इस नवरात्रि में भी पूरे विधि-विधान से कलश स्थापना की जाती है और व्रत रखे जाते हैं। लेकिन इस नवरात्रि को जो बात सबसे अलग और रहस्यमयी बनाती है, वह है— 10 महाविद्याओं की पूजा। आइए विस्तार से जानते हैं इसका महत्व और इससे जुड़ी पौराणिक कथाएं।
क्यों खास है गुप्त नवरात्रि?
इस पवित्र अवधि के दौरान उपासक मां अंबे के नौ चिर-परिचित स्वरूपों की पूजा करने के साथ-साथ उनकी 10 विशेष शक्तियों (जिन्हें दस महाविद्या कहा जाता है) की भी गुप्त रूप से आराधना करते हैं।
शास्त्रों के अनुसार, इन 10 महाविद्याओं (मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला) की गुप्त उपासना से जीवन के बड़े से बड़े संकट दूर हो जाते हैं। मान्यता है कि इनकी साधना से भयंकर ग्रह दोषों की शांति होती है, शत्रुओं का नाश होता है और साधक की समस्त लौकिक व अलौकिक मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। यदि आप भी इस गुप्त नवरात्रि का व्रत रख रहे हैं या देवी की साधना कर रहे हैं, तो इन दिव्य कथाओं का पठन अवश्य करें।
कथा 1: राजकुमार सुदर्शन और ‘क्लीं’ मंत्र का चमत्कार
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में कोशल नामक राज्य में सुदर्शन नाम का एक नन्हा राजकुमार रहता था। राजमहल में हुए भारी षड्यंत्र और सैन्य विद्रोह के कारण सुदर्शन और उसके परिवार की जान खतरे में आ गई थी। अपने प्राणों की रक्षा हेतु उसे अपनी माता के साथ राजमहल का त्याग कर एक घने जंगल में शरण लेनी पड़ी।
एक दिन जब बाल राजकुमार सुदर्शन जंगल में खेल रहा था, तभी उसे पेड़ों के झुरमुट से एक अनजानी लेकिन स्पष्ट आवाज सुनाई दी। बच्चा होने के कारण राजकुमार ने उस ध्वनि को पकड़ लिया और बार-बार उसी शब्द को दोहराने लगा। सुदर्शन को इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वह अनजाने में ही ‘क्लीं’ बीज मंत्र का जाप कर रहा है, जो मां दुर्गा (विशेषकर मां काली और कामख्या) का अत्यंत शक्तिशाली और सिद्ध मंत्र माना जाता है।
संयोगवश, जिस समय राजकुमार के साथ यह घटना घटित हो रही थी, उस समय आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा था। नन्हे राजकुमार की इस अनजाने में की गई सच्ची और निर्मल भक्ति से मां भगवती अत्यंत प्रसन्न हुईं। उन्होंने चमत्कारिक रूप से उसे अपना खोया हुआ राज्य वापस प्राप्त करने का अमोघ आशीर्वाद दिया। मां की कृपा से आगे चलकर परिस्थितियां बदलीं और राजकुमार सुदर्शन अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर एक प्रतापी राजा बना।
कथा 2: महर्षि श्रृंगी और दुखी महिला का उद्धार
गुप्त नवरात्रि के महत्व को दर्शाने वाली एक अन्य कथा भी काफी प्रचलित है। एक बार महर्षि श्रृंगी एक विशाल पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर लोगों की परेशानियां सुन रहे थे और उनका मार्गदर्शन कर रहे थे। तभी वहां एक अत्यंत दुखी और परेशान महिला आई।
उसने हाथ जोड़कर महर्षि से अपनी व्यथा कहते हुए बताया, “मुनिवर! मैं मां दुर्गा की कृपा प्राप्त नहीं कर पा रही हूं क्योंकि मेरा पति बुरे कर्मों और व्यसनों में लिप्त रहता है। वह न केवल खुद गलत रास्ते पर चलता है, बल्कि मुझे भी उसी मार्ग पर चलने के लिए विवश करता है। उसके क्रोध और भय के कारण मैं न तो कोई व्रत रख पाती हूं और न ही भगवान की पूजा-पाठ कर पाती हूं। कृपया मेरा मार्गदर्शन करें।”
महिला की पीड़ा सुनकर महर्षि श्रृंगी ने उसे गुप्त नवरात्रि का गूढ़ रहस्य बताया। उन्होंने कहा, “पुत्री! वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्रियां आती हैं, जिनमें देवी के दस महाविद्या स्वरूपों की अत्यंत गुप्त रूप से पूजा होती है। यदि तुम इन नवरात्रियों में बिना किसी को बताए, पूरी श्रद्धा और गुप्त तरीके से मां दुर्गा की उपासना करोगी, तो मां अवश्य प्रसन्न होंगी। इससे न केवल तुम्हारे जीवन में सुख-शांति आएगी, बल्कि तुम्हारा पति भी सन्मार्ग पर आ जाएगा।”
ऋषि के कहे अनुसार महिला ने ऐसा ही किया। उसने अत्यंत गुप्त रूप से महाविद्याओं की साधना और नवरात्रि का व्रत किया। मां दुर्गा की अपार कृपा से जल्द ही उसके जीवन में बड़ा चमत्कार हुआ। उसका पति अपने सभी बुरे कर्मों को छोड़कर धर्म के मार्ग पर आ गया और उस महिला के जीवन के सारे दुखों का हमेशा के लिए अंत हो गया।


























































