ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य अभियान के बीच वाशिंगटन से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बहुत ही बुरी और हताश करने वाली राजनीतिक खबर सामने आई है। अमेरिकी सीनेट ने ट्रंप सरकार द्वारा प्रस्तावित 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 96 लाख करोड़ भारतीय रुपये से अधिक के वार्षिक रक्षा बजट को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सीनेट में मौजूद विपक्षी दल के सांसदों ने इस भारी भरकम रक्षा बजट को रोकने के लिए एकजुट होकर मतदान किया। विपक्ष ने साफ किया कि वे ईरान के खिलाफ चल रही इस अघोषित और विनाशकारी जंग के विरोध में यह बड़ा कदम उठाने के लिए पूरी तरह मजबूर हुए हैं।
सेना का बजट अटका अमेरिकी सीनेट के पटल पर डेमोक्रेट्स ने नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट के नाम से प्रसिद्ध इस महत्वपूर्ण सालाना रक्षा विधेयक को पारित होने की राह में बड़ा रोड़ा अटका दिया। डेमोक्रेट्स सांसदों ने एक सुर में कहा कि वे ईरान के खिलाफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा छेड़े गए इस युद्ध के पूरी तरह खिलाफ हैं और इसका अंत चाहते हैं। यही वजह है कि उन्होंने द्विदलीय समर्थन वाले इस पूरे सैन्य पैकेज को सीनेट के भीतर आगे बढ़ाने से साफ मना कर दिया। इस अटके हुए रक्षा बिल में देश के सैन्य जवानों के वेतन में बड़ी वृद्धि करने और पेंटागन के सैन्य खर्चों को व्यापक स्तर पर बढ़ाने का अहम प्रस्ताव रखा गया था।
पार्टी लाइन पर मतदान संसद के इस उच्च सदन में विपक्षी डेमोक्रेट नेता चक शूमर ने इस विवादित बिल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सदन में इसकी कड़ी और तीखी खिलाफत की। शूमर के साथ खड़े अन्य शीर्ष डेमोक्रेट नेताओं ने भी दोहराया कि जब ईरान के साथ युद्ध पांचवें महीने में प्रवेश कर चुका है, तब वे इस वार्षिक रक्षा विधेयक का किसी भी सूरत में समर्थन नहीं कर सकते हैं। सीनेट में इस बिल पर हुए मतदान का अंतिम परिणाम 50 के मुकाबले 46 मतों का रहा। परिणाम स्वरूप, पार्टी लाइन पर आधारित इस मतदान के कारण नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट का यह बिल कानून बनने के लिए आवश्यक न्यूनतम बहुमत जुटाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ।
चक शूमर का कड़ा बयान इस ऐतिहासिक वोटिंग प्रक्रिया के संपन्न होने के तुरंत बाद सीनेट सदस्य चक शूमर ने ट्रंप प्रशासन की युद्ध नीतियों की खुले तौर पर आलोचना करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) उस लापरवाही के लिए किसी भी प्रकार की कोई परमिशन स्लिप नहीं बन सकता है जिसे हम सभी वर्तमान समय में ईरान की धरती पर घटित होते हुए देख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीनेट बिना सोचे-समझे युद्ध के लिए इतने बड़े बजट की अनुमति देकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकती है। विपक्ष के इस आक्रामक रुख ने ट्रंप सरकार की भावी सैन्य योजनाओं को तगड़ा झटका दिया है।
युद्ध नीति पर तीखे सवाल विपक्षी नेता चक शूमर ने अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप देश के आम नागरिकों को एक ऐसे अंतहीन युद्ध की आग में और अधिक नहीं झोंक सकते जिसे देश की जनता समझ ही नहीं पा रही है। उन्होंने आगे कहा कि खुद राष्ट्रपति ट्रंप के पास भी इस जारी जंग को सम्मानजनक तरीके से समाप्त करने का कोई स्पष्ट विज़न या तरीका मौजूद नहीं है। चक शूमर के अनुसार, इतनी बड़ी सैन्य गलती करने के बाद भी ट्रंप प्रशासन कांग्रेस से यह उम्मीद कर रहा है कि वह आँखें मूंदकर इस पूरे मामले की पूरी तरह अनदेखी कर दे।
चुनावी साल में बढ़ी हलचल सीनेट में इस रक्षा बिल का गिरना ट्रंप सरकार के लिए इसलिए भी बड़ा झटका है क्योंकि एक दिन पहले ही व्हाइट हाउस ने कांग्रेस को यह आधिकारिक जानकारी दी थी कि उसने ईरान पर दोबारा भीषण बमबारी शुरू कर दी है। इस नए आदेश के बाद दोनों देशों के बीच पूर्व में हुआ अस्थाई सीजफायर आधिकारिक तौर पर पूरी तरह समाप्त हो गया है। ओवल ऑफिस में आयोजित एक बेहद गुप्त सैन्य ब्रीफिंग के बाद ही राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम को रद्द करने का यह आक्रामक फैसला लिया था। इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर गंभीर आर्थिक मंदी छा गई है और देश में होने वाले मिड-टर्म इलेक्शन से ठीक पहले गैस की कीमतों में भारी अस्थिरता पैदा हो गई है।


























































