लेबनान देश के राष्ट्रपति जोसेफ आउन अपने चार दिनों के विदेशी दौरे के अंतिम पड़ाव पर मंगलवार को वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। दोनों शीर्ष नेताओं के बीच होने वाली यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसका प्राथमिक ध्येय क्षेत्र में लंबे समय तक शांति बनाए रखना है। इजरायल और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह मिलिटेंट ग्रुप के बीच महीनों से चले आ रहे संघर्ष के बाद यह कूटनीतिक पहल की जा रही है। युद्ध से जूझ रहे लेबनानी नागरिकों के लिए यह बैठक काफी उम्मीदें लेकर आई है। अमेरिकी मध्यस्थता के जरिए दोनों देशों के बीच बने तनाव को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
वाशिंगटन की मध्यस्थता से बातचीत: वाशिंगटन द्वारा शुरू कराई गई मध्यस्थता के तहत इजरायल और लेबनान के बीच इस समय सीधे तौर पर बातचीत का दौर जारी है। लेबनानी सरकार को यह उम्मीद है कि इस शांति वार्ता के सकारात्मक परिणाम निकलेंगे और इजरायली सेना अपने कब्जे वाले इलाकों को खाली कर देगी। विशेष रूप से दक्षिणी लेबनान के बड़े भूभाग से इजरायली सैनिकों के हटने की संभावना जताई जा रही है ताकि वहां शांति बहाल हो सके। इसके अलावा लेबनान की अपनी राष्ट्रीय सेना को उन संवेदनशील इलाकों में अपना पूरा नियंत्रण हासिल करने में मदद मिलेगी। इन सीमावर्ती क्षेत्रों में काफी लंबे समय से हिज़्बुल्लाह मिलिटेंट्स का पूरी तरह दबदबा कायम रहा था।
फ्रेमवर्क एग्रीमेंट और संबंध: पिछले महीने 26 जून को दोनों पक्षों ने मिलकर एक ऐतिहासिक ‘फ्रेमवर्क एग्रीमेंट’ की औपचारिक घोषणा की थी। इस रूपरेखा समझौते के तहत दक्षिणी लेबनानी क्षेत्रों से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और हिज़्बुल्लाह के हथियार छोड़ने की योजना तैयार की गई है। दशकों से उस पूरे इलाके में हिज़्बुल्लाह संगठन का काफी गहरा और मजबूत प्रभाव बना हुआ था। यह समझौता दोनों राष्ट्रों के बीच भविष्य में एक औपचारिक शांति समझौते की ओर बढ़ने के लिए ठोस आधार तैयार करता है। इजरायल की स्थापना के बाद से पिछले 80 वर्षों के इतिहास में दोनों देशों के बीच कभी कोई औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित नहीं हो सके थे और वे नाममात्र के लिए युद्ध की स्थिति में रहे हैं।
पायलट जोन पर बनी सहमति: इस शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से इटली के रोम शहर में दो दिनों तक अमेरिका की देखरेख में बातचीत हुई थी। इस सफल कूटनीतिक वार्ता के बाद लेबनान और इजरायल साउथ लेबनान क्षेत्र में ‘पायलट जोन’ लागू करने की दिशा में आगे बढ़े। इस व्यवस्था के क्रियान्वयन से इजरायली सेना निर्धारित क्षेत्रों को खाली कर देगी और पूरा कंट्रोल लेबनान आर्मी को सौंप दिया जाएगा। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि यह बातचीत बहुत सफल रही। दोनों ही देश पायलट जोन प्रक्रिया के ढांचे और दिशा-निर्देशों पर पूरी तरह राजी हो चुके हैं।
तीन गांवों में प्रक्रिया की शुरुआत: अमेरिकी विदेश विभाग ने सोमवार को नया अपडेट देते हुए घोषणा की कि ‘पायलट जोन’ के अंतर्गत आने वाले तीन गांवों में ऑपरेशन शुरू कर दिए गए हैं। हालांकि विभाग द्वारा जारी इस घोषणा में इस बात की जानकारी नहीं दी गई है कि इन ऑपरेशनों में क्या-क्या शामिल है। जिन तीन गांवों को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है, उनके नाम फ्रौन, श्रीफा और जवतार अल-ग़रबीह दर्ज हैं। ये तीनों क्षेत्र फिलहाल इजरायली सेना के नियंत्रण में नहीं हैं। अमेरिका का यह कदम जमीनी स्तर पर सेना के हस्तांतरण की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है।
शांति प्रक्रिया पर वैश्विक नजर: वाशिंगटन की तरफ से की गई इस बड़ी घोषणा के तुरंत बाद दोनों देशों के शीर्ष स्तर से कोई त्वरित प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेबनान या इजरायल की सेना और उनके राजनीतिक नेतृत्व ने इस पूरे मामले पर फिलहाल तुरंत कोई बयान जारी नहीं किया है। राष्ट्रपति जोसेफ आउन की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली यह शिखर बैठक अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यदि दोनों नेताओं की यह वार्ता सफल रहती है, तो इससे दक्षिणी लेबनान में दशकों बाद स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें मंगलवार को वाशिंगटन में होने वाली इस उच्चस्तरीय बैठक के नतीजों पर टिकी हुई हैं।


























































